यह जुल्म के खिलाफ एक आवाज़ है।



 यह जुल्म के खिलाफ एक आवाज़ है।

............ अब्बास मुग़ल की रिपोर्ट #

किसान_आंदोलन  दौरान 22 दिनों में 22 किसान मौत के शिकार हो चु के हैं। दिल्ली की सत्ता में बैठे अहंकारी शासक अहंकार से नीचे उतरकर खेत-खलिहान व किसान की आह कब सुनेंगे?

मोदीजी व खट्टर सरकार क्यों इतनी निर्दयी व निष्ठुर बन चुकी है? क्यों उन्हें किसान की कर्राह व पीड़ा दिखाई व सुनाई नहीं दे रही? मोदीजी राजहठ को छोड़कर राष्ट्रधर्म क्यों नहीं निभा रहे?

  किसान विरोधी 3 काले कानूनों को निरस्त कर किसान के घावों पर मरहम लगाने का काम करें!

कृषि कानून के खिलाफ़ आत्महत्या, आंदोलन का प्रतिरोध के उच्चतम स्तर पर पहुंचने का प्रतीक है.

"यह जुल्म के खिलाफ एक आवाज़ है" - सुसाइड नोट में ये लिखा छोड़कर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में 65 वर्षीय संत बाबा राम सिंह ने खुदकुशी कर ली है।

वे गुरुद्वारा साहिब नानकसर के संत थे। उनके अनुयाइयों की तादाद लाखों में बताई जा रही है। राम सिंह ने गोली मारकर आत्महत्या की है और उन्होंने पंजाबी भाषा में एक सुसाइड नोट छोड़ा है। इसमें उन्होंने लिखा है - "यह जुल्म के खिलाफ एक आवाज है।"

बाबा राम सिंह ने सुसाइड नोट में लिखा है कि किसानों का दुख देखा, वो अपने हक लेने के लिए सड़कों पर हैं। बहुत दिल दुखा है। सरकार न्याय नहीं दे रही। जुल्म है, जुल्म करना पाप है,जुल्म सहना भी पाप है। वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धरना स्थल पर कई किसान मौजूद थे। इसी दौरान बाबा रामसिंह ने आंदोलन में बलिदान देने की बातें करते हुए अन्य किसानों को स्टेज पर भेज दिया। उसके बाद खुद को अपने वाहन में जाकर गोली मार ली। गोली मारने का पता लगते ही उन्हें घायल अवस्था में पानीपत के निजी अस्पताल में ले जाया गया। जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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