जिला गाजियाबाद के प्रसिद्ध वकील सुरेंद्र कुमार एडवोकेट ने महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को देश में समता, समानता और स्वतंत्रता पर आधारित भारतवासियों के मूल अधिकारों और संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए लिखा पत्र

 पत्र निम्न प्रकार है 

सेवा में,

     महामहीम राष्ट्रपति महोदय।भारत सरकार,राष्ट्रपति भवन,नई दिल्ली।

मा प्रधान मंत्री महोदय भारत सरकार नई दिल्ली। 

     माननीय मुख्य न्यायधीश महोदय भारत नई दिल्ली ।

          विषय: देश में समता समानता और स्वतंत्रता पर आधारित हम भारतवासियों के मुलाधिकारो और संविधानिक अधिकारो की सुनिश्चित साविधानिक विधी और न्याय व्यवस्था "शक्ति पृथककरण के सिद्धांत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के  लिए"  संविधानिक न्याय, विधी एव कानून व्यवस्था के वक्ता प्रवक्ता के रुप में निष्पक्ष और स्वतंत्र होकर बार और बेंच के समक्ष कोर्ट आफिसर के रुप में निष्पक्ष पैरोकारी के लिए सम्मानित अधिवक्ताओ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए "एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट" बनाकर अविलंब अध्यादेश जारी/लागू करने और सरकार कार्यपालिका द्वारा संविधानिक व्यवस्था शक्ति प्रथककरण के सिद्धांत के विरुद्ध पुलिस को दी गई निरंकुश शक्तियां/कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां वापस लेकर न्यायहित में समाप्त की जाए ।


     महामहीम/माननीय,

 सादर अवगत कराना है कि संवैधानिक विधि, न्याय, और कानून व्यवस्था सुनिश्चित कर, आम आदमी को सस्ता और  सर्वसुलभ न्याय आम जनता को सुनिश्चित करने के लिए

अधिवक्ता कोर्ट ऑफिसर के रूप में आम जनता और देश के आम नागरिकों के लिए संवैधानिक न्याय और विधी व्यवस्था सुनिश्चित कर सस्ता और सर्व सुलभ न्याय दिलाने का आधार स्तंभ है। सम्मानित अधिवक्ता अनथक प्रयास कर आम आदमी को सस्ता और सर्वप्रथम न्याय, विधि व्यवस्था, संवैधानिक न्याय और कानून व्यवस्था स्थापित कराने में सहयोग कर सरकार/न्याय विभाग को रोजाना करोड़ों/अरबों रुपए स्टांप शुल्क, रजिस्ट्रेशन शुल्क और न्याय शुल्क दिलाने में वैधानिक रूप से बिना किसी सरकारी सुविधा/ मानदेय /वेतन के महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

श्रीमान जी संवैधानिक शक्ति पृथक्करण सिद्धांत के विरुद्ध पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था में दी गई कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां का पुलिस द्वारा निरंकुश मनमाने तरीके  दुरुपयोग किया जा रहा है। पुलिस द्वारा खुलेआम निरंकुश तरीके से न्यायिक व्यवस्था को भंग कर मा न्यायालय और न्यायिक अधिकारियों की शक्तियों का अपहरण किया जा रहा है।

 एंटी फ्रॉड सेल के नाम पर /जांच करवाई के नाम पर भूमाफियाओं से साठ गांठ कर बिना किसी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किए/बिना किसी वाद करवाही के/मौके पर जांच करने के बजाय मनमानी कर सदोश लाभ के लिए सुनिश्चित संविधानिक और न्याय व्यवस्था के विरुद्ध भ्रष्टाचार की निरंकुश व्यवस्था को जन्म दिया जा रहा है। प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद आरोपी अभियुक्त गणों से साठ गांठ कर संगीन अपराध की धाराओं को विलोपित कर,मजिस्ट्रियल ट्रायल बनाकर थाना से ही प्रोविजनली बेल देकर आरोपियों का केवल 107 ,116,151crpc में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष चालान कर जेल भेज दिया जाता है। यह सवाल है जब अपराध संगीन है गंभीर है शांति व्यवस्था विधि व्यवस्था भंग होने का खतरा है प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज है तो चालान माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष होना चाहिए। कमिश्नरेट व्यवस्था में कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा अपराध माफियाओं से सांठगांठ कर की जा रही इस सिविल कोर्ट की ओर न्यायिक मजिस्ट्रेट / न्यायिक अधिकारियों की शक्ति के अपहरण से शक्ति पृथक्करण सिद्धांत /संवैधानिक व्यवस्था का खुलेआम भंग किया जा रहा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियों का अपहरण किया जा रहा है सुशासन की व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है भ्रष्टाचार के दानवी अराजक निरंकुश पुलिस के डंडा तंत्र को जन्म दिया जा रहा है जिसमें देशवासियों को संवैधानिक और विधिक रूप से अपने संवैधानिक और विधि के अधिकारों को जानने के लिए सम्मानित अधिवक्ताओं/कोर्ट आफिसर को दूर करने की सुनियोजित साजिश के तहत  संविधानिक  अधिकारो की सुनिश्चित व्यवस्था का खुला उल्लंघन है देशवासियों पर आरोपित अपराध या कानूनी जानकारी जानने के लिए अपने पसंद के अधिवक्ता को नियुक्त कर कानूनी जानकारी लेने की विधिक अधिकार को खत्म करने के लिए पुलिस द्वारा खुलेआम सरेआम कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की व्यवस्था ,शक्तियों का दुरुपयोग कर लाठीचार्ज किया जा रहा है। दुर्व्यवहार किया जा रहा है। कोर्ट आफिसर के रुप में सम्मानित अधिवक्ताओं को न्यायिक व्यवस्था से दूर किया जा रहा है। संविधानिक सुनिश्चित व्यवस्था के हित में पुलिस को दी गई कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां अविलंब निरस्त की जाए, समाप्त की जाए और संवैधानिक विधि व्यवस्था शक्ति पृथक्करण सिद्धांत की व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित संवैधानिक अधिकारी पदाधिकारी को आदेशित किया जाए।

निवेदक 

 हम भारत के लोग।

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