पसमांदा मुसलमानों को धोखा देने वाले व हक़ मारी करने वाले तथाकथित सियासी मौलानाओं की अकूत संपत्ति की ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग से जांच कराई जाए- अनीस मंसूरी

बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए लखनऊ से मुस्तकीम मंसूरी की रिपोर्ट, 

ऐसे मौलवी/ शहर काजी़ बड़ी-बड़ी एनजीओ, इंटरनेशनल लेवल पर चंदा और जमीन जायदाद का काम करके हजारों करोड़ कमाते हैं| और कौन के रहनुमा बन करके कौम की आंखों में धूल झोंकते हैं|

स्वयं भू मौलवी/ शहर काजी़ जो ईद बकरीद को मुस्लिम कौम के लोगों के सिर दिखवा करके सत्ताधारी पार्टियों के नेताओं के जूते सीधे करते हैं|

पसमांदा मौलवी हैं, जिनका रोज का नाश्ता और खाना मोहल्ले के अलग-अलग घरों से आता है, ऐसे मौलवियों को मुश्किल से  10 हज़ार रुपये महीना मिल पाता है|

लखनऊ,ऑल इंडिया मंसूरी समाज के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष, पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने कामन सिविल कोड पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और उससे जुड़े तमाम मुस्लिम संगठनों व मौलानाओं को आड़े हाथों लेते हुऐ कहा कि यह मौलाना देश के 85 प्रतिशत पसमांदा मुसलमानों को यू सी सी से भयभीत करने की साजिश रच रहे हैं।अनीस मंसूरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह ऐसे मौलानाओं को बेनकाब करेंगे। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उससे जुड़े


तमाम संगठन और मौलाना एक राजनीतिक पार्टी को लाभ पहुँचाने के लिए पसमांदा मुसलमानों में यूनिफार्म सिविल कोड का आतंक फैला रहे हैं।

अनीस मंसूरी ने कहा कि जब पुरी दुनिया के मुसलमान बकरीद के दिन का स्वीडन में हुई कुरआन शरीफ, अपमानित करने की घटना से ग़म और गुस्से में हैं इस वक़्त पूरी दुनिया की सरकारें स्वीडन सरकार की कड़े शब्दों में निंदा कर रही हैं ऐसे वक्त में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उससे जुड़े तमाम मुस्लिम संगठन और मौलानाओं ने न तो इस घटना की निंदा की और ना ही स्वीडन सरकार के खिलाफ कुछ बोला ।

अनीस मंसूरी ने कहा कि क़रीब डेढ़ वर्ष पूर्व भाजपा की एक बड़ी नेत्री ने पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी भरे शब्द बोले थे तब भी यह पर्सनल लॉ बोर्ड और उससे जुड़े संगठन कुछ नहीं बोले थे, लेकिन घटना के करीब एक महीने बाद एक तथाकथित मौलाना ने वीडिओ के ज़रिये अपनी संवेदना जाहिर की थी। इस मौलाना ने तब तक कुछ नहीं बोला जब तक अंतराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में नहीं आगया ।

अनीस मंसूरी ने कहा कि जो संगठन और मौलाना पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद साहब और कुरआन शरीफ की आड़ में राजनीति करे गा उसका हमारा संगठन हर स्तर पर विरोध करेगा, उन्होंने कहा कि देश का पसमांदा मुसलमान यह जानना चाहता कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उससे जुड़े तमाम संगठन और तमाम सियासी मौलाना यह बतायें कि वह किसके दबाव में कुरआन शरीफ के अपमान का सौदा कर यू.सी. सी. को तरजीह दे रहे हैं।

अनीस मंसूरी ने कहा कि हिंदुस्तान में मौलवी दो तरह के हैं एक वो पसमांदा मौलवी हैं जिनका रोज का नाश्ता और खाना मोहल्ले के अलग-अलग घरों से आता है। ऐसे मौलवियों को बमुश्किल तमाम ₹10 हजार महीना मिलता है। दूसरी तरफ ऐसे स्वयंभू मौलवी / शहरकाजी हैं जो ईद-बकरीद को मुसलमान कौम के लोगों के सिर गिनवा करके सत्ताधारी पार्टियों के नेताओं के जूते सीधे करते हैं। ऐसे मौलवी / शहरकाजी बड़ी-बड़ी एन.जी. ओ, नेशनल इंटरनेशनल लेवल पर चंदा और ज़मीन-जायदाद का काम कर हजारों करोड़ कमाते हैं। और कौम के रहनुमा बन करके कौम की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।

अनीस मंसूरी ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि पसमांदा मुसलमानो को धोका देने वाले व हक मारी करने वाले तथाकथित सियासी मौलानाओं की अकूत सम्पति की ईडी, सीबीआई और इन्कमटैक्स विभाग से जांच कराई जाये।










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