एम आई एम, मुस्लिम लीग, नेशनल लीग, पीस पार्टी,उल्मा कौन्सिल, आई एस सी, ने 6 दिसम्बर को भुलाया,मुस्लिम मजलिस ने काला दिवस मनाया, नदीम सिद्दीकी

 बेताब समाचार एक्स्प्रेस के लिए लखनऊ से मुस्तकीम मंसूरी की रिपोर्ट

मस्जिद की जगह मंदिर की इजाज़त देकर इंसाफ़ का गला घोंट दिया गया, 

लखनऊ बाबरी मस्जिद की शहादत के 29 वीं वर्ष गांठ पर हर साल की तरह इस साल भी मुस्लिम मजलिस के पदाधिकारियों ने  मजलिस के कार्यालय तकिया पीरजलील कैसर बाग लखनउ में  6 दिसम्बर को काला दिवस मनाते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की हत्या के बाद 6 दिसम्बर 1992 को  संघ परिवार के   गुंडों ने देश के संविधान, लोकतंत्र, अदालत की बलादस्ती की धज्जियां उड़ाते हुए सैकड़ों साल पुरानी मुसलमानों की इबादत गाह बाबरी मस्जिद को सरकार की मिलीभगत से शहीद करके दूसरी बड़ी अतंक वादी घटना को अंजाम दिया था


जिसके बाद मुसलमानों सहित तमाम इंसाफ़ पसन्द लोगों का यह विश्वास था कि देश की  सर्वोच्च न्यायालय से इंसाफ मिलेगा और बाबरी मस्जिद विध्वंस के अपराधियों को सजा मिलेगी  लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद में 16 दिसंबर 1949 तक नमाज होना बाबरी मस्जिद में मूर्ति रखे जाना एवं मस्जिद की शहादत को अपराधिक घटना मानने के साथ ही यह भी माना कि मस्जिद का निर्माण किसी मंदिर को तोड़कर नहीं किया गया था फिर भी उन्हीं दहशतगर्दी की घटना को अंजाम देने वालों को मस्जिद की जगह पर मंदिर के निर्माण की इजाजत देकर इंसाफ का गला घोट दिया जिससे मुसलमानों सहित तमाम इंसाफ पसंद लोगों का अदालत पर से भरोसा डिगा है मोहित दुनिया भर में देश को शर्मिंदा होना पड़ा है देश के तमाम इंसाफ पसंद लोगों और कानून के जानकारों ने इस फैसले की भरपूर आलोचना भी की थी वक्ताओं ने बाबरी मस्जिद की शहादत के अपराधियों को आज तक सजा ना मिल पाने की घोर निंदा करते हुए उन्हें जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए सरकार से उच्च न्यायालय में पैरवी की मांग करते हुए मस्जिद के नव निर्माण के लिए अल्लाह से दुआ की और बाबरी मस्जिद की शहादत को हमेशा याद रखे जाने का 

संकल्प भी लिया आज के कार्यक्रम में वसी अहमद एडवोकेट, मुस्तकीम अहमद मंसूरी, इरफान कादरी, कारी नासिर, मोहसिन एडवोकेट, डॉक्टर अफसर, सहित मजलिस के तमाम पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे

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