एसपी पीलीभीत से न्याय ना मिलने पर पूर्व सैनिक सरदार रेशम सिंह को न्याय दिलाने के लिए आईजी से मिली पैनी नजर संस्था की अध्यक्ष, एड सुनीता गंगवार।

 

बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए बरेली से मुस्तकीम मंसूरी की रिपोर्ट

पूर्व फौजी सरदार रेशम सिंह एवं उनकी मां, बहनों के साथ पुलिस द्वारा जो बर्बरता की गई उसे शब्दों में बयान करना असंभव है।

रेशम सिंह के ऊपर पुलिस ने थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करते हुए व उनके इंटर्नल पार्ट को घायल करने का घृणित कार्य किया है।

 


बरेली 14 जून 2021 को पैनी नजर संस्था अध्यक्ष एड सुनीता गंगवार ने बताया कि पीलीभीत पूरनपुर के पूर्व फौजी सरदार रेशम सिंह एवं उनकी वृद्ध मां व दो बहनों के साथ पीलीभीत पुलिस द्वारा जो बर्बरता की गई है ।उसे शब्दों में बयान करना असंभव है। यह घटना सरदार रेशम सिंह के साथ उस समय घटी जब बे अपनी मां व दोनों बहनों के साथ बहन के पति की अंत्येष्टि में जा रहे थे। पीलीभीत पुलिस ने उनका चालान काटने हेतु उन्हें रोका था, जबकि गाड़ी के सभी कागज पूरे थे। इसके पश्चात पीलीभीत पुलिस द्वारा सरदार रेशम सिंह व उनके परिवार का उत्पीड़न वहीं से आरंभ होता हुआ। सरदार रेशम सिंह व उनकी मां, बहनों के साथ पुलिस ने मारपीट की पूर्व फौजी  को थाने में ले जाकर सरदार रेशम सिंह के ऊपर पुलिस ने थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करते हुए व उनके इंटर्नल पार्ट को डंडे द्वारा घायल करने का घृणित कार्य किया जिससे कि वे लहू लोहान हो गए चोट का वीडियो पूर्व सैनिक सरदार रेशम सिंह के पास उपलब्ध है।  इसके अलावा MH ने इस घृणित कार्य की पुष्टि भी की है ।उसके पश्चात पीलीभीत पुलिस ने उनकी बहनों व सरदार रेशम सिंह के ऊपर 8 धाराओं के अंतर्गत उल्टा मुकदमा दर्ज कर दिया और उनका 18500 का चालान भी काटा इसके पश्चात पीड़ित रेशम सिंह ने पुलिस के खिलाफ अपनी एफ आई आर करवाने की कोशिश की लेकिन पीलीभीत पुलिस ने एफ आई आर नहीं दर्ज की बहुत जद्दोजहद के 5 दिन बाद 5 मई 2021 को दो पुलिसकर्मियों व 5 ,6 से अज्ञात जो कि पुलिस वाले ही थे मामूली धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जबकि  ना तो रेशम सिंह के ऊपर चालान का कोई अधिकार आधार था, न ही सरदार रेशम सिंह के ऊपर मुकदमे का कोई आधार था ।पुलिस की मारपीट पर रेशम सिंह अकेला अपना बचाव कर रहा था। यह है पीलीभीत पुलिस की कार्यशैली कि पीड़ित के ऊपर ही मुकदमा लिख दिया गया। और पुलिस ने अपने बचाव के लिए मामूली धाराओं में मुकदमा लिख कर लीपापोती की गई, ताकि दोनों पक्षों के मुकदमे को खत्म करके पुलिस अपना बचाव कर सकें लेकिन पीड़ित के साथ जो बर्बरता हुई थी, वह भी एक पूर्व सैनिक के साथ जिसने अपने जीवन के बेहतरीन साल देश की सेवा में दिए उस सैनिक के साथ बर्बरता होती है तो वह मुकदमा लिखवाने किस देश की पुलिस के पास जाए। यह एक बड़ा सवाल पुलिस प्रशासन के ऊपर खड़ा होता है। एक माह से ज्यादा बीत जाने के पश्चात पूर्व सैनिक सरदार रेशम सिंह पुलिस प्रशासन के चक्कर काट काट कर थक हार कर पैनी नजर सामाजिक संस्था की शरण में आया, संस्था ने पूर्व सैनिक सरदार रेशम सिंह से पूरी घटना की जानकारी ली वा पीलीभीत उनके पास जाकर व्यक्तिगत भी मुलाकात की संपूर्ण घटना को संज्ञान में लेने के पश्चात विषय की सत्यता को समझने के पश्चात संस्था अध्यक्ष ने पीड़ित के साथ व पूर्व सैनिकों के संगठन के साथ मिलकर जिला पीलीभीत जिला अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा किंतु उसके पश्चात भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिला पीलीभीत एसपी से भी संस्था ने गुहार की एसपी महोदय सक्षम धाराओं के अंतर्गत आरोपी पुलिसकर्मियों के ऊपर मुकदमा दर्ज करने की कृपा करें। क्योंकि पुलिस कानून की रक्षक है, और जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो उस पर तो डबल  संगीन अपराध बनता है। इसलिए उन पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा जाए, किंतु पीलीभीत पुलिस ने ऐसा कुछ नहीं किया पीलीभीत पुलिस प्रशासन आरोपियों को बचाने में लगा हुआ है। अतः संस्था आपसे विनम्र अनुरोध करती है, कि तुरंत घटना का संज्ञान लेते हुए आरोपियों के खिलाफ सक्षम धाराओं में मुकदमा दर्ज कर इन्हें जेल भेजें नहीं तो मजबूर होकर पैनी नजर सामाजिक संस्था उत्तर प्रदेश व पीड़ित एवं उसका परिवार व पूर्व सैनिक संगठन उत्तर प्रदेश 21 जून 2021 से कोविड नियमों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से जिला बरेली कमिश्नरी में धरने पर बैठने पर मजबूर होगा।

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