एनडीए गठबंधन व इंडिया गठबंधन का विकल्प बनेगा राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा (तीसरा मोर्चा) वामन मेश्राम

 रिपोर्ट-रुबी न्यूटन/राजकुमार

देश में बना तीसरा मोर्चा राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा।


नई दिल्ली, राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के संयोजक वामन मेश्राम की अध्यक्षता में देशभर से आए 70 से अधिक राजनीतिक दलों की संयुक्त तीसरे मोर्चे की बैठक गढ़वाल भवन के हाल में संपन्न हुई।

राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक वामन मेश्राम द्वारा  तीसरे मोर्चे की दिल्ली में बुलाई गई दूसरी बैठक में एससी-एसटी, पिछड़ा वर्ग, और अल्पसंख्यक वर्ग के हितों पर चर्चा करते हुए वामन मेश्राम ने कहा कि एनडीए गठबंधन और इंडिया गठबंधन दोनों ही गठबंधन मनुवाद की विचारधारा से ग्रस्त है।

जो दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों, और अल्पसंख्यकों के वोट तो लेना चाहते हैं, परंतु सत्ता में भागीदारी से वंचित रखने की तैयारी है। उन्होंने कहा भाजपा खुले तौर पर मनुस्मृति की विचारधारा वाली पार्टी है। और बाबा साहेब के संविधान को

बदलकर मनुस्मृति लागू करना चाहती है। वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन की विचारधारा भी भाजपा की विचारधारा से मिलती-जुलती ही है। उन्होंने कहा दोनों गठबंधन दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों की पार्टियों को गठबंधन से दूर रखकर दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का वोट तो हासिल करना चाहते हैं। परंतु सत्ता से वंचित वर्ग को

सत्ता से दूर रखने की साजिश बराबर रचते रहे हैं। वामन मेश्राम ने कहा राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा आगामी 2024 लोकसभा चुनाव में परिवर्तन लाने के लिए दलितों, पिछड़ों, और अल्पसंख्यकों के राजनीतिक दलों को संगठित कर राजनीतिक शोषण के शिकार सत्ता से वंचित दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों, और अल्पसंख्यकों को सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संकल्प वध है। उन्होंने कहा जब तक राजनीतिक शोषण के

शिकार सत्ता से वंचित देश के 85% लोगों को सत्ता में भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक उनके समाज तरक्की की दौड़ में पिछड़ते रहेंगे। वामन मेश्राम ने कहा दोनों गठबंधनों से अलग 12 राजनीतिक दल ऐसे हैं, जिनमें कई प्रदेशों में मुख्यमंत्री भी हैं और 55 लोकसभा के सांसद उन 12 दलों से चुनाव जीत कर आए हैं। हम सभी मिलकर संयुक्त रूप से प्रयास कर रहे हैं, की दोनों गठबंधनों से दूर रहने वाले यह 12 राजनीतिक दल अगर तीसरे मोर्चे में सहयोग करने को तैयार होते हैं। तो देश की जनता को दोनों गठबंधनों के सामने एक नया विकल्प मिलेगा अगर तीसरा मोर्चा सत्ता में आता है, या फिर उसके सहयोग से केंद्र की सरकार बनती है, तो देश के 85% दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों, और अल्पसंख्यकों को सत्ता में भागीदारी मिलना सुनिश्चित है मिलना सुनिश्चित है। उन्होंने कहा अपने वोट से सरकार बनाने वाले 85% देश के लोगों ने आजादी के बाद से सरकारें तो लगातार बनाई और बिगाड़ी परंतु सत्ता की मलाई 15% लोगों ने लगातार खाई है, यही कारण है की सत्ता से लेकर प्रशासन तक 15% लोगों का वर्चस्व बना हुआ है।

आज की महत्वपूर्ण बैठक में वामन मेश्राम के संयोजक राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा नई दिल्ली, राजकुमार सैनी पूर्व सांसद हरियाणा, लक्ष्मण माने पूर्व एमएलसी महाराष्ट्र, प्रवेंद्र प्रताप राष्ट्रीय अध्यक्ष बहुजन मुक्ति पार्टी दिल्ली, डॉक्टर अनिल माने राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर परिवर्तन मोर्चा नई, मुस्तकीम मंसूरी राष्ट्रीय महासचिव ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस उत्तर प्रदेश, आदि के अलावा राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के तत्वाधान में आयोजित दूसरी बैठक में लगभग छोटे-बड़े राज्यों से 77 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए।

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