तुम्हें आंसूओं में नहाना पड़ेगा। महंगा बहुत मुस्कुराना पड़ेगा :

   फ़ैज़ ख़ुमार बाराबंकवी 

भारत जोड़ो कवि दरबार नई दिल्ली में शोरा हज़रात ने पेश किया अपना शानदार कलाम 

नई दिल्ली (अनवार अहमद नूर)

नई दिल्ली के बस्ती हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया में ग़ालिब अकैडमी के सभागार में भारत जोड़ो कवि दरबार को एमएसके इवेंट्स ऑस्ट्रेलिया ने आयोजित किया, जिसमें अनेक मशहूर शायरों ने अपना कलाम पढ़ा और वाहवाही और दाद हासिल की। मशहूर शोरा हज़रात में शायर फ़ैज़ ख़ुमार बाराबंकवी, मोहतरमा अना देहलवी, नदीम अनवर, हसन सोनभद्री, रुस्तम इलाहाबादी, अरमान रज़ा बलरामपुरी, जीशान भागलपुरी, अब्दुल्ला राज़, इफ़्तिख़ार सागर, अदीबा नाज़, कामिल आमान  शामिल रहे। इस शानदार कवि दरबार और मुशायरे का सफल संचालन मोहतरमा सरिता जैन ने किया।



अकादमी के सभागार में बहुत से अदब नवाज़ हस्तियों और पत्रकारों साहित्यकारों के बीच अपनी शानदार शायरी का प्रदर्शन किया। और देश को जोड़ने का अहम संदेश दिया।


शायर फ़ैज़ ख़ुमार बाराबंकवी ने मौजूदा हालात की अक्कासी करते हुए कहा कि -


तुम्हें आंसूओं में नहाना पड़ेगा।


महंगा बहुत मुस्कुराना पड़ेगा।।


उन्होंने मशहूर शायर मरहूम ख़ुमार बाराबंकवी की एक बार फिर याद ताज़ा कर दी।

शायर नदीम अनवर ने अपनी शायरी का सामईन को कायल करते हुए ख़ूब दाद हासिल की। उन्होंने कहा कि


यादों को तेरी दिल से निकलने नहीं दिया,


सूरज तेरे ख्याल का ढलने नहीं दिया।


फिर आज तुमने चेहरे पर जुल्फें बिखेर दीं,


 फिर आज तुमने चांद निकलने नहीं दिया।


उस सिरफिरे चिराग़ को मेरा सलाम है।


जिसने हवा के ज़ोर को चलने नहीं दिया।

बलरामपुर से तशरीफ़ लाए अरमान रज़ा बलरामपुरी ने मौजूदा हालात और पत्रकारिता पर अपने कलाम को पेश करते हुए पैगाम भी दिया। उन्होंने कहा कि -


पेट रिश्वत की कमाई से भी भर जाते हैं,


हां मगर इससे दुआओं के असर जाते हैं।।


ये क्या हो रहा है ये क्या हो रहा है,


बता मीडिया तू कहां सो रहा है।

मुशायरा देर शाम तक चला और सामईन ने लुत्फ उठाते हुए शोरा हज़रात को ख़ूब दाद दी।


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