जवान फ़िल्म एक लम्बे अरसे के बाद देश की वास्तविक हकीकत पर बनी फ़िल्म है। मोमना बेगम

 बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए नई दिल्ली से रूबी न्यूटन की रिपोर्ट,

नई दिल्ली, समाज सेविका मोमना बेगम पत्रकार की नज़र में फ़िल्म जवान एक लंबे अरसे के बाद बनी सामाजिक दायित्व के प्रति जागरूकता का संदेश देने वाली एक अच्छी फ़िल्म है।समाज सेविका मोमना बेगम पत्रकार ने कहा कि फ़िल्में समाज का आईना होती है। लेकिन मनोरंजन के साथ ज़िम्मेदारी भरा संदेश देती फ़िल्म जवान सही    मायनों में देश की जनता में जागरूकता लाने का एक आवाहन है। 


जवान फ़िल्म एक लंबे अरसे के बाद देश की वास्तविक हकीकत पर बनी फ़िल्म है। सिनेमा समय-समय पर किस तरह अपना सामाजिक दायित्व निभा कर अपनी उपयोगिता सिद्ध करके, देश को आगे ले जा सकता है, जवान उसका एक उदाहरण है। इसमें विभिन्न समस्याओं  से जूझ रहे आम नागरिकों के मुद्दे हैं। मात्र तीन घंटे में इतने सारे वाक्ये, शानदार स्क्रिप्ट और जुड़ाव। इसमें किसानों की आत्महत्या, किसानों का कर्जदार होना, एवं सरकारी अस्पतालों के हालात, मिलिट्री में भ्रष्टाचार, पूंजीवादी व्यवस्था में आम जनता और प्रकृति के नुकसान आदि के खिलाफ एक बुलंद आवाज़ उठाई गई है। अंत में देश के नागरिकों से सोच समझकर वोट डालने का यानी उंगली का सही उपयोग करने का कहा गया है।

फ़िल्म का बेस्ट डायलाग है,"हम जवान हैं,अपनी जान हजार बार दांव पर लगा सकते हैं,लेकिन सिर्फ देश के लिए, तुम्हारे जैसे देश बेचने वालों के लिए नहीं। 

कुल मिलाकर "जवान" फ़िल्म देश की सबसे बड़ी हिट फिल्म साबित होने वाली है। देखे बगैर न रहें । शुभकामनाएं ।।

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