मुसलमान_और_यहूदी_एक_तुलनात्मक_____अध्ययन


 #मुसलमान_और_यहूदी_एक_तुलनात्मक_____अध्ययन


दुनिया में 2 अरब मुसलमान है, जिनके 57 अपने मुल्क हैं और इसके अलावा दुनिया के हर कोने में पाए जाते हैं। 

यूरोप जैसी जगह में भी ये 2.5 करोड़ हैं, और सुपर पॉवर अमेरिका और कनाडा में इनकी अच्छी खासी तादाद है।


दूसरी तरफ यहूदी, दुनिया में सिर्फ और  1 करोड 40 लाख। सिर्फ एक मुल्क इजरायल, और इसके अलावा कुछ यहूदी अमेरिका में रहते हैं।

अगर इन दोनों में  अनुपात देखे तो 1 : 142 होता है।

मतलब एक यहूदी और 142 मुस्लिम।


अब दोनों की शिक्षा में अंतर देखें।

90 प्रतिशत यहूदी हायर एजुकेशन हासिल करता है, जबकि मुसलमान सिर्फ 1 प्रतिशत। कितना बड़ा फर्क है।


और ये एक प्रतिशत भी बिलकुल बेकार हो जाता है क्योंकि बाक़ी 99 प्रतिशत तबका इनकी नहीं सुनता, इनकी नहीं चलने देता, बल्कि इनकी मुखालफत में खड़ा होता है। 

ऐसा बताया जाता है कि दुनिया की टॉप 100 रेंक्ड यूनिवर्सिटीज यहूदियों की ही हैं। 

दुनिया की मईशत पर इनका क़ब्जा है। दुनिया को ये अपने हिसाब से चलाते हैं। दुनिया के बच्चों के हाथ में इन्होंने मोबाइल थमा दिए जबकि अपने बच्चों को इस से दूर रखते हैं। 

 दूसरी तरफ मुसलमान जिनका मजहब बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर,  जिसमें उलझने की या आपसी टकराव की कोई गुंजाइश ही नहीं है, वहां 72 फिर्के, और सब एक दूसरे को इस्लाम से खारिज करने में अपनी जान लगा रहे हैं।

कोई दाढ़ियों की नाप लिए घूमता है, कोई पजामे की ऊंचाई, कोई कुर्ते की नीचाई। कोई टोपी को लेकर भिड़ जाता है। भाई ये सब बातें दीन का हिस्सा हैं ही नहीं । कुछ मुसलमान दाज्जाल, हज़रत मेंहदी, ईसा इब्ने मर्यम, और गजवाए हिंद में ही लगे हुए हैं। इन बातों को करके आखिर तुम अपना कोनसा फायदा हासिल करना चाहते हो ?? 

जो आएगा आता रहेगा, अगर ये सब लोग आने वाले भी हैं तो इनको अल्लाह भेजेगा तुम्हारा इसमें क्या रोल है भाई?? 

तुम तो अपनी सोचो।


अब ज़रा ये भी देखिए की ईसाई और मुसलमान वैचारिक दृष्टि से बहुत ही ज़्यादा करीब हैं, इनके बीच एक मामूली सा फर्क है, जबकि यहूदियों ने ईसा अलैहिस्सलाम को क़त्ल किया था, जिस से यहूदी और ईसाई एक दूसरे के सख़्त तारीन दुश्मन हैं। मगर आज वो आपस में दोस्त हैं और मुसलमान दुश्मन।


ऐसा क्यों है??? कि दो गहरे दुश्मन आपस में दोस्त और जिनके बीच नज़रयाती इख्तलाफ़ बहुत कम वो दुश्मन हो गए।

पता है क्या वजह है?? 

यहूदी अपनी बातों को, अपनी प्लैनिग को, अपने राज़ को कभी बाहर नहीं आने देते, दूसरी तरफ हमारे मुल्ला जी मिंबर पे खड़े  होकर खुल्लम खुल्ला यहूदियों, नसारा, हिन्दुओं को गाली देता है, उनको नेस्तो नाबद करने की दुआएं मांगता है , इनको अपना दुश्मन बताता है, और ये मेसेज पूरी दुनिया में जाता है। जिनकी टेक्नॉलाजी इस्तेमाल करोगे और फिर उनको ही गाली दोगे तो दुनिया तो दुश्मन होगी ही।


ये मुल्लाजी ऐसा क्यों करते है?? 

क्योंकि इसके सामने जाहिल अवाम बैठी होती है, जब ये इस तरह की जज्बाती बात करता है तो  लोग समझते हैं बई मौलवी तो पहुंचा हुआ है।

इसके अलावा मौलवी को कुछ नहीं पता होता, ये मेंबर ही उसकी दुनिया है। 

बात करने से पहले एक उसूल सामने होना चाहिए कि इस बात से हमारा क्या फायदा या क्या नुकसान है, लेकिन हम तो अपनी बात सिर्फ इसलिए कहने का शौक रखते है हैं कि सुनने वाला खुश हो जाए। अपने नुकसान और फायदे का सलीका सिर्फ तालीम से आता है जिस से मुसलमान बहुत दूर है।

 

भाईयो तालीम पे ज़ोर दो, अपने बच्चों को पढ़ने के लिए साथ लेकर बैठो, अगर तुम नहीं पढ़ा सकते हो तो ट्यूशन का इंतजाम करो, अपने खर्चे कम करो और बच्चों को पढ़ाओ, और अपनी कौम के बच्चो को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी उठाओ,इसी से तुम्हारा मुस्तकबिल है।

.👍#IsraelTerrorism #FreePalestine 

 प्रस्तुति : के.हसन

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