सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अमीष देवगन की सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के मामले में दर्ज एफआईआर निरस्त करने से इनकार कर दिया है।

बाबरी मस्जिद की शहादत दिवस 6 दिसंबर पर कोटा में एसडीपीआई ने किया प्रदर्शन नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अमीष देवगन की सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के मामले में दर्ज एफआईआर निरस्त करने से इनकार कर दिया है।


हालांकि कोर्ट ने अमीष देवगन की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने देवगन के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को अजमेर ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।
पिछले 25 सितम्बर को जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले 26 जून को कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए देवगन की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने देवगन के वकील सिद्धार्थ लूथरा को निर्देश दिया था कि वो इस मामले में एफआईआर के सभी शिकायतकर्ताओं को पक्षकार बनाएं। लूथरा ने कोर्ट में कहा था कि देवगन से अनजाने में गलती हो गई है, जिसके लिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने कहा था कि अमीष देवगन के खिलाफ राजस्थान, महाराष्ट्र और तेलंगाना में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। देवगन के परिवार वालों को भी धमकी दी जा रही है। महाराष्ट्र में दर्ज एफआईआर के दो शिकायतकर्ताओं की ओर से वकील रिजवान मर्चेंट ने कहा था कि देवगन ने अपने प्रोग्राम में कई बार लुटेरे चिश्ती शब्द का प्रयोग किया।  

अमीष देवगन ने अपने 15 जून के टीवी शो में लुटेरे चिश्ती के नाम से एक कार्यक्रम प्रसारित किया था। उस कार्यक्रम से मुस्लिम समुदाय के लोग काफी आक्रोशित हो गए। उस शो में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती को आक्रामक और लुटेरा कहा गया था। इस शो के खिलाफ मुंबई में रजा एकेडमी नामक संस्था ने देवगन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। मुंबई के अलावा नांदेड़ पुलिस ने भी देवगन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की हुई है।वकील मृणाल भारती और विवेक जैन की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि देवगन के खिलाफ दर्ज एफआईआर पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। याचिका में कहा गया था कि ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के बारे में गलती से लुटेरा कहा गया। इसमें देवगन का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। उस कार्यक्रम के बाद देवगन ने अपनी गलती के लिए माफी मांगते हुए ट्वीट भी किया था। याचिका में दोनों एफआईआर को दिल्ली में ट्रांसफर कर जांच करने की मांग की गई थी।

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