- दिल्ली वालों ने भाजपा को एमसीडी में 15 साल दिया, फिर भी उन्हें सफाई की मूलभूत समस्या से निजात नहीं मिल सका- सौरभ भारद्वाज*

 नई दिल्ली, 07 अक्टूबर, 2021 आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक सौरभ भारद्वाज ने भाजपा शासित एमसीडी के सफाई कर्मचारियों को कार्य स्थल से नदारत रहने के संबंध गंभीर खुलासा किया। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एमसीडी के कर्मचारी सड़कों पर झाड़ू लगाने की जगह भाजपा नेताओं के घर की चाकरी कर रहे हैं। इसलिए सफाई कर्मचारी सड़कों पर नियमित झाड़ू नहीं लगाते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली वालों ने भाजपा को एमसीडी में 15 साल दिया, फिर भी उन्हें सफाई की मूलभूत समस्या से निजात नहीं मिल सका।


सफाई-व्यवस्था को लेकर दिल्ली की हो रही बदनामी के लिए सिर्फ भाजपा शासित एमसीडी जिम्मेदार है। सौरभ भारद्वाज ने सवाल किया कि अगर सफाई कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं, तो कहां जाते हैं और उन्हें तनख्वाह कैसे बांटी जा रही है? उन्होंने कहा कि कर्मचारी ड्यूटी स्थल से जरूर गायब हैं, लेकिन वे भाजपा नेताओं के घर में नौकरी कर रहे हैं और इसीलिए एमसीडी उन्हें तनख्वाह दे रही है।


*भाजपा शासित एमसीडी के सफाई कर्मचारी सड़कों पर नियमित झाड़ू नहीं लगाते हैं- सौरभ भारद्वाज*


आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक सौरभ भारद्वाज ने आज पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि दिल्ली के अंदर आप किसी भी इलाके में चले जाइए। चाहे वह ग्रेटर कैलाश का पॉश इलाका हो, बादली का आउटर दिल्ली का इलाका हो, बुराड़ी की अनाधिकृत कॉलोनी हो, बसंतकुंज के फ्लैट हों, चांदनी चौक जैसा कोई बाजार हो या लाजपत नगर जैसी कोई मार्केट हो, आप कहीं पर भी निकल जाएं, वहां के किसी आरडब्ल्यूए, मार्केट एसोसिएशन या जनता के किसी नुमाइंदे से बात करें, सभी चौपट हो चुकी सफाई व्यवस्था पर खुल कर बात रखते हैं। आम आदमी पार्टी पिछले एक महीने से ‘आपका विधायक आपके द्वार’ नामक कार्यक्रम कर रहे हैं। इसमें जनता से उनकी परेशानियों को लेकर आमने-सामने बात होती है। आप वहां पर भी बात करके देखिए, तो हर दिल्लीवासी की एक परेशानी है कि घर तो साफ-सुथरा है, मगर घर से जैसे ही आप बाहर निकलते हैं, सड़क पर कूड़ा है। सफाई कर्मचारी सड़क पर झाड़ू नहीं लगाते हैं। 


*सड़कों पर हफ्ते में एक या दो दिन झाड़ू लगती है और कूड़ा उठाने वाला कोई नहीं आता है- सौरभ भारद्वाज*


सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एमसीडी के द्वारा सड़कों और गलियों की सफाई का काम बहुत बुरे हाल में हैं। एक गली में एक दिन झाड़ू लगेगी, तो फिर वहां अगले हफ्ते झाड़ू लगेगी या फिर जहां पर लोग फोन कर पूछते हैं कि झाड़ू क्यों नहीं लगी, तब वहां कर्मचारी को भेजकर के झाड़ू लगवाई जाती है। इसके बाद 10 दिनों तक वहां झाड़ू नहीं लगती है। कहीं पर हफ्ते में एक दिन तो कहीं दो दिन झाड़ू लगती है। अगर झाड़ू लग जाए, तो कूड़ा उठाने वाला कोई नहीं आएगा। कूड़ा को उठाकर अगर कूड़ घर में पहुंचा भी दिया जाता है, तो कूड़ा घर कूड़े से ओवरफ्लो करते रहते हैं और वहां पर पशु कूड़ा खा रहे होते हैं। दिल्ली वालों की जो बिल्कुल आधारभूत समस्या है, उन्हें उस समस्या से भी निजात नहीं मिली है। पहले, भाजपा 2007 में चुन कर एमसीडी में आई और 2012 तक रही। फिर 2012 में चुनकर आई और 2017 तक रही। भाजपा 2017 में फिर चुन कर 2022 तक के लिए आई है। भाजपा को एमसीडी की सत्ता संभालते हुए 15 साल हो गए हैं। दिल्ली वालों ने भाजपा को एमसीडी के अंदर एक-दो साल नहीं, बल्कि 15 साल दिए हैं। 2007 में जो बच्चा शायद पहली कक्षा में पढ़ रहा होगा, वह 15 साल बाद आज 20 साल का हो हो गया है और वह वोट देने लायक हो गया है। वह बच्चे कॉलेज में पहुंच गए है, लेकिन एमसीडी के अंदर कोई सुधार नहीं हुआ। 

*हाईकोर्ट ने भी टिप्पणी की है कि जब सफाई का काम ही नहीं होता है, तो हम तनख्वाह किस चीज के लिए दे रहे हैं- सौरभ भारद्वाज*

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली की सफाई व्यवस्था इतनी घटिया है कि आप रेलवे स्टेशन पर उतर कर जैसी ही बाहर निकलें, आपको लगेगा कि दिल्ली इतनी गंदी क्यों है? इसके अंदर सबसे ज्यादा बदनामी दिल्ली सरकार और दिल्ली वालों की होती है। बाहर से विदेशी सैलानी आते हैं और पूरे देश की बदनामी होती कि दिल्ली में बहुत ज्यादा गंदगी है और इसके जिम्मेदार सिर्फ भाजपा शासित एमसीडी है। यह बात हम लोग तो कई सालों से कह रहे थे कि भाजपा से पिछले 15 साल में दिल्ली की सफाई नहीं हो पाई। भाजपा शासित एमसीडी ने शिक्षा और स्वास्थ्य में क्या किया, सड़कें क्यों नहीं बनाई, पार्कों में मालिक क्यों नहीं है, रखरखाव क्यों नहीं ठीक है, भ्रष्टाचार व चोरी है, भाजपा के पार्षद लेंटरों और छज्जे बनाने के लिए एक-एक लाख रुपए लेते हैं, यह सब छोड़ दीजिए, इनसे 15 साल में भी दिल्ली की सफाई नहीं हो सकी। यह दिल्ली वालों का दर्द है। सौरभ भारद्वाज ने कोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि हद तो तब हो गई, जब कल हाईकोर्ट के जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जस्मीत सिंह की डबल बेंच ने यहां तक कह दिया कि निगम के अंदर जब सफाई का काम ही नहीं होता है, तो हम इनको तनख्वाह किस चीज के लिए दे रहे हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि हमें शर्म आती है कि नगर निगमों के अंदर सड़कों की सफाई नहीं होती है और तनख्वाह मांगने हमारे पास आ जाते हैं। मुझे लगता है कि इससे बड़ी और गंभीर टिप्पणी कभी किसी कोर्ट ने नहीं की होगी। 

*हाईकोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाने को कहा है, जिससे पता चल सके कि कर्मचारी ड्यूटी स्थल पर है या नहीं है- सौरभ भारद्वाज*

उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले, हाईकोर्ट की इसी बेंच ने कहा था कि ऐसा लगता है कि साउथ दिल्ली म्युनिसिपल कारपोरेशन सिर्फ तनख्वाह और पेंशन बांटने के लिए ही चल रहा है। इनका कोई काम नहीं हो रहा है। यह 70 फीसद अपना फंड सिर्फ सैलरी और पेंशन देने में खर्च कर रहे हैं। सैनिटेशन और विकास कार्य करने के लिए इनके पास कुछ नहीं है। हाईकोर्ट ने बहुत गंभीर बात कही कि हमें इस चीज पर भी शक है कि नगर निगम के कर्मचारी अपना काम करने के लिए अपने काम वाली जगह पर होते भी हैं या नहीं होते हैं, जब सुबह 9ः00 से 5ः00 तक उनका वर्किंग टाइम होता है। कोर्ट ने कहा कि कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाई जाए, कोई जिओ मैपिंग का तरीका निकाला जाए, जिससे यह पता चल सके कि यह कर्मचारी वहां पर है या नहीं है। कोर्ट ने यहां तक कहा कि इसके लिए कोई सिस्टम बनाया जाए, क्योंकि हमें ऐसा लगता है कि नगर निगम के अंदर कोई काम नहीं होता है। यह बात जो दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच ने कही, यह बात हर आरडब्ल्यूए और मार्केट एसोसिएशन वाला कहता है कि हमारे यहां जो माली नियुक्त है, उस मालिक को हमने कभी देखा ही नहीं है। उसकी तनख्वाह तो जा रही है। हमारे यहां कागजों में लिखा कि इस बीट पर सफाई कर्मचारी की ड्यूटी है, लेकिन वह कर्मचारी कभी आया नहीं। *अगर कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं, तो कहां जाते हैं और उन्हें तनख्वाह कैसे बांटी जा रही है- सौरभ भारद्वाज*

सौरभ भारद्वाज ने एमसीडी से सवाल करते हुए कहा कि अगर वह माली व कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं, तो कहां जाते हैं। अगर वो अपने घर में हैं, तो उनको तनख्वाह कैसे बांटी जा रही हैं। यह बहुत ही गंभीर सवाल हैं। या तो कर्मचारी ड्यूटी पर आ नहीं रहे हैं और नहीं आ रहे हैं, तो आप उनकी तनख्वाह क्यों दे रहे हैं या यह है कि तनख्वाह आप इसलिए दे रहे हैं क्योंकि वह भाजपा के नेताओं के घर के अंदर नौकरियां कर रहे हैं, भाजपा के नेताओं की गाड़ियां धूल रहे हैं, भाजपा के नेताओं के ऑफिसों के अंदर चाय-पानी पिला रहे हैं और नगर निगम के बड़े-बड़े अफसरों के घर के अंदर सब्जी खरीद कर ला रहे हैं। इतने बड़े स्तर पर हजारों कर्मचारी गायब हैं, यह कैसे संभव है कि इसके बावजूद नगर निगम उनको तनख्वाह दे रहा है। नगर निगम उनको तनख्वाह इसलिए दे रहा है, क्योंकि वो लोग अपनी नौकरियों से जरूर गायब हैं, मगर भाजपा के नेताओं के घर चाकरी कर रहे हैं। यह बात माननीय उच्च न्यायालय ने कहीं कि नगर निगम के जो कर्मचारी हैं, वो अपनी ड्यूटी से गायब हैं, इसकी जांच होनी चाहिए और जियो मैपिंग होनी चाहिए।

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