मुस्लिम वोटों के दम पर कई बार सत्ता हासिल करने वाली सपा ने मुस्लिम पार्टियों से 31 सालों मे कोई गठबंधन नहीं किया, आखिर क्यों?

 बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए मुस्तकीम मंसूरी की खास रिपोर्ट, 

M.A. Mansoori 
लखनऊ, मुस्लिम वोटों के दम पर कई बार सत्ता हासिल करने वाली सपा ने अपने 31 सालों के राजनीतिक सफर में किसी भी मुस्लिम पार्टी से गठबंधन नहीं किया| परंतु जिन पार्टियों से भी सपा ने गठबंधन किया वह भी लंबे समय तक नहीं चल सका, आखिर क्यों? यह प्रश्न बड़ा विचारणीय है जिस पर मुसलमानों को गंभीरतापूर्वक विचार करना होगा| क्योंकि लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश में समाजवादी पार्टी गठबंधन में टूट की अटकलें तेज हो गई हैं|


अगर सूत्रों के दावे को सच माने तो आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी इस गठबंधन से अलग होकर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हो सकते हैं| जबकि सपा के 1992 में गठन के बाद से ही अलग-अलग पार्टियों के साथ (मुस्लिम पार्टियों को छोड़कर) सपा के गठबंधन होते रहे हैं| परंतु सपा के यह गठबंधन लंबे समय तक नहीं चले| पिछले तीन दशक पर नजर डाले तो सपा की राजनीति में किसी भी दल के साथ गठबंधन ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका है| आपको बताते चलें सपा ने सबसे पहले वर्ष 1993 में बसपा के साथ गठबंधन किया था| तब मुलायम सिंह और कांशीराम एक साथ आए थे| उस समय भी यह दोनों दल (सपा बसपा) बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए एक साथ आए थे| और दोनों ही दलों ने साथ मिलकर सरकार बनाई परंतु आपस की खटपट के कारण 2 जून 1995 को बसपा ने गठबंधन से किनारा कर लिया| इसके बाद वर्ष 2003 में बीजेपी और बसपा का गठबंधन टूटा, तब अगस्त 2003 में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने और बहुमत का दावा पेश किया, मुलायम सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, इसके बाद बहुमत पेश करने का समय आया तो संख्या बल कम पड़ी तब बीजेपी ने मुलायम सिंह को समर्थन दिया था| हालांकि यह गठबंधन भी लंबे समय तक नहीं चला था| वर्ष 2014 में जब मोदी लहर चली तो लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य में बड़ी जीत दर्ज की| इसके बाद विधानसभा चुनाव के वक्त अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा ने चुनाव लड़ा इस चुनाव में सपा ने कांग्रेस से गठबंधन किया| परंतु इस गठबंधन में सपा की अब तक की सबसे बड़ी हार हुई| सपा ने 2012 में 224 सीटें जीती थी| परंतु इस बार सपा को केवल 47 सीटें ही मिली थी| जबकि दूसरी और कांग्रेस ने 2012 में 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी| जबकि वर्ष 2017 में कांग्रेस पार्टी को केवल 7 सीटों पर ही जीत मिली| और यह गठबंधन भी टूट गया| जिसके बाद लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सपा और बसपा दूसरी बार एक साथ आए| दोनों ही दलों ने मिलकर फिर से बीजेपी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में मोर्चा बनाया| परंतु इस चुनाव में भी सपा बसपा गठबंधन को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था| तब बसपा को 10 और सपा को 5 सीटों पर जीत मिली थी| परंतु कुछ ही दिनों के बाद सपा बसपा का गठबंधन भी टूट गया| इसके बाद यूपी विधानसभा चुनाव में एक बार फिर सपा ने नया गठबंधन बनाया| जिसमें प्रसपा, सुभासपा, रालोद, और महान दल का सपा के साथ विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गठबंधन हुआ| परंतु इस गठबंधन का कुछ फायदा सपा को मिला लेकिन फिर भी चुनाव में पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा| सपा गठबंधन को केवल 125 सीटों पर जीत मिली जिसमें सपा केवल 111 सीटें जीत सकी बीजेपी गठबंधन ने 273 सीटों पर जीत दर्ज की| हालांकि चुनाव में हार के बाद गठबंधन में खटपट बड़ी और फिर कई दल सपा गठबंधन से अलग हो गए| परंतु एक बार फिर सपा लोकसभा चुनाव 2024 में मुस्लिम वोटरों का कांग्रेस की तरफ बढ़ते रूख को देखकर अपना वजूद बचाने के लिए कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं|

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