सपा बसपा और कांग्रेस के राजनीतिक शोषण का शिकार पसमांदा मुसलमानों पर अब संघ और भाजपा की नजर, आखिर क्यों?

बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए मुस्तकीम मंसूरी की ख़ास रिपोर्ट,

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व  भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की सहमति से बनी पसमांदा मुसलमानों को साथ लेकर चलने की रणनीति, 

भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज से सुन्नी समुदाय के दानिश आजाद अंसारी को मंत्री बना कर राजनीतिक पंडितों को भी किया हैरान, 

लखनऊ, पसमांदा मुस्लिम समाज से ताल्लुक रखने वाले 85% पिछड़े वर्ग के मुसलमानों के राजनीतिक शोषण और योजनाबद्ध तरीके से सत्ता से वंचित मुस्लिम पिछड़े वर्ग को राजनीतिक मान सम्मान और सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज से ताल्लुक रखने वाले दानिश आजाद अंसारी को योगी सरकार में मंत्री बना कर मुस्लिम पिछड़े वर्ग को भाजपा से जोड़ने की जो पहल की है उससे सपा बसपा और कांग्रेस में बेचैनी बढ़ना अवश्य है| भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज से आने वाले दानिश आजाद अंसारी को मंत्री बनाकर विशेषकर सुन्नी समुदाय का जो कार्ड खेला है, उससे राजनीतिक पंडित हैरान है|

यह कांग्रेस सपा और बसपा में उपेक्षित रहे 85% मुस्लिम आबादी वाले पसमांदा समाज को साधने की बड़ी पहल है| अब भारतीय जनता पार्टी की नजर 85% आबादी वाले पसमांदा मुस्लिम समाज पर है| संघ भाजपा ने की शुरुआत पसमांदा मुस्लिम समाज से आने वाले जमाल सिद्दीकी को भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर एक रणनीति के तहत जो पहल की थी, वह लगातार कामयाब होती नजर आ रही है, आपको बताते चलें पसमांदा मुस्लिम समाज में 16% अंसारी समाज के बाद 15% मंसूरी समाज की  बड़ी आबादी है| कांग्रेस सपा बसपा की सरकारों में अंसारी समाज की सत्ता में भागीदारी लगातार बनी रही परंतु सत्ता से वंचित मंसूरी समाज, शाह अल्वी समाज, सलमानी समाज, सिद्दीकी समाज, राइन समाज, सहित  एक दर्जन से अधिक पसमांदा मुस्लिम समाज के लोगों का सपा बसपा और कांग्रेस द्वारा योजनाबद्ध तरीके से राजनीतिक शोषण करके सत्ता से वंचित होने का फायदा भविष्य में भाजपा को मिले तो कोई ताज्जुब नहीं होना चाहिए, जानकारों की माने तो  पसमांदा मुस्लिम समाज को साथ लेकर चलने की रणनीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की पूरी सहमति के बाद ही भाजपा ने एक ब्लू प्रिंट तैयार कर पसमांदा मुस्लिम समाज के राजनीतिक शोषण के शिकार एवं सत्ता से वंचित पसमंदा मुसलमानों को साधने की कार्य योजना बनाई है| जिसके अनुसार आजादी के बाद से कांग्रेस सपा और बसपा ने पसमांदा मुसलमानों की अनदेखी की है, भाजपा ने उन पसमांदा मुसलमानों के उत्थान का बीड़ा उठाया है| क्योंकि  भाजपा के एजेंडे पर  पसमांदा मुसलमान 2014 लोकसभा चुनाव से पहले से हैं| आपको बताते चलें 2013 में भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद का  उम्मीदवार घोषित होने के  पहले नरेंद्र मोदी ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में पसमांदा मुसलमानों को साथ लेकर चलने का मुद्दा उठाया था| अब सात साल केंद्र में और पाचं साल उत्तर प्रदेश में सरकार चलाने के बाद अब भाजपा को लगता है, पसमांदा मुसलमानों को जोड़कर मुस्लिम समाज के बड़े हिस्से को  पार्टी के साथ जोड़ा जा सकता है| उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पसमांदा मुस्लिम समाज को जोड़ने की रणनीति बनाई गई थी, जिसके तहत दानिश आजाद अंसारी को मंत्री बनाया गया है| आपको बताते चलें कांग्रेस पर शुरू से ही पसमांदा मुसलमानों की अनदेखी का आरोप लगता रहा है| कांग्रेस में केंद्रीय स्तर के साथ ही सूबे की राजनीति में मोहसिना किदवई, आरिफ मोहम्मद खान, से लेकर सलमान खुर्शीद तक सबका ताल्लुक अगड़े वर्गों से रहा है, 1974 से 1985 तक उन्नाव से सांसद और इंदिरा गांधी राजीव गांधी की सरकार में मंत्री रहे ज़ियाउर रहमान अंसारी के अलावा कांग्रेस में मुस्लिम समाज के पिछड़े वर्गों से किसी और को मौका नहीं मिला, यूपी की राजनीति में सत्ता में रही समाजवादी पार्टी और बीएसपी में भी पसमांदा  मुसलमानों को तवज्जो नहीं मिली, समाजवादी पार्टी में मुस्लिम समाज का प्रतिनिधित्व आजम खान करते रहे तो बीएसपी में यही भूमिका नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने निभाई दोनों ही बड़े नेता अपनी-अपनी पार्टियों की सरकारों में कद्दावर मंत्री रहे, गौरतलब है पसमांदा मुस्लिम समाज सपा बसपा और कांग्रेस के शोषण से त्रस्त होकर भाजपा की ओर जा रहा है| अगर समय रहते सपा बसपा और कांग्रेस ने पसमांदा मुस्लिम समाज को संगठन से लेकर सत्ता तक आबादी के अनुपात से भागीदारी सुनिश्चित नहीं की तो इसका खामियाजा 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान उठाना पड़ेगा?

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