भाजपा विरोधी विचारधारा के लोगों पर इस्तेमाल हो रहा है यूएपीए कानून - इफ्तेखार महमूद


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य कार्य समिति के सदस्य तथा झारखंड आंदोलनकारी इफ्तेखार महमूद ने कहा है कि आतंकवाद को रोकने के बजाएं वैचारिक विरोधियों का दमन करने के लिए गैर कानूनी रोकथाम अधिनियम 2019 का उपयोग केंद्र एवं भाजपा शासित राज्यों द्वारा किया जा रहा है। 

 श्री महमूद ने कहा कि आतंकवाद की रोकथाम की बात कह कर गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां रोक धाम अधिनियम(यूएपीए) मे संशोधन कर इसे और कठोर एवं व्यापक बनाने का संसद से बिल को पारित करवाया था। लेकिन अगस्त 2019 से लेकर अब तक सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के धुर विरोधी विचार के लोगों पर ही उक्त कठोर कानून का उपयोग हो रहा है।

                       उन्होंने कहा कि इस जून माह में यूएपीए के अंतर्गत देश के विभिन्न जेलों में वर्षों से बंद लोगों को न्यायालयो ने निर्दोष पाकर आरोप मुक्त किया है। असम के श्री अखिल गोगोई को 30 जून को रिहा किया गया, जून के पहले सप्ताह में पिंजरा तोड़ आंदोलन चलाने वाली दो छात्राओं नताशा नरवल एवं देवांगना कलिता तथा जामिया के छात्र नेता श्री आसिफ इकबाल तन्हा को दिल्ली उच्च न्यायालय ने रिहा किया।19 जून को गुजरात के जेल में बंद श्रीनगर के एनजीओ एक्टिविस्ट श्री बसीर बाबा को आरोप मुक्त किया गया। ये सभी लोग यूएपीए के तहत वर्षों से जेल में बंद थे। विगत दिनों राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार श्री विनोद दुहा पर भी इस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पिछले 1 वर्ष से श्री स्टैंन स्वामी इसी अधिनियम के तहत जेल में बंद है। झारखंड निवासी श्री स्वामी विस्थापन के विरुद्ध लोगों को एकजुट करने वाले झारखंड के प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता हैं इनके प्रयासों से हजारों आदिवासी परिवारों को न्याय मिला है अब ये शारीरिक रूप से काफी दुर्बल हो चुके हैं, हाथ कांपते रहने के कारण चाय- पानी भी श्री स्वामी स्वंय नहीं पी पाते हैं। इस दुर्बल 80 वर्षीय व्यक्ति को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 1 साल से जेल में रखे हुए हैं। बहुत प्रयास के बाद मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश पर बेहतर इलाज की सुविधा  श्री स्वामी को मिल पाया है।

    आतंकवाद से निपटने के नाम पर उपर्युक्त यूएपीए कानून को सन 2019 में कठोर बनाने के बाद असहमति रखने वाले लोगों से ही केंद्र सरकार निपटने का काम कर रही है। सरकार के इस रवैया से विश्व स्तर पर लोकतांत्रिक देशों की सूची में भारत का स्थान काफी नीचे आ गया है। श्री महामूद ने कहा कि यूएपीए कानून की संसद में समीक्षा होनी चाहिए।

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