लोकतंत्र को बचाने के लिए एवं भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए चुनाव सुधार अत्यावश्यक है|

 भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनाव सुधार की आखिर क्यों है आवश्यकता? 

रिपोर्ट- मुस्तकीम मंसूरी

M A Mansoori 
आज देश की कोई भी राजनीतिक पार्टी RTI के दायरे में आना नहीं चाहती है, आखिर क्यों? इसलिए कि चुनाव जितने के लिए ये राजनीतिक पार्टियाँ हजारों करोड़ों रुपये चंदे के रुप में बड़े बड़े उद्योगपतियों से लेते हैं और चुनाव जितने के बाद इन्ही उद्योगपतियों के लिए ये काम करते है , ऐसे में आम आदमी की सुध लेने वाला कोई नहीं बचता |आजादी के 75 साल बितने के बाद भी जनता को आजतक मूलभुत सुविधायें भी नही मिल पा रही हैं |जनता एक दिन के लिए मालिक बनती है ,बाकि दिन ये धनकुबेर लोग राजा रहते हैं |सभी लोग जानते है कि सभी प्रकार के भ्रष्टाचार का जड़ राजनीति ही है , जहाँ अच्छे नेता साँसद अथवा विधायक बनने लगे सारी व्यवस्था सुधर जाएगी |अच्छे लोग तबतक नही आएँगें जबतक की राजनीति में काले धन का प्रयोग बंद ना हो |हमारे समाज के अच्छे लोग पैसों की कमी से चुनाव नही लड़ पाते हैं |जिसके पास कालाधन है वही लोग चुनाव लड़ते हैं | जनता मजबुर होकर साँपनाथ अथवा नागनाथ में से एक को चुनती है |इस व्यवस्था को दुर करने के लिए निम्नलिखित सुधार  अति आवश्यक हैं|

1. देश से भ्रष्टाचार एवं कालाधन दुर करने के लिए सभी नागरीकों को चुनाव लड़ने के लिए अवसर की समानता लाने के लिए प्रयास करना चाहीए |

2. चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहीए जिससे एक अमीर और गरीब दोनों को चुनाव लड़ने का समान अवसर मिलें |

3. दोनों को अपनी बातों को समाज के सामने रखने का समान अवसर मिलना चाहीए |

आज व्यवस्था ऐसी बन चुकी है कि कई क्षेत्रीय अथवा राष्ट्रीय पार्टियों को अपनी बात रखने का मौका नही मिल पा रहा है|)

4. चुनाव के समय सभी चैनलों पर एक खास समय के लिए सभी दलों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों को प्रचार का समय मिलना चाहीए |

क्युँकि ये सभी चैनल तमाम तरह की सुविधायें सरकार से लेती है ऐसे में इन चैनलों का सामाजिक दायित्व भी बनता है |

(आज चारों ओर टीवी चैनलों पर किसी खास पार्टी के लिए कैम्पेनिंग किया जा रहा है, एवं कुछ पार्टियों को बेवजह बदनाम किया जा रहा है )

5. अमेरिका की तरह अपने देश में भी सरकार के द्वारा निर्धारीत स्थानीय मंचों पर बहस करने अथवा अपना प्रचार करने की व्यवस्था कर दिया जाए तो आम नागरिकों को सभी उम्मीदवारों को समझने का भरपुर मौका मिलेगा |

सभी शहरों एवं सभी पंचायतों में एक निर्धारित स्थल / मंच आसानी से उपलब्ध कराये जा सकते हैं|


इन मंचों का प्रयोग चुनाव जितने के बाद जनप्रतिनिधियों के पंचायत , प्रखंड अथवा जिला स्तरीय आमसभाओं के लिए भी किया जा सकता है |जिससे जनता को अपने प्रतिनिधियों मिलने अथवा समझने का अवसर मिले | साथ ही आम आदमी जनप्रतिनिधियों से उनके किए गए कार्यों का हिसाब ले सके |6. चुनाव के समय सभी प्रत्याशियों के बारे में एक पुस्तिका सभी घरों में पहुँचवाया जाय | इस पुस्तिका में सभी प्रत्याशियों का घोषणापत्र भी हो |

7. चुनाव के लिए बनाये गए मंचों पर सभी प्रत्याशियों के द्वारा अलग भाषण एवं कभी कभी आपस में बहस भी करवाया जाय |8. ये मंच चुनाव जितने के बाद जनता से संवाद कायम करने में भी काम आएगा |

9.जनता इन मंचों से अपने नेताओं से सवाल जवाब पुछ सकेगी |

पाँच सालों में एक नया एवं सक्रीय विपक्ष तैयार हो जाएगा |

(आज के समय मे पक्ष विपक्ष सिर्फ चुनाव के समय ही दिखता है , इसके बाद सभी एक होकर आम आदमी का शोषण करते है) 

10 . इन मंचों को संसद के छोटे प्रतिरुप के रुप में समझा / बनाया जा सकता है |

11. इस तरह से प्रजातंत्र में जनता की भागीदारी को काफी बढाया जा सकता है !

12. इन मंचों को संसद के छोटे रुप में स्थापित कर , इसे संविधानिक शक्ति देकर राइट टु रिकाँल को भी लागु करवा सकते हैं |

13. इन मंचों का उपयोग योजना निर्माण में जनता की भागीदारी बढाने में भी किया जा सकता है |

14. इन मंचों का उपयोग छोटे छोटे विवादों को सुलझाने में भी किया जा सकता है |आप सभी के पास लोक प्रशासन के तमाम विशेषज्ञ होंगें , इनके सहयोग से एक ऐसा तंत्र विकसित किया जा सकता है जिसमें जनता की भागिदारी बढें |जिससे कि जनता नौकर नही मालिक की भुमिका में आ जाए और

नेता मालिक नही बल्कि सहयोगी की भुमिका में आ जाए |

आपलोगों से आग्रह है चुनाव सुधारों को अविलंब लागु करवाने के पार्टीगत पुर्वाग्रहों को छोड़कर एक जनांदोलन शुरु किया जाय , अन्यथा सरकारें पुँजीपतियों के हाथों की गुलाम बनकर रह जाएगी |और हम पुन: गुलाम हो जाएँगें |

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