16 दिन पहले ही मेडिकल में मौत हो गई थी। मगर लापरवाही का आलम यह है कि मेडिकल के अधिकारियों को यह तक नहीं पता कि बुजुर्ग की लाश कहां गई।

 मेरठ। मेडिकल में कोविड पेशेंट की मौत के बाद लाश के ना बदले जाने को लेकर विभागीय अधिकारियों के तमाम दावे हवा-हवाई साबित हुए। गाजियाबाद निवासी जिस बुजुर्ग को उनकी बेटी आज तक कोरोना वार्ड में तलाश करती फिर रही थी। उनकी 16 दिन पहले ही मेडिकल में मौत हो गई थी। मगर लापरवाही का आलम यह है कि मेडिकल के अधिकारियों को यह तक नहीं पता कि बुजुर्ग की लाश कहां गई।

बताते चलें गाजियाबाद निवासी संतोष कुमार को 23 अप्रैल को मेडिकल की आईसीयू में भर्ती कराया गया था। संतोष की बेटी शिवांगी का आरोप है कि तीन मई तक हॉस्पिटल के डॉक्टर उन्हें उनके पिता के हाल-चाल देते रहे। मगर उसके बाद बाद से उनके पिता का कोई अता-पता नहीं है। उधर मेडिकल थाने के इंस्पेक्टर प्रमोद गौतम और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ ज्ञानेंद्र कुमार ने 23 अप्रैल को संतोष की मौत की पुष्टि की है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का कहना है कि जांच के दौरान पता चला है कि संतोष की 23 अप्रैल को मौत हो गई थी। मगर उनकी लाश कहां है इसके विषय में जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं मेडिकल थाने के इंस्पेक्टर प्रमोद गौतम ने भी संतोष की मौत की पुष्टि की है। हालांकि बड़ी बात यह है कि अब तक इस विषय में संतोष के परिवार के लोगों को मेडिकल के अधिकारियों ने कोई जानकारी नहीं दी है। संतोष के दामाद अंकित ने बताया कि मेडिकल के प्राचार्य ने उनके ससुर के लापता होने के विषय में जांच कमेटी का गठन किया है। इसी के साथ जल्द ही संतोष का पता लगाने की बात कही है।

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