बहन भाई की कलाई में राखी बांधकर भाई बहन के रिश्ते को पवित्र बंधन में बांधती है बहनें।
भाई बहन के प्यार का प्रतीक है रक्षाबंधन,मोमना बेगम
मोमना बेगम |
रक्षाबंधन की शुरुआत को लेकर कहा जाता है कि इसकी शुरुआत हिंदू रानी कर्णावती के मुस्लिम शासक भाई हुमायूं को राखी बांधने से हुई है। एक समय था, जब देश में राजपूत शासक आक्रमण के खिलाफ जंग लड़ रहे थे। मेवाड़ के राजा राणा सांगा की मौत के बाद मेवाड़ की कमान राणा कर्णावती के हाथों में आई। (ऐसे रखा राखी का मान) गुजरात के बहादुर शाह ने उस दौरान मेवाड़ पर दूसरी बार आक्रमण किया था। ऐसे में रानी कर्णावती ने हुमायूं से मदद मांगने के लिए उसे राखी भेजी। हालांकि हुमायूं की सेना समय पर मेवाड़ नहीं पहुंच पाई और चित्तौड़ में राजपूत सेवा की हर हो गई। रानी ने अपने सम्मान की रक्षा के लिए जौहर कर लिया, लेकिन हुमायूं की सेना ने चित्तौड़ से शाह को खदेड़ भगाया। हुमायूं ने रानी के पुत्र विक्रम जीत को गद्दी सौंप कर राखी का मान रखा। रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी के अलावा भी रक्षाबंधन के इतिहास को लेकर कई और कहानियां प्रचलित है। भारत में साल भर में कई पर्व बनाए जाते हैं रक्षाबंधन उन्हें पर्वों में से एक मुख्य पर्व है यह त्यौहार भाई और बहन के बीच एक खास बंधन का जश्न मनाने का अवसर प्रदान करता है। इस मौके पर ढेर सारी मिठाइयां बनाई जाती है, और बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती है, और उसके बदले में भाई अपनी बहन की जीवन भर रक्षा करने का वचन देता है। इसके अलावा भाइयों द्वारा बहनों को कुछ उपहार भी दिए जाते हैं। रक्षाबंधन आमतौर पर अगस्त महीने में मनाया जाता है जब पूर्णिमा का दिन आता है।
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