पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जत नगर मंडल पर भगवान बिरसा मुंडा जन्मोत्सव जनजातीय गौरव दिवस के रूप में पूरे उत्साह के साथ मनाया गया|

 बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए बरेली से मुस्तकीम मंसूरी की रिपोर्ट

बरेली 15 नवम्बर 2022ः पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल पर भगवान बिरसा मुंडा जन्मोत्सव ’’जनजातीय गौरव दिवस‘’ के रूप पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के सभाकक्ष में मंडल रेल प्रबंधक सुश्री रेखा यादव, अपर मंडल रेल प्रबंधक (इन्फ्रास्ट्रक्चर) श्री विवेक गुप्ता सहित मंडल के शाखा अधिकारियों ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। 


इस अवसर पर कार्मिक विभाग के तत्वावधान में प्रश्नोत्तरी, ’भारत में जनजातीय गौरव का महत्व’ विषय पर निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसमें मंडल के रेल कर्मचारियों ने बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया। उक्त कार्यक्रमों का संयोजन वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी श्री सनत जैन ने किया।

विदित हो कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर, 1875 को छोटे किसान के गरीब परिवार में झारखण्ड के खुटी जिले के उलीहातु गांव में हुआ था। साल्गा गांव में प्रारम्भिक पढ़ाई करने के बाद उनका मन हमेशा अपने समाज के उत्थान में लगा रहता था।


वह सदैव ब्रिटिश शासकों द्वारा उनके समाज की गयी बुरी दशा पर सोचते रहते थे। मंुडा लोगों को अंग्रेजों से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने अपना नेतृत्व प्रदान किया। 01 अक्टूबर, 1894 को नौजवान नेता के रूप में सभी मुंडाओं को एकत्र कर उन्होंने अंग्रेजांे से लगान माफी के लिए आन्दोलन किया। 1895 में उन्हें गिरफ्तार कर हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। लेकिन बिरसा और उसके शिष्यों ने क्षेत्र की अकाल पीडित जनता की सहायता करने की ठान रखी थी और जिससे उन्होंने अपने जीवनकाल में ही एक महापरुष का दर्जा प्राप्त किया।

उन्हें इस इलाके के लोग धरती बाबा के नाम से पुकारा करते थे। उनके प्रभाव बढ़ते प्रभाव से पूरे इलाके के मुंडाओ में संगठित होने की चेतना जागी। 03 फरवरी, 1900 को अंग्रेजों द्वारा जहर देकर उन्हें मार दिया गया। उन्होंने अन्तिम सांस 09 जून, 1900 रांची कारागार में ली। 

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