हाजी अली उज्बेकिस्तान के बुखारा शहर के रहने वाले थे I आप बहुँत पैसे वाले व्यापारी थे,



 *(मुंबई -हाजी अली )*


हाजी अली उज्बेकिस्तान के बुखारा शहर के रहने वाले थे I आप बहोत पैसे वाले व्यापारी थे, आपने पूरी दुनिया का भ्रमण किया है आज से तक़रीबन 550 वर्ष पूर्व आप  अपने भाई के साथ पहली बार भारत देश में भी पहुचे उस वक्त भी मुंबई प्रमुख व्यापारिक स्थल हुवा करता था I मुंबई के वरली इलाके में आकर आप रुके और फिर वे इसी जगह पर रहने लगे I भारत में रहकर आपने बहोत से बुज़ुर्ग, कामिल वलिअल्लाहो को देखा, उनके बारे में सुना और आपने महसूस की इन बुजुर्गो ने जिनमे  हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती र.अ., कुतबुद्दीन चिश्ती र.अ., बाबा फरीद र.अ., निजामुद्दीन चिश्ती र.अ.,जैसे अनेक सूफी संत है जिन्होंने खल्क की खिदमत की और उनके  प्रभाव से इस मुल्क में इस्लाम तेज़ी से फल फूल रहा था I ज़रूरत थी इन बुजुर्गो के लगाये पौधों को सीचने की, आपको महसूस हुवा की अल्लाह ने उन्हें भी इसी वजह से मुल्के हिंदुस्तान मुबंई में  भेजा है लिहाज़ा आपने भी यहाँ आने के बाद इंसानियत और इस्लाम की खिदमत को अपना मकसद बनाया  I आप बुखारा शरीफ के थे आपके  अन्दर अल्लाह ने  तमाम रूहानी वो बातिनी इल्म पहले से दिए हुवे थे  लिहाज़ा आपने व्यापार को छोड़कर खिदमते खल्क का रास्ता चुना I आपकी बाते सुनकर सभी मज़हब के लोग तेज़ी से आपके करीब आने लगे I आप इंसानो  के दुःख दर्द को  अच्छी तरह से समझते थे आपने हर तरह से सभी की मदद की सभी को सही रास्ता दिखलाया I इधर हिन्दुस्तान में रहते हुवे जब काफी दिन हो गए तो आपकी वाल्दा ने आप के पास खबर भिजवाई आपने जवाब दिया अल्लाह चाहता  है की मै हिन्दुस्तान में ही रहकर खल्क की खिदमत करू लिहाज़ा ए अम्मीजान आप मेरी फ़िक्र मत कीजे और मेरे लिए अल्लाह से दुवा करे की अल्लाह मुझे इस अज़ीम  मकसद में कामयाबी दे I और इस तरह आप हमेशा हमेशा के लिए हिंदुस्तान में ही रहने लगे I


 आपने कई बार हज का सफ़र किया था I लोग आपको हाजी अली कहा करते I ऐसा कहा जाता है की  हज के दौरान ही आप की रूह ने आपके जिस्म का साथ छोड़ दिया, और आपकी नसीहत के मुताबिक आपके जिस्म मुबारक को एक ताबूत में बंद कर समुद्र में छोड़ दिया गया आपका जिस्म मुबारक अरब सागर में हजारो मील का सफ़र तय करता हुवा मुंबई के वरली स्थित बंदरगाह जहाँ आज भी आपकी मजार है वहां पर ही आकर रुक गया I  और आपकी वसीयत के मुताबिक ये वही जगह थी जहाँ आपने कहा था इसी वजह से इस जगह पर सन 1431  में आपकी मजार बनायीं गई I तो कुछ का मानना कुछ और है मगर ये बात तो हकीकत है की आक्पकी वसीयत के मुताबिक ही आपकी दरगाह समुद्र के बीच इस जगह पर मौजूद है I  अल्लाह I मजार के साथ एक मस्जिद भी है I हाजी अली की दरगाह वरली मुंबई में अरब सागर समुद्र के किनारे से तक़रीबन 500 गज की दूरी पर आज भी वैसी ही मौजूद है जैसा की कल थी I आज भी अरब सागर की लहरे उनकी मज़ार की दीवारों तक पहुचती तो ज़रूर है मगर उसकी इतना मजाल नहीं की वो उस दरगाह तक पहुच सके I  कोई नुकसान पहुचाना तो दूर की बात है लहरे आज तक इसे कभी छू भी नहीं सकी है लगता है जैसे  पानी खुद इस मुक़द्दस दर का तवाफ़ करने आता तो बहोत तेज़ी से है मगर उतनी ही तेज़ी से थम भी जाता है और फिर खुश होकर वापस चला जाता है I हालाकि दरगाह के नीचे हजारो फिट पानी होगा मगर ये दरगाह अपनी जगह पर किस तरह कायम है ये हैरानी की बात है I पहले इस दरगाह के अन्दर औरतो का जाना मना था मगर कोर्ट के फैसले के बाद से आज वहां पर औरते भी अन्दर आ जा रही है I इस जगह पर बहोत से लोग सैर और तफरीह के लिए भी आते है और आज ये जगह एक प्रमुख स्थल है I हाजी अली के बारे में एक और बात पता चली है की आपने अपनी  बहन को भी ख्वाब में बशारत दी और अपने इस जगह पर मौजूद होने के बारे में बतलाया I आपकी बहन इस जगह पर आई और उन्होंने भी अपने भाई के इस अधूरे मिशन को पूरा करने का बीड़ा उठाया और वो भी ताउम्र मुंबई में ही रही आपकी भी दरगाह कुछ फासले में मौजूद है I


ये अल्लाह वालो की शान है , जहाँ उनका दिल चाहे, या फिर हुक्म ए इलाही हो वे वही रहते है I और कल भी ये खल्क की खिदमत कर रहे थे और आज भी ये खल्क की खिदमत कर रहे है क्योकि ये अल्लाह के वली(दोस्त)है जो बेशक जिंदा है I  मुंबई माहिम में ही हज़रत मखदूम शाह की दरगाह भी समुद्र के किनारे स्थित है जहा पर कुछ साल पहले ही  समुद्र का पानी मीठा होने का वाकया काफी मशहूर हुवा था I  इसी दरगाह में हुजुर ए अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम  के मुक़द्दस दर से लायी गई  चादर शरीफ भी एक फ्रेम में लगी हुई है आप कभी जाये तो उसकी भी जियारत ज़रूर करे I मुंबई में ही  कल्याण से कुछ दूरी पर पहाड़ में काफी उचाईयों पर हाजी मस्तान की दरगाह भी मौजूद है I हाजी मस्तान की दरगाह में भी एक तरफ अगर मुसलमान खादिम बैठते है तो दूसरी तरफ हिन्दू खादिम, बैठते है, उनके वक्त भी सभी कौम के लोग इस जगह पर आकर उनके साथ रहने लगे थे और आज भी यहाँ पर  सभी कौम के लोगो को देखा जा सकता है  I तीनो ही जगह बेमिसाल है और जो सुकून है वो तो आपको वहां जाने के बाद ही पता चल सकता है I

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