पूर्व कैबिनेट मंत्री मरहूम हाजी रियाज अहमद की पहली बरसी पर परिवार सहित समर्थक हुए भावुक,

 बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए पीलीभीत से शाहिद खान की रिपोर्ट, 

पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद की पहली बरसी पर परिवार ने किया फातिहा का आयोजन, 

पीलीभीत, शहर से 5 बार विधायक रहे वरिष्ठ सपा नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद के इंतकाल हुए एक साल पूरा होने पर उनके परिवार द्वारा मरहूम हाजी रियाज अहमद की पहली बरसी पर मंगलवार को हाफिज रहमत खान लॉ कॉलेज पर फातिहा का आयोजन किया गया।

मरहूम हाजी रियाज अहमद की पहली बरसी की फातिहा के कार्यक्रम में हजारों की तादाद में  मरहूम हाजी रियाज अहमद के समर्थकों सहित शहर के गणमान्य लोगों ने पहली बरसी की फातिहा में शिरकत की, वरिष्ठ सपा नेता पूर्व मंत्री हाजी रियाज अहमद पीलीभीत से पांच बार विधायक रहे और उनकी गिनती रोहिलखंड के कद्दावर मुस्लिम नेताओं में होती थी, वह पीलीभीत से पांच बार विधायक रहने के साथ ही मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की अलग-अलग सरकारों में तीन बार मंत्री भी रहे, पिछले साल बरेली के एक अस्पताल में कोरोना के इलाज के दौरान उनका  इंतकाल हो गया था, और उनके इंतकाल के कुछ दिन बाद उनकी बेटी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  रुकैय्या का भी कोरोना की बीमारी से इंतकाल हो गया था, पूर्व कैबिनेट मंत्री सपा के कद्दावर मुस्लिम नेता की मौत के बाद उनका कुनबा भी बिखर गया था, हाजी रियाज अहमद मरहूम के इंतकाल के बाद उनकी सियासी विरासत पर भी  खतरे के बादल मंडराने लगे थे, ऐसे में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी मरहूम हाजी रियाज अहमद के परिवार की कोई सुध नहीं ली, मरहूम हाजी रियाज अहमद की विरासत को संभालने के लिए उनके बेटे डॉक्टर शाने अली और उनके दामाद आरिफ दोनों ने 2022 चुनाव में सपा से टिकट की दावेदारी पेश कर दी, मरहूम हाजी रियाज अहमद की विरासत को संभालने के लिए जब दो दावेदार ताल ठोकने लगे, इसका फायदा उठाते हुए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने मरहूम हाजी रियाज अहमद की विरासत के असली वारिस उनके बेटे डॉक्टर शाने अली को टिकट न देकर बरसों से पीलीभीत शहर सीट पर मुस्लिम विधायक के दावे को खत्म करने के मकसद से डॉक्टर शैलेंद्र सिंह को सपा का टिकट देकर पूर्व मंत्री हाजी रियाज अहमद के परिवार के साथ विश्वासघात करते हुए मरहूम हाजी रियाज अहमद की विरासत पर विराम लगा दिया, इससे नाराज होकर मरहूम हाजी रियाज अहमद के बेटे डॉक्टर शाने अली ने बसपा में शामिल होकर शहर विधानसभा से चुनाव लड़ कर हाजी रियाज अहमद मरहूम की विरासत को तो संभाल लिया, डॉक्टर शाने अली के चुनाव लड़ने से सपा प्रत्याशी डाक्टर शैलेंद्र चुनाव हार गए, अगर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव डॉक्टर शाने अली को सपा से टिकट देकर चुनाव में उतारते तो यकीनन शहर विधानसभा की सीट समाजवादी पार्टी की झोली में आती है|

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