क़ुरआन तो क्या, किसी भी धार्मिक किताब में संशोधन करना सुप्रीम कोर्ट के इख्त़ीयार में नहीं है - मुस्तकीम मंसूरी

 बरेली 16 मार्च ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस के राष्ट्रीय महासचिव मुस्तकीम मंसूरी ने आज पार्टी की ओर से जारी एक बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश के एक ख़रजी व्यक्ति वसीम रिजवी को सपा सरकार में आजम खान की ख्वाहिश पर अखिलेश यादव द्वारा शिया वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनाकर जो ताकत सपा सरकार में बख्शी गई थी। उस के दम पर ही वसीम रिजवी ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर करके कुरान मजीद से 26 आयतों को बाद में जोड़ी हुई, बता कर हटाने की मांग की है। जिसको लेकर देशभर के मुस्लिम समुदाय में नाराजगी और गुस्सा देखा जा रहा है। इस पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मुस्तकीम मंसूरी ने सवाल करते हुए कहा क्या कुराआन में संशोधन किसी कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है? उन्होंने कहा इसका जवाब है नहीं।

मुस्तकीम मंसूरी ने कहा क़ुरआन तो क्या, किसी भी धार्मिक किताब में संशोधन करना सुप्रीम कोर्ट के इख्त़ीयार में नहीं है। उन्होंने कहा सब जान लें हमारे संविधान के अनुच्छेद 13 के तहत कोर्ट को जो जुडिशल रिव्यु के अधिकार मिले हैं। उनमें किसी भी धर्म के धार्मिक प्रावधानों को रद्द करने का अधिकार शामिल नहीं है। इसलिए 26 तो क्या एक आयत भी मनसुख़ नहीं हो सकती। उन्होंने कहा दोबारा कहता हूं किसी भी मज़हबी किताब के बारे में फैसला करने का इख्त़ियार किसी भी अदालत को नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो कल ही से किसी अन्य धर्म के ग्रंथों के प्रावधान हटाने की याचिकाएं दाखिल होनी शुरू होंगी तो क्या कोर्ट यही काम करता रहेगा?

मुस्तकीम मंसूरी ने कहा आपकी जानकारी के लिए बता दें, हिंदू धर्म ग्रंथ (मनुस्मृति) में शूद्रों के बारे में जो कुछ लिखा है, उस पर दलित समुदाय को आपत्ति है। संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने मनुस्मृति की प्रतियां जलाई थी। लेकिन वह भी संविधान का सहारा लेकर संशोधन नहीं करवा पाए। और मनुस्मृति आज भी ज्यों की त्यों है

मुस्तकीम मंसूरी ने कहा वसीम रिजवी ने कुरान पाक की 26आयतों पर पाबंदी लगाने के लिए जो याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। उसे चांदमल चोपड़ा बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल मामले में कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले (Citation,1988 CriLJ739) की रोशनी में भी खारिज किया जाना चाहिए, इस फैसले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कई फैसलों को आधार बनाते हुए कहा कि जिन धार्मिक किताबों पर आवाम की आस्था जुड़ी हो, उनको धर्मनिरपेक्ष राज्य में चुनौती नहीं दी जा सकती।

मुस्तकीम मंसूरी ने कहा यक़ीन जानिए यह रिट सुप्रीम कोर्ट में खारिज होगी। सुप्रीम कोर्ट इसमें हस्तक्षेप इसलिए नहीं कर सकता क्योंकि क़ुरआन  का नुस्ख़ा सर्व सम्मत है, दुनिया का हर मुसलमान, चाहे वह किसी भी मसलक का हो, यह मानता है की यह किताब हूबहू वही है, जो अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) पर नाजिल हुई है।----इसलिए सबसे बेहतर काम यह है की वसीम रिजवी नामक इस खारजी पर देश के हर शहर में मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं आहत करने का मुकदमा किया जाए। जब सैकड़ों शहरों से इसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकलेंगे तब 

यकीन जानिए उसकी मदद करने वाले वह लोग भी नहीं आएंगे जिनका वह मोहरा है। और पिछले कई वर्षों से ऐसी हरकतें कर रहा है।

मुस्तकीम मंसूरी ने कहा उसका पूरे देश में सोशल बायकाट किया जाए। सभी मसलको के उलमा इस बात का ऐलान करें की वसीम रिजवी इस्लाम से निष्कासित व्यक्ति है और उसे इस्लाम से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बात करने का कोई हक हासिल नहीं है।


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