मोदी जी बचाएंगे - भारत के 80 प्रतिशत जनता की भावना यही थी ?मोदी जी,आज पूछता है भारत?





 मोदी जी बचाएंगे - भारत के 80 प्रतिशत जनता की भावना यही थी ?मोदी जी,आज पूछता है भारत?  फिर आज क्या हुआ कि भारत की जनता त्रस्त है? और व्यावस्था पस्त, प्रशासन और भाजपाई मस्त।


एस. ज़ेड. मलिक(पत्रकार)


 आज पूछता है भारत - बताइये प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और भाजपाई नेतागण एवं सम्प्रदायिक हिन्दू रक्षक संगठन आरएसएस के कार्यकर्तागण जी, ज़रा माथे पर थोड़ा बल दे कर अपने विश्व भर के हिन्दू भाईओं के बनने वाले हितैषी बताइये,एनपीआर,एनआरसी,नये क़ानून किसके लिए बनाए थे?कल दिल्ली चुनाव में भारत के मुसलमानो से पूछते थे और पाकिस्तान से हिंदुओं के जनसंख्या का हिसाब मांग रहे थे कि,70 वर्षों में हिन्दू की संख्या कैसे घट गई? अमित शाह का जवाब शायद इसका आज ईश्वर, परमेश्वर ने प्रत्यक्ष रूप से दे रहे हैं यदि समझ सकते हो तो समझो?भारत मे मुसलमान हमेशा से शांतिप्रिय रहे, चाहे भारत के किसी भी दंगे मारे गए या उनका घर उजाड़ा लेकिन किसी ने कभी किसी से बदला लेने की कोशिश नहीं कि बल्कि सरकार द्वारा आतंवादी, देशद्रोही का आरोप लगा कर कितनों ही युवाओ को जेल में बंद करके उनका जीवन बर्बाद कर दिया लेकिन किसी ने भी अपने आपको बेगुनाह कहने के अलावा किसी ने भी बदला लेने या किसी को उकसाने की कोशिश नहीं कि लेकिन भारत के कुछ ही मुट्ठी भर लोगों की मनुवादी विचारधारा, सत्ताकी हवस, घमण्ड तथा गलत नीतियों का नतीजा है जो आज हमारा देश, प्रकृतिक आपदाओं और महामारी से घिरा पड़ा कराह रहा है। चारों ओर लाशें ही लाशें बिखरी पड़ी है हर ओर चितायें ही चितायें जल रही है । क्या नहीं मानते की यह श्राप और बद्दुआ है? क्या अब भी याद नहीं है? 


क्या भारत मे 70 सालों में कभी ऐसा हुआ था कि प्रतिदिन आज 3 महीने से लगातार 100 से 200 तथा 300 और अब प्रतिदिन 1000 -1000 लाशें, दिल्ली सहिंता भारत के लगभग राज्यों के श्मशानों में जलाई जा रही हो ? 70 वर्षों की कांग्रेस सरकार के नाम पर हाय-तौबा मचाने वालों, ज़रा सोंच कर अपने आप से यह सवाल पूछो - 70 वर्षों में क्या कभी ऐसा हुआ कि किसी की लाश को उठाने कभी उसके परिजन न आये? क्या 70 वर्षों में ऐसा हुआ था कि कोरोना का डर या साजिश कहें करोड़ों लोग बेरोज़गार हो गए, 36 करोड़ बच्चे आज शिक्षा से वंचित हैं,स्कूलों को बन्द करवा दिया जाता है इसलिये की स्कूलों में बच्चों को कोरोना लग जायेगा, निजी कम्पनियों के दफ्तरों, और फैक्टरियों में ताला लगा दिया कि देश की जनता सुरक्षित रहेगी, जबकि रैलियां में भीड़ जुटाने के लिये अपनी सारी शक्ति झोंक देती है,अपने हिंदुत्व वोट बैंक की खातिर करोड़ों हिंदुओं की जान को आस्था के नाम पर कुम्भ मेला, शाही स्नान के लिये करोड़ों हिंदुओं को बनारस , काशी , प्रयागराज गंगा के तट पर चंद ब्राह्मणों और साधुओं को खुश करने के लिये भीड़ इकट्ठा कर कोरोना महामारी के मौत के मुंह में झोंक दिया । 

 

दिल्ली पर अपने कब्जे के लिये ऑक्सीज़न रोकवा दिया, दिल्ली सरकार मांगती रही और सरकार बंगाल चुनाव में व्यस्त रही,दिल्ली सरकार बन्दर की तरह इधर से उधर उछलते कूदते रही, केंद्र पर आपरोप लगाती रही केंद्र काम नहीं करने दे रहा है,जब आने हित की बात होती तो दिल्ली के मुख्यमंत्री राज्यपाल के ड्राइंग रूम में धरना पर बैठ गए थे आज दिल्ली की जनता मर रही है तो ऑक्सीज़न दिल्ली से गायब हो गया और दिल्ली का मुख्यमंत्री एक लाचार बेबस की तरह जनता से हांथी केंद्र सरकार की दुहाई दे रहा है यह हास्यस्पद नहीं तो और क्या है ऐसे भयावर महामारी में अपनी जनता के सामने लाशें उठाने या उन्हें सही इलाज के लिये असमर्थता दिखा रहे हैं ?यह कह कर पल्ला झाड़ लेना कि उस के पास कोई साधन उपलब्ध नहीं है।  


 दूसरी ओर इस दिल्ली में भाजपा समर्थित आरएसएस अन्य कट्टर हिन्दू संगठनो ने ऐसे भयावर त्रासदी में एक दूसरे का सहयोग करने व सहानुभूति देने के बजाए सोशल मीडिया पर सम्प्रदायिक विष उगल रहे हैं । क्या ऐसे लोगो को सत्ता होने का नशा है या पागल लोग संगठित हो गए इसका नशा है, ऐसे लोग तो पागल से हो गये। 

अभी अभी बंगाल में चुनाव समाप्त होते ही वहां दलित पिछड़ी जाति और मुसलमानो की महिलाओं युवतियों,बालिकाओ,के साथ जबरदस्ती दुष्कर्म, हत्या,जय श्रीराम के नारे भर कर हत्याएं और दुकाने व मकानों में घुस घुस कर लूट-पात करने लगे ऐसे और भाजपा टीएमसी पर आरोप लगा कर प्रचार कर रही है कि टीएमसी के कार्यकर्ता भाजपा के कार्यकर्ताओं के साथ हत्या और लूट-पात कर रहे है सोशल मीडिया पर खूब झूठ फैलाया जा रहा है ताकि आम जनता भ्रमित हो। ममता की सरकार इससे पहले भी तो थी उन 10 वर्षों में तो बंगाल में कभी दंगा नहीं हुआ जबकि आज फिर से जीत टीएमसी की ही हुई तो टीएमसी ही अपने बंगाल में दंगा क्यों कराएगी? 

    दूसरी ओर धरातल पर लोग आपस मे एक दूसरे का सहयोग कर रहे है परंतु सोशल मीडिया पर सम्प्रदायिक उन्माद ऐसा चल रहा है जैसे बस अब हिदुस्तान से मुसलमानो को निकाल फेका जाएगा इस स्थिति में भी लोग हिन्दू-मुसलमान करने में लगे हैं। वही कोरोना के कारण लोग एक एक दूसरे से डरने लगे । 

सत्ताधारी पार्टी तथा अन्य राजनीतिक पार्टियां बिहार बंगाल आसाम, तामिलनाडु, केरल, के चुनाव प्रचार में धड़ल्ले से चुनावी रैलियां सभायें करते रहे जन्हें किसी को कोरोना ने नहीं पकड़ा न उनमे से किसी के आहत होने की कोई सूचना ही मिल रही है ।


 यह कैसी महामारी है कि व्यक्ति अस्पताल में जाता है इलाज चलता है और 5 दिन के बाद पता चलता है कि उसकी मौत हो गई ?यह कैसा कोरोना है कि व्यक्ति अस्पताल में मर रहा है वैक्सीन लगाने के बार मर रहा है। एक ही एक ही व्यक्ति दो बार टेस्ट कराता तो उसे एक बार उसे नेगेटिव निकल जाता है और दूसरी बार पोजेटिव निकल जाता है यह कैसी व्यावस्था या टेस्ट टेक्निकी है?

अब पूछता है भारत ?अब ऐसी दयनीय स्थिति को कौन संभालेगा? अब भी तो कम से कम भारत को बक्श दो, अब भी तो कम से कम भारत रहने वालों को भारतीय इंसान बना रहने दो अभी भी समय है मोदिशाह और योगी जी कम से कम अब तो नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दो।

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