लोकतंत्र में छोटे व मझोले अखबारों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता - सत्येंद्र प्रकाश

लोकतंत्र में छोटे व मझोले अखबारों की भूमिका को नजरंदाज नहीं किया जा सकता: सत्येन्द्र प्रकाश (डीजी डीएवीपी)


खबरों का संकलन व प्रकाशन बड़ी जिम्मेदारी से करें: प्रधान महानिदेशक-पीआईबी 


नई दिल्ली। वर्तमान के बदलते परिवेश में प्रिंट मीडिया की महत्ता को कम नहीं समझा जा सकता। छोटे व मझोले अखबार लोकतंत्र में आम जनमानस की आवाज हैं। इसलिए इन अखबारों की भूमिका को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। ज्ञात रहे यही वो वर्ग है जो सरकार की योजनाओं को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने और आखिरी व्यक्ति की आवाज को सरकार तक पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका अदा करता है। उक्त विचार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्यूनिकेशन (डीएवीपी) के महानिदेशक सत्येन्द्र प्रकाश ने ऑल इन्डिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फ़ेडरेशन के दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित फेडरेशन के दो दिवसीय 48 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में व्यक्त किए। इस समारोह में देश भर से 20 राज्यों से ज्यादा राज्यों से सैकड़ों लघु और मझोले समाचार पत्रों के प्रकाशक सम्मलित हुए। डीएवीपी महानिदेशक ने इस अवसर पर प्रकाशकों को आश्वस्त किया कि छोटे व मझोले अखबारों की समस्याओं का समाधान कराने की दिशा में सरकार पूरी तरह संवेदनशील है क्योंकि सरकार की मूल भावनाओं को यही वर्ग हकीकत में पूरा करता है।


भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के प्रधान महानिदेशक श्री के. एस. धतवालिय ने दीप प्रज्जवलित कर समारोह का शुभारम्भ किया और इसके बाद समारोह में दिए अपने सम्बोधन में प्रकाशकों को देश हित सर्वाेपरि रखने का सन्देश देने के साथ साथ कहा कि खबरों का संकलन इस प्रकार करें कि किसी की भावनाएं आहत ना हो। उन्होने कहा कि समाचार पत्र प्रकाशन का कार्य बडी जिम्मेदारी का कार्य है। यह कार्य जितनी जिम्मेदारी के साथ किया जायेगा, जनता में उतनी ही विश्वसनीयता बनेगी।


फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार गुरिंदर सिंह ने प्रकाशकों का पक्ष रखते हुए अधिवेशन में कहा कि  आज लघु और मझोले समाचार पत्रों के प्रकाशक गंभीर चुनौतियों का समाना कर रहे हैं। इन्हे इलैक्ट्रोनिक व सोशियल मीडिया से प्रतिस्पर्धा करने के साथ-साथ सरकार द्वारा अखबारी कागज पर जीएसटी लगाये जाने से भी कठिनाइ हुई है। समाचार पत्रों के प्रकाशन कार्य को किसी उद्योग का दर्जा प्राप्त नहीं है जिसके कारण इन्हे कोई सीधे तौर पर सरकार द्वारा वित्तीय लाभ या सहायता नहीं मिलती है। अतः सरकार को इन प्रकाशकों के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपना चाहिए। उन्होने सरकार से आग्रह किया कि सरकार की बनने वाली नीतियों में हमेशा यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि इन नीतियों से लघु और मझोले समाचार पत्र प्रभावित न हों क्योंकि आमजन मानस की यही आवाज हैं।


अधिवेशन में सवसम्मति से सरदार गुरिंदर सिंह को फेडरेशन का पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा दिल्ली का प्रभारी एवं संयोजक श्री पवन सहयोगी को नियुक्त जाने के साथ सर्व श्री एल. सी. भारतीय, अक्षय दूबे, अनवर अली खान, हफिजुल्लाह खान, दिनेश त्रिखा, महेश अग्रवाल, सुधीर पांडा, ललित सुमन, मलय बनर्जी, जे. पी. शर्मा व श्याम सुन्दर बंसल सहित 13 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष के नामों की घोषणा की गई।


फेडरेशन के दो दिवसीय अधिवेशन में जहां प्रकाशकों की समस्याओं को लेकर रणनीति बनाई गई वहीं इस अवसर पर फेडरेशन द्वारा विभिन्न राज्यों के दर्जनभर प्रकाशकों को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया जिनमें सर्व श्री विजय सूद, अशोक नवरत्न, संजय कुमार शर्मा, अर्जुन जैन, बी. आर. राममूर्ति, बाबू रावा हाकासम, रफीक सिंह जोशी आदि शामिल थे। सम्मेलन में प्रकाशकों द्वारा लघु और मझोले समाचार पत्रों को विज्ञापन नीति में निर्धारित विज्ञापन देने और अखबारी कागज को जीएसटी मुक्त करने की जोरदार मांग उठाई गई।


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