मोदी सरकार, असम सरकार और प्रशासन के ख़िलाफ़ आक्रोश।

दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर बंगाल - बिहार तक असम की घटना पर विरोधी प्रतिक्रियाएं, विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन पत्रों का क्रम जारी। 

Report By : Anvar Ahmad Noor

 नई दिल्ली असम में एक मुस्लिम बस्ती को उजाड़े जाने और इनके घरों को ध्वस्त करने के दौरान पुलिस की हिंसा और दरिंदगी के विरुद्ध देश भर से आक्रोश भरी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।। नई दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों में विभिन्न संगठनों तथा लोगों ने प्रदर्शन करके मोदी सरकार, असम सरकार और पुलिस प्रशासन के विरुद्घ नारेबाजी की। असम के मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगा। हिंसा पीड़ितों और मरने वालों के परिवार जनों को उचित मुआवज़ा एवं पुनर्वास की मांग रखी। दोषी पुलिसकर्मियों और क्रूर फोटोग्राफर को कड़ी सज़ा देने को कहा है। 

असम में हुई हिंसक कार्रवाई और बर्बरता के विरुद्ध देश भर के लोगों का गुस्सा उबल रहा है। कि असम सरकार मुस्लिम गरीबों की ज़मीन पर कब्ज़ा कर रही है जबकि यह केस कोर्ट में है लेकिन फिर भी पुलिस ज़मीन को खाली कराने पंहुच जाती है।और निहत्थे गरीब लोगों पर सामने से गोलिया चलाकर कई को मौत के घाट उतार देती है और फिर उसी लाश पर लाठिया बरसाती है और एक क्रूर कैमरामैन विजय शंकर बनिया उस लाश पर कई बार कूदता है जो अत्याचार और क्रूरता - बर्बरता की इंतेहा है। इस पुलिस हिंसा में सद्दाम हुसैन,फरीद,और ज़ुबिन अली की निर्मम हत्या कर दी गयी है। 

कल दिल्ली में स्थित असम भवन का घिराव किया गया तो आज जंतर मंतर पर भारी संख्या में लोग जुटे और मोदी तथा असम सरकार को जमकर कोसा और इनके शासन को अमानवीय, तानाशाही, अन्यायी और अत्याचारी बताया। 

बिहार के कटिहार तथा अन्य जिलों से विरोध प्रदर्शनों और असम अत्याचार की निंदा के समाचार हैं।। बंगाल के विभिन्न शहरों में मोदी सरकार और असम सरकार तथा वहां की पुलिस के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी हुई है। असम के मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया है। 

असम के यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एयू


डीएफ) के सभी विधायकों, जिनमें जमीयत उलमा-ए- असम राज्य के महासचिव एंव विधायक हाफ़िज़ बशीर अहमद क़ासमी भी शामिल हैं। अपना विरोध दर्ज कराते हुए असम सचिवालय के प्रांगण में अम्बेडकर मूर्ति के नीचे साइलेंट प्रोटेस्ट पर बैठ गए। उन्होंने राज्यपाल से भी मुलाकात करके अपना ज्ञापन सौंपा ।

लोगों ने खुलकर कहा कि असम की मौजूदा भगवा सरकार जिसका मुखिया हेमंत बिसवां सरमा है जब से कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आया है और सेकुलर से कम्यूनल बन गया है खुद को कट्टर हिन्दू साबित करने में लगा हुआ है और असम को म्यांमार के रास्ते पर ले जा रहा है और इस काम में उसका आईपीएस भाई सहयक साबित हो रहा है। जिसने मुस्लिम बस्ती को उजाड़ कर गोली चलवा दी और लोगों की जानें ले लीं। लोगों ने मांग की है कि इस लाठी और गोली चलवाने वाले और चलाने वालों पर कार्रवाई करते हुए सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाए।

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