" शुभ करवाचौथ "*

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             *" शुभ करवाचौथ "* 

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               करवा चौथ व्रत का पावन पर्व  भारतीय नारी के समर्पण, सहजता, त्याग, महानता एवं पति परायणता को व्यक्त करता है। दिन भर स्वयं भूखा प्यासा रहकर रात्रि को जब मांगने का अवसर आया तो अपने पति देव के मंगलमय, सुखमय और दीर्घायु जीवन की ही याचना करना यह नारी का त्याग और समर्पण नही तो और क्या है ? एक नारी के त्याग और परिवार के प्रति समर्पण के भाव को इसी बात से देखा जा सकता है कि उसे जब भी और जहाँ भी माँगने का अवसर मिला उसने कभी भी अपने लिए कुछ न माँगकर अपने पति के लिए, अपनी संतति के लिए अथवा अपने पूरे परिवार के लिए ही कुछ याचना की है। वो भगवान से भी माँगेगी तो केवल अपने परिवार के लिए ही कोई माँग करेगी। इस व्रत का संदेश यह है कि नारी अपने पति की प्रसन्नता के लिए, उनके हर विघ्न के निवारण की कामना के लिए इस हद तक जा सकती है कि पूरे दिन अन्न- जल का त्याग कर सकती है।  करवा चौथ नारी के लिए एक व्रत है और पुरुष के लिए एक शर्त। शर्त केवल इतनी कि जो नारी आपके लिए इतना कष्ट सहती है उसे कष्ट न दिया जाए। जो नारी आपके लिए समर्पित है उसको और संतप्त न किया जाए। जो नारी प्राणों से बढ़कर आपका सम्मान करती है जीवन भर उसके सम्मान की रक्षा का प्रण आप भी लो। उसे उपहार नहीं आपका प्यार चाहिए।


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