कमलेश यादव ने सभी प्रदेशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी

 कृष्णा जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। लेकिन, जन्मोत्सव मनाने की तैयारी कहीं 6, तो कहीं 7 सितंबर के लिए हो रही। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सभी लोग इस बात पर एकमत हैं कि ठाकुरजी का जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था, तो जन्माष्टमी अलग-अलग दिन क्यों मनाते हैं? स्मार्त यानी गृहस्थ इस बार 6 सितंबर, जबकि वैष्णव यानी संत 7 सितंबर को जन्माष्टमी मना रहे। आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण क्या है? राष्ट्रीय मजदूर एकता पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कमलेश यादव ने सभी प्रदेशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं उन्होंने कहा कि सभी कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाएं।


गृहस्थ और संत अलग-अलग जन्माष्टमी क्यों मनाते हैं, इसे समझने के लिए हमें पहले कृष्ण जन्म की कहानी जाननी होगी। द्वापर युग में मथुरा में भोजवंशी राजा उग्रसेन का शासन था। लेकिन, उनका पुत्र कंस उन्हें बलपूर्वक गद्दी से उतारकर ख़ुद राजा बन गया। कंस की एक बहन थीं देवकी, जिनका विवाह वसुदेव से हुआ था। विवाह के बाद कंस अपनी बहन देवकी को उनकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई, 'हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा।' यह सुनकर कंस ने रथ रोक दिया और वसुदेव-देवकी को मारना चाहा। तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा, 'मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी। हमको मार के क्या लाभ मिलेगा?' कंस ने देवकी की बात मान ली और वसुदेव-देवकी को कारागार में डाल दिया।

क्यों दो दिन मनाया जाता है कृष्ण जन्माष्टमी पर्व


प्रत्येक वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि को लेकर कई लोगों में असमंजस की स्थिति होती है। यह सवाल भी उठता है कि कृष्ण जन्माष्टमी पर्व 2 दिन क्यों मनाया जाता है? बता दें की स्मार्त संप्रदाय के अनुयायी जन्माष्टमी पर्व के दिन रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय भगवान श्री कृष्ण की उपासना करते हैं। वहीं वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी जन्माष्टमी पूजा अगले दिन करते हैं। इसलिए दो दिन जन्माष्टमी पर्व मनाया जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में यह पर्व देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कृष्ण जन्मोत्सव के दिन लोग व्रत रखते हैं और रात में 12 बजे कान्हा के जन्म के बाद उनकी पूजा करके व्रत का पारण करते हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान श्री कृष्ण सभी मुरादें शीघ्र पूर्ण कर देते हैं। वहीं महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना के साथ यह व्रत करती हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के पकवान अर्पित किए जाते हैं। उन्हें झूला झुलाया जाता है। हर साल की तरह इस साल भी कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व दो दिन मनाया जा रहा है। कुछ लोग 6 सितंबर तो वहीं कुछ लोग 7 सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व मना रहे हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं इस साल कृष्ण जन्माष्टमी कब है-कृष्ण जन्माष्टमी 2023 कब है? 

पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 6 सितंबर 2023 को दोपहर 03 बजकर 37 मिनट से हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 7 सितंबर 2023 शाम 04 बजकर 14 मिनट पर होगा। कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा मध्य रात्रि की जाती है, इसलिए इस साल भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव 6 सितंबर 2023, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्री कृष्ण का 5250 वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

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