गांधी जयंती पर राष्ट्रपिता का अपमान। हत्यारे गोडसे का जयकारा व गुणगान।

 '' 'गोडसे ज़िन्दाबाद' करने वाले लोग देश को शर्मसार कर रहे हैं '': वरुण गांधी (भाजपा नेता) 

नई दिल्ली (अनवार अहमद नूर) भारत के इतिहास के दुश्मन अब दो अक्टूबर के दिन को हत्यारे नाथूराम गोडसे के गुणगान का दिन बना देना चाहते हैं। जबकि यह दिन देश की दो महान विभूतियों (राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री) के जन्मदिन के तौर पर इतिहास के पन्नों में दर्ज है। गांधी जी का जन्म दो अक्टूबर 1869 को हुआ। उनके कार्यों- संघर्षों एवं विचारों ने देश की स्वतंत्रता और उसके बाद आज़ाद भारत को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई।



राष्ट्रपति कोविंद और पीएम मोदी सहित जब देश बापू को नमन कर रहा था तो कुछ सोशल मीडिया और ट्वीटर पर गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को ट्रेंड करके अपना देश विरोधी परिचय दे रहे थे। और ट्विटर पर ‘ नाथूराम गोडसे जिंदाबाद’ ट्रेंड चला रहे थे। शर्मनाक और इस अपराधिक कुकृत्य पर उन्हें कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए थी। मगर दुखद कि ऐसे तत्वों को छूट और शह मिलने से इनके हौंसले बढ़ रहे हैं। 

देश भर में लोग इस बात और इस व्यवस्था से रोष में हैं कि देश में देश के राष्ट्रपिता का अपमान और उनके हत्यारे गोडसे का गुणगान और जयकारा किया जा रहा है। आज दो अक्टूबर को जब कुछ तत्वों ने ऐसा करते हुए ट्विटर पर 'नाथूराम-गोडसे-जिंदाबाद' ट्रेंड चलाया, तो आम लोगों सहित कई नेताओं ने इसका विरोध कर इसे शर्मनाक बताया। वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता वरुण गांधी ने अपनी नाराज़गी प्रकट करते हुए ट्वीट किया कि "भारत हमेशा ही आध्यात्मिक महाशक्ति रहा है। लेकिन महात्मा ने हमें इस आध्यात्मिकता के आधार पर वह नैतिक बल दिया, जो आज भी हमारी सबसे बड़ी ताक़त है। जो लोग गोडसे ज़िन्दाबाद ट्वीट कर रहे हैं, वे निहायत ग़ैरज़िम्मेदाराना ढंग से देश को शर्मसार कर रहे हैं।" 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से महात्मा गांधी के शांति के संदेशों को याद रखने की अपील करने के साथ ही कहा कि दुनिया भर के लड़ाकों को अपने हथियार डाल देने चाहिए।

महासचिव ने 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर अपने संदेश में कहा कि यह संयोग नहीं है कि हम महात्मा गांधी के जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाते हैं। उन्होंने कहा कि 'गांधी के लिए, अहिंसा, शांतिपूर्ण प्रदर्शन, गरिमा और समानता महज शब्द नहीं थे बल्कि मानवता के मार्गदर्शक थे, बेहतर भविष्य का खाका थे। अहिंसा, शांतिपूर्ण प्रदर्शन, गरिमा और समानता, आज के संकट के वक्त में भी समस्याओं से पार पाने का रास्ता दिखाते हैं।'

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