बिहार सरकार खुदाबक्श लाइब्रेरी को डेमोलेशन आदेश वापस ले - डॉ0 सुभान (पूर्व सीएसआईआर) एस. जेड.मलिक(पत्रकार) नई दिल्ली - विगत दिनों बिहार सरकार ने बिहार का प्राचीन खुदाबक्श उर्दू लाइब्रेरी का डेमोलेशन का आदेश जारी कर भारत बुद्धिजीवी शिक्षित मुस्लिम समाज को असमंजस डाल दिया। इस संदर्भ भारत सरकार के पूर्व भारतीय कृषिशोधक एवं संरक्षक एमडीएस डॉ0 सुभान खान खान ने कड़ा एतराज जताते हुए बिहार सरकार से लाइब्रेरी डेमोलेशन आदेश को रद करने की मांग की है। उन्होंने बिहार सरकार याद दिलाते हुए कहा है की प्राचीन लाइब्रेरी बिहार ही नहीं बल्कि भारत के उर्दू बिद्धिजीविओं शिक्षित पूर्वजो की यादें तथा नई नस्लों के लिये प्रेरणास्त्रोत धरोहर है। तथा पटना का खुदाबक्श उर्दू लाइब्रेरी विशेष कर बिहार के संस्कृति सभ्यता का एक प्रतीक है, बिहार की विशेष पहचान है। इस लिये सरकार अविलंब इस आदेश को रद कर । श्री सुभान ने भारत के सभी मुस्लिम शिक्षित बुद्धिजीविओं से आग्रह किया है कि बिहार सरकार के इस मनुवादी सम्प्रदायिक रवैये का विरोध करें सरकार द्वारा आदेश को रद करने के लिए आगे आयें।



 

 बिहार सरकार खुदाबक्श लाइब्रेरी का डेमोलेशन आदेश वापस ले - डॉ0 सुभान (पूर्व सीएसआईआर) 


एस. जेड.मलिक(पत्रकार)


नई दिल्ली - विगत दिनों बिहार सरकार ने बिहार का प्राचीन खुदाबक्श उर्दू लाइब्रेरी का डेमोलेशन का आदेश जारी कर भारत बुद्धिजीवी शिक्षित मुस्लिम समाज को असमंजस डाल दिया। इस संदर्भ भारत सरकार के पूर्व भारतीय कृषिशोधक एवं संरक्षक एमडीएस डॉ0 सुभान खान खान ने कड़ा एतराज जताते हुए बिहार सरकार से लाइब्रेरी डेमोलेशन आदेश को रद करने की मांग की है। उन्होंने बिहार सरकार याद दिलाते हुए कहा है की प्राचीन लाइब्रेरी बिहार ही नहीं बल्कि भारत के उर्दू बिद्धिजीविओं शिक्षित पूर्वजो  की यादें तथा नई नस्लों के लिये प्रेरणास्त्रोत धरोहर है। तथा पटना का खुदाबक्श उर्दू लाइब्रेरी विशेष कर बिहार के संस्कृति सभ्यता का एक प्रतीक है, बिहार की विशेष पहचान है। इस लिये सरकार  अविलंब इस आदेश को रद कर । 

श्री सुभान ने भारत के सभी मुस्लिम शिक्षित बुद्धिजीविओं से आग्रह किया है कि बिहार सरकार के इस मनुवादी सम्प्रदायिक रवैये का विरोध करें सरकार द्वारा आदेश को रद करने के लिए आगे आयें।1891 में जब इसे खोला गया था तब खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी अपनी तरह की ऐसी पहली लाइब्रेरी थी जिसमें आम लोग जा सकते थे. करीब 12 साल बाद भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन पटना में गंगा किनारे स्थित इस लाइब्रेरी का दौरा करने पहुंचे तो इसमें संग्रहित पांडुलिपियों को देखकर इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने इसके विकास के लिए धन उपलब्ध कराया. आभार जताने के लिए लाइब्रेरी की तरफ से 1905 में कर्जन रीडिंग हॉल की स्थापना की गई.

तब से यह रीडिंग हॉल हमेशा चहल-पहल भरा रहा है, जहां आकर दुनियाभर के छात्र, विद्वान और शोधकर्ता अपने कैरियर को नया आयाम देने की कोशिश करते हैं.

लेकिन आज जब नई सड़कों और फ्लाईओवर के साथ पटना की तस्वीर बदल रही है, यदि एक एलिवेटेड रोड के निर्माण संबंधी बिहार पुल निर्माण निगम (पुल निर्माण निगम) के प्रस्ताव को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने मंजूरी दे दी तो इस रीडिंग हॉल और लाइब्रेरी के कुछ अन्य हिस्सों का अस्तित्व खत्म हो सकता है.प्रस्तावित नए एलिवेटेड कॉरिडोर को ऐतिहासिक गांधी मैदान के पास स्थित करगिल चौक को एनआईटी पटना और अंतत: गंगा नदी के तट के साथ बनने वाले 24 किलोमीटर लंबे महत्वाकांक्षी चार-लेन मार्ग से जोड़े जाने की योजना है।लाइब्रेरी के पदेन अध्यक्ष बिहार के राज्यपाल हैं.

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