मरहूम वालिद की दुआ। बेटी की कविता

 मरहूम वालिद की दुआ। बेटी की कविता


वो कहते थे,

तू सबसे हंसी है, तू सबसे अलग है।

मेरी बेटी तू दुनिया में आई है मेरे लिए।

वरना तेरी जगह फलक है।

तेरी जो उनगली है खिलती कमल की कलियां, महकेंगी तेरे दम से

मेरे दरवाजो की गलियां।

वो कहते थे ... मेरी बेटी.. .वरना.

तेरी इज्जत पे कभी आंच ना आए।

तेरा बिगडे मुकद्दर तो भी तू न डगमगाये

जरूरत पडे से आसमान को झुकना

वो कहते थे,तू खेले हमेंशा खुशियों की रंगरलिया ये है मेरे वालिद

की बातिया रूलाती है मुझको यादों में अखिन्या।

ये सच है आई थी तुम्हारे लिए।

पता था किसको, की हम दोनो की जगह तो अलग है।

वो कहते थे.... मेरी बेटी.....वरना....


इशरा नाज़

पिता - अब्दुल कय्यूम

बहेडी, फरीदपुर


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