नई शिक्षा नीति 2020 के विरोध में प्रदर्शन करते हुए इसे वापस लेने की माँग : एआईएसईसी

इस विनाशकारी शिक्षा नीति को दिल्ली सहित सभी राज्यों में लागू होने से रोका जाए। 

नई दिल्ली (अनवार अहमद नूर) 
नई शिक्षा नीति देश भर में छात्रों के लिए अशुभ और दिशाहीन है इसलिए इस को लागू होने से रोकने के साथ साथ वापस लिया जाना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2020 हर तरह से लोगों के विरुद्ध और पूंजीवाद की पोषक है।हम इस नीति का विरोध और इसे वापस लेने की माँग करते हैं। इन्हीं विचारों के साथ आज अनेक लोगों ने आल इंडिया सेव एजुकेशन कमेटी(एआईएसईसी) के दिल्ली चैप्टर के तत्वावधान में नई शिक्षा नीति का विरोध किया तथा दिल्ली सचिवालय के निकट प्रदर्शन करते हुए  दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ज्ञापन पत्र देकर मांग की, कि दिल्ली सरकार इस शिक्षा नीति 2020 को दिल्ली में बिल्कुल लागू न करे। 
सेवा निवृत्त तथा अनेक वर्षों से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रोफ़ेसर नरेंद्र शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार का उद्देश्य जनता को परेशान रखना और अशिक्षित रखना है। आज स्कूली शिक्षा को जिस तरफ ले जाया जा रहा है वहां आम व गरीब लोगों को शिक्षा से काटा जा रहा है। यह फासीवाद का ख़तरनाक दौर है। सरकार की सरकारी नीतियां लोगों पर लादी जा रही हैं। शिक्षा संस्थानों की आज़ादी को छीना जा रहा है। अगर स्कूल नहीं होंगे और ऑनलाइन शिक्षा होगी तो आदर्श और गुणों को कौन सिखाएगा। नौजवानों के अंदर असली गुणों और संस्कारों वाली स्कूली शिक्षा का अभाव रहेगा और इन्हीं अभावों के कारण आज क्राइम बढ़ रहा है। आज की शिक्षा खंडवाद की ओर ले रही है और अगर शिक्षा को कुनीति और इस फासिज़्म से न बचाया गया तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। 
दिल्ली स्टेट ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के सदस्य राहुल सरकार ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान शिक्षा नीति विनाशकारी नीति है और हमारी मांग है कि इस नीति को कहीं भी लागू न किया जाए और राज्य सरकारें इस शिक्षा नीति के विरोध में खड़ी हों। 
यहां श्रीमती शारदा दीक्षित, श्री गिरवर सिंह आदि ने संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि विश्व गुरु बनाने के नाम पर शिक्षा नीति को ऐसी बनाया जा रहा है कि जिस में विदेशी कंपनियों को भारतीय पढ़े-लिखे मजदूर तो मिलें लेकिन वह ज्ञानवान न हों और किसी सवाल को पूछने के काबिल भी न हों। शिक्षा के साइंटिफिक और सेकुलर स्ट्रक्चर को ध्वस्त किया जा रहा है। 
वक्ताओं ने छात्रों, अध्यापकों और अभिभावकों तथा शिक्षा क्षेत्र से प्यार करने वाले लोगों से यह अपील की, कि अपने देश कि इस शिक्षा नीति के विरुद्ध संघर्ष करें और एक ऐसा संदेश दें कि सरकार इस शिक्षा नीति को वापस लेने के लिए मजबूर हो जाए। क्योंकि यह शिक्षा नीति सभी लोगों के विरुद्ध है और छात्र - छात्राओं को अच्छी और संस्कार वाली शिक्षा से काटकर फासीवादी शिक्षा की ओर ले जा रही है।

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