आला हजरत फाजिल ए बरेलवी के 104 वे उर्स के कुल की रस्म में आला हजरत के लाखों दीवानों के उमड़े जन सैलाब के बीच कुल की रस्म के बाद मुल्क में अमन ओ अमान, मुल्क की तरक्की और भाईचारे दुआएं की गई|

बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए बरेली से मुस्तकीम मंसूरी की रिपोर्ट, 

देश विदेश से आए लाखों की तादात में आला हजरत के दीवानों ने बड़े अदब ओ  एतराम के साथ बरेली पहुंच कर कुल में की शिरकत|



बरेली, आला हजरत फाजिल ए बरेलवी के 104 वें उर्स ए रजवी का कुल की रस्म के साथ समापन, मुल्क में तरक्की, अमनो-अमान, और आपसी भाईचारे के लिए तुसी दुआएं की गई| उर्स ए रजवी में शिरकत करने आए देश विदेश  के उलेमाओं ने  अपनी तकरीर में मुस्लिमों से अपने बच्चों और बच्चियों की तालीम पर ध्यान देने के साथ थी

दीनी और दुनियावी तालीम हासिल करने पर जोर दिया, उन्होंने अपनी तकरीर में मुसलमानों में फैली सामाजिक बुराई खासतौर से शादियों की फिजूलखर्ची, दहेज के बढ़ते चलन, और दहेज की नुमाइश को बड़ी सामाजिक बुराई बताते हुए कहा इस तरह के प्रचलन को रोकने के लिए खानकाही लोगों और समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को आगे आना होगा तभी इन सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लगाया जा सकता है| उसके आखिरी दिन अकीदत मन्दों के उमड़े जन सैलाब के साथ पूरा शहर आला हजरत के दीवानों से भरा नजर आ रहा था, दरगाह आला हजरत से लेकर इस्लामिया ग्राउंड तक और शहर के चारों तरफ उर्स में उमड़ी लाखों की भीड़ का आलम यह था इस्लामिया ग्राउंड के चारों तरफ जरा भर भी पैर रखने की जगह नहीं मिल रही थी, देश विदेश से पहुंचे आला हजरत के दीवानों कि आला हजरत के लिए दीवानगी साफ दिखाई दे रही थी, दोपहर बाद नमाजे जुमा 2:38 पर कुल शरीफ की फातिहा के बाद उर्स का समापन हुआ, इस दौरान आला हजरत जिंदाबाद मसलक ए आला हजरत जिंदाबाद के नारों से पूरा शहर गूंज उठा आज आला हजरत के दीवानों की दीवानगी का आलम यह था लाखों की तादात में नौजवान बुजुर्ग और बच्चे सर पर टोपी या लगाए हर सिम्त नजर आ रहे थे| आपको बताते चलें पिछले दो और करो ना कॉल की वजह से नहीं हो पाए थे और इस बार उसका ऐलान होने के बाद आला हजरत के दीवानों का किस तरह जनसैलाब उमड़ेगा इसका अंदाजा शायद शासन और प्रशासन को भी नहीं होगा| उर्स के तीनों दिन आला हजरत के दीवानों का जनसैलाब पूरे शहर में जिधर देखो उधर नजर आता था| कुल के वक्त कुछ इस तरह का मंजर देखने को मिला कि इस्लामिया ग्राउंड के चारों तरफ जो जहां खड़ा था वहीं रुक गया जो जहाज ऐसा खड़ा था वहीं खड़े होकर दोनों हाथ उठाकर दुआएं मांग रहा था पूरे शहर में कुल के दौरान जो जहां था वहीं से देश दुनिया और मुल्क में अमनो-अमन की दुआएं मांग रहा था| गौरतलब है कुल की रस्म के वक्त दरगाह आला हजरत इस्लामिया ग्राउंड मथुरापुर के मदरसा जामियातुर्रजा़ में  उमड़ा हुजूम का आलम यह था कि भीड़ चीरे नहीं चीर रही थी, जैसे ही पुल की फतेहा शुरू हुई, मानो उस वक्त पूरा शहर थम गया हो, इस्लामिया ग्राउंड में कुल की सभी रचनाएं दरगाह प्रमुख सुबहान रजा खान सुभानी मियां की सरपरस्ती में सज्जादा नशीन एहसन मियां की सदारत और सैयद आसिफ मियां व उर्स प्रभारी राशिद अली खान की देखरेख और मथुरापुर स्थित  जामियातुर्रजा़ में असजद मियां की सरपरस्ती और सलमान मियां की सदारत में कुल की रस्में अदा कि गयी, इससे पहले उर्स के तीसरे दिन का आग़ाज़ सुबह तिलावते कुरान ए पाक से हुआ, जामियातुर्रजा़ में भी देश विदेश से आए उलमाओं सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ने के लिए दीनी और दुनियावीं इल्म को हासिल करने पर ज़ोर दिया| कुल की रस्म के साथ ही उर्स का समापन हो गया, उर्स के समापन के बाद भीड़ को संभालने में पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत करना पड़ी| क्योंकि उसके समापन के बाद पूरे शहर में चारों तरफ जाम हो चुका था रेलवे स्टेशन रोडवेज के साथ ही शहर की हर सड़क पर इन्हीं भीड़ नजर आ रही थी| उसकी व्यवस्था की देखरेख में राशिद खान, मौलाना जाहिद रजा़, मीडिया प्रभारी नासिर कुरेशी, औरंगजेब नूरी, परवेज नूरी, खलील कादरी, शान राजा, अजमल नूरी सहित टीटीएस वॉलिंटियर सहित सैकड़ों लोग लगे रहे|

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