योगी से नाराज हो रहे हैं अपने ही पार्टी के विधायक और सांसद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पौनें तीन वर्ष के कार्यकाल में अपनी ही पार्टी के सांसद और विधायकों के निशाने पर चढ़ते जा रहे हैं। लखनऊ की मोहनलालगंज सीट से सांसद कौशल किशोर ने लखनऊ के एसएसपी के कार्यप्रणाली पर हमला करते हुऐ अपनी फेसबुक वाल पर लिखा है कि “पुलिस के नकारात्मक रवैये के चलते अपराधी निरंकुश हो गये हैं।हत्या और लूट का सिलसिला बदस्तूर जारी है”। इसके पहले गाजियाबाद की लोनी सीट से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने विधानसभा के शीतसत्र में उठा कर अपनी ही सरकार के सुशासन की हवा निकलवा दिया था। जिसमें उन्होंने एक फूड इन्सपेक्टर और एसएसपी गाजियाबाद की भ्रष्टाचार में संलिप्तता को लेकर जब आवाज उठाई तो उनको थाने में लाकर चार घंटे बैठाया गया। जब वह विधानसभा में आप बीती बताना चाहते थे उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। फिर क्या विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के दर्जनों विधायक उनके समर्थन में कूद पड़े।पिछले सप्ताह गुजरात के सूरत में आयोजित एक कार्यक्रम में जौनपुर की बदलापुर सीट से निर्वाचित भाजपा विधायक रमेश मिश्र ने कहा कि आईपीएस-आईएएस भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा हैं। इसी लिएसमाज में हर कोई अपने बच्चे को नेता न बना कर आईएएस-आईपीएस बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि पूरी जिंदगी लूटते हैं। बरेली की कैंट सीट से भाजपा विधायक डॉ अरुण सिन्हा ने कहा कि अफसरशाही की जो लूट इस सरकार में देख रहा हूँ वैसा सोचा भी नहीं था। हम सत्ताधारी दल के विधायक हैं फिर भी हमें यह कुबूल करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि मैं कोई काम नहीं करवा पा रहा हूँ। मेरी सरकार में ऊपर मेरी बात नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने कहा कि मेरी तरह और भी विधायक हैं जिनकी बात सरकार में नहीं सुनी जा रही है।यदि अफसरों से नाराजगी का आंकड़ा इकट्ठा करेंगे तो पता चलेगा कि जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है शायद ही कोई ऐसा जिला होगा जंहा भाजपा सांसद, विधायक और उनके नेताओं की स्थानीय प्रशासन से सामंजस्य बिल्कुल ठीक रहा होगा। इसी सरकार में बस्ती जिले में भाजपा के सांसद और विधायकों पर उस समय मुकदमा पंजीकृत हुआ जब किसी मांग को लेकर ये लोग धरना दे रहे थे। इस संदर्भ में भाजपा मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार दिवस दुबे उर्फ बड़े गुरु ने कहा कि भाजपा में यह कोई नई बात नहीं है। भाजपा विपक्ष से नहींभाजपाइयों से ही हारती है।


फिलहाल जिस सरकार में जब मंत्री रो रहा हो कि मेरे पास कुछ करने का अधिकार नहीं है, विभागीय प्रमुख सचिव सुनता ही नहीं। प्रसंग यहीं नहीं थमता विभागीय प्रमुख सचिवों से परेशान कई संघी पृष्टभूमि के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से नौकरशाहों की शिकायत किया तो उन्होंने टका का जवाब दिया कि अभी इन्हीं से काम चलाओ फिर देखेंगे। अब तो फोड़ा नासूर बन चुका है, नागरिकता बिल न आया होता तो अब तक नाराज मंत्रियों और विधायकों का एक राउंड हंगामा बरप चुका होता। समय रहते भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस नासूर का शल्य समाधान नहीं किया तो 2020 में भाजपा अपनों के गुस्से का शिकार हो जाएगी।


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