ख़ानक़ाहे शराफ़तिया के सज्जादा नशीन पीरो-मुर्शिद हज़रत शाह मुहम्मद सक़लैन मियां हुज़ूर की हयाते जिंदगी पर एक नज़र दुनिया से पर्दा करने के बाद।

 रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी

पीरो-मुर्शीद हज़रत बशीर मियां हुज़ूर ने फरमाया, हम सक़लैन को क़ल्बे विलादत ही

जानशीनी व ख़िलाफ़त दे चुके हैं, हज़रत मख़दूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी मौजूद थे। 

पीरो-मुर्शीद हजरत शाह मोहम्मद सकलैन मियां हुजूर क़ादरी मुजद्दिदी साहिबे सज्जादा ख़ानक़ाहे शराफ़तिया बरेली शरीफ,


ज़ब्दतुल आरिफ़ीन पीरो मुर्शिद हजरत मौलाना शाह शराफ़त अली मियां मार्च 1947 ईस्वी में ख़ानक़ाहे बाशीरिया मुहल्ला गुलाब नगर, बरेली शरीफ में रहते थे, कि एक दिन कुतवतुल-कामिलीन हज़रत मौलाना शाह बशीर मियां ने आपको बुलाया और अपने सर पर बंधी दस्तार खोलकर आपको देते हुए फ़रमाया मौलवी साहब! आपके घर पोता (मोहम्मद सक़लैन मियां हुजूर) पैदा होने वाला है, अपने घर जाइये और अपने पोते को सबसे पहले इस दस्तार का कुर्ता सिलवा कर पहनाइये। आप बरेली से ककराला तशरीफ़ लाए और दूसरे दिन 19 रबीउस्सानी 1366 हिजरी/13 मार्च 1947 ई. बरोज़ जुमेरात शेख़े तरीकत पीरो मुर्शिद हज़रत शाह मुहम्मद सक़लैन मियां हुज़ूर की विलादत बा  सआदत हुई और आपने सबसे पहले हज़रत मौलाना शाह मुहम्मद बशीर मियां हुजूर की दस्तार मुबारक का कुर्ता ज़ेबे तन फरमाया। इस वाक़िये में आपकी जानशिनी और खिलाफत की तरफ इशारा है।

आपकी पैदाइश से क़ब्ल मुतअद्दिद वाक़ेआत ऐसे हुए जिनसे आपकी बुजुर्गी, शान ए विलायत और ख़िलाफ़तो-जानशीनी की ताईदो-तस्दीक़ होती है। (वह सारे वाक़ेआत आइंदा और तफसीली सवानेह हयात में मुलाहिजा फरमाएं )।आपकी वालिदा माजिद हज्जिन सिद्दीक़ा ख़ातून ने इस्लामी रुहानी माहौल में आपकी तरबियत और परवरिश फ़रमाई।

इब्तिदाई तालीम वालिदैन करीमैन से हासिल की।

आपके दादा हज़रत शाह शराफ़त अली मियां 4 साल की उम्र में आपको ककराला से बरेली शरीफ़ ख़ानक़ाहे शराफ़तिया ले आए और अपनी निगरानी में आपकी तालीम शुरू कराई।इल्मे ज़ाहिरी तसव्वुफ़ो-सुलुक और रूहानियत की तालीम अपने


जद्दे-अमजद और मुर्शिदे गिरामी हज़रत शाह शराफ़त अली मियां से हासिल किये। जब आपकी उम्र 12 साल हुई तो वालिदे माजिद हज़रत सूफी शाह शुजाअत अली मियां का विसाल हो गया।

इल्मे ज़ाहिरी, इल्मे वातिनी, तसव्वुफ़ो-सुलुक और शरीअतो-तरीक़त की तक्मीओ-तहसील के बाद 17 साल की उम्र में 1964 ईस्वी में बाद नमाज़े जुमा मुरीदीन व आवाम की मौजूदगी में खिलाफ़ते- इजाज़त से मुशर्रफ फ़रमाया और इरशाद फरमाया हम नहीं चाहते थे, कि तुम्हें अपना ख़लीफ़ा व जानीशी बनायें क्योंकि दुनिया कहेगी अपने पोते को ख़िलाफ़तो-जानशीनी दे दी, मगर हम क्या करें, रात ख्वाब में पीरों मुर्शिद हज़रत बशीर मियां हुज़ूर ने फरमाया, हम सकलैन को क़ब्ले विलादत ही जानशिनी व ख़िलाफत दे चुके हैं, तो आप पसो-पेश क्यों कर रहे हैं, और साथ में हज़रत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी भी थे, उन्होंने इरशाद फ़रमाया हमारा भी यही हुक्म है कि तुम्हारे जानशीनो ख़लीफ़ा तुम्हारे पोते सकलैन ही हों।
1969 ईस्वी में पीरो मुर्शीद के विसाल के बाद आप मसनदे सज्जदगी पर रौनक अफ़रोज़ हुए। आपके ज़रिये हिन्द,बैरुने हिन्द सिलसिला क़ादरिया मुजद्दिदिया का फ़रोग़ बहुत हो रहा है। आपके ज़ेरे निगरानी ख़ानक़ाहे के मामूलत, औरादो-वज़ाइफ़, लंगर ख़ाना, ख़िदमत ए ख़ल्क़, ग़रीबों ग़ुरबा की

हमदर्दी, मोहताजों की दिलजोई, ख़ालिस ख़ानकाही निज़ाम और उसूले तरीक़त की रोशनी में अंजाम दिए जाते हैं। इस दौर में आपकी ज़ात मज़हरे फ़ैज़ाने ग़ौसुल आज़म, जानशीने मुजद्दिद,अलफ़ेसानी है। आप मशाइख़े सिलसिला के सच्चे वारिस व नायब हैं।

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