वर्तमान में इमाम हुसैन की तालीमत, किरदार ,धैर्य हमारे लिए बहुत अहम

(मोहर्रम पर मोहम्मद इरशाद रजवी पत्रकार का विशेष लेख) वैसे तो वाक्याते कर्बला को गुजरे 14 सौ वर्ष से ज्यादा का समय बीत गया मगर दुनिया में सबसे ज्यादा अगर किसी तारीखी  वाक्यात का जिक्र होता है तो वह कर्बला का है विभिन्न समयों में विभिन्न वाकयात हुए उनका जिक्र नहीं  केवल तारीखों में ही सिमट कर रह गया मगर कर्बला का वाकया कल भी जिंदा था और आज भी जिंदा है

ऐसा क्यों आपने सोचा इस पर रिसर्च की इसी पर आज हम कुछ संक्षिप्त जानकारी देने की कोशिश करेंगे हजरत इमाम हुसैन रज़ी अल्लाह ताला अन एक ऐसी शख्सियत हैं जिनके बारे में ज्यादा परिचय देने की किसी को आवश्यकता नहीं है पूरा जहान अच्छी तरह जानता है वह कौन है क्या है क्या थे हमारे लिए जरूरी है उनकी शिक्षा उनके किरदार उनके अमल उनके धैर्य (सब्र) पर जाना जाए मेरे इमाम ने सब्र ऐसा किया जिसकी पूरी दुनिया में कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती और कयामत तक ऐसा देखना भी असंभव है जिस हुसैन ने शराबी , कबाबी, जालिमो ओ जबर नमरूद की बैत सिर्फ इसलिए कबूल नहीं की मुझे बादशाहत मिल जाए बल्कि उम्मते मुस्लिमा को बचाने अपने नाना के दीन के तहफ्फुज  के लिए हक परस्ती के लिए अपना पूरा घर कुर्बान कर दिया ताकि दुनिया के समक्ष असल दीन उसका असल किरदार उसकी असल तालीमात पहुंच सके इसलिए मेरे हुसैन ने ऐसा करके सब कुछ बचा लिया अपनी शहादत के खून से पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि सत्य के मार्ग में चाहे जितनी भी कठिनाईया आए उनको हंसते हुए सब्र करते हुए सह लेना चाहे जान माल कुर्बान करना पड़े मगर अल्लाह और उसके प्यारे रसूल का जो सत्य का मार्ग है उस पर डटे रहना वही आपकी जिंदगी की अहम कामयाबी है समय-समय पर इस्लाम दुश्मन ताकतें दुनिया में जन्म लेंगी उन से मुकाबला करने के लिए हमें हुसैनी किरदार काफी है मेरे ईमाम की तालीम साफ इशारा कर रही है नमाज ना छोड़ी जाए चाहे तलवारों के साए में हो झूठ और झूठे मक्कार ओ जालिम ताकतबारो के आगे कतई ना झुका जाए चाहे कुर्बान होना पड़े अपने बच्चों को हमेशा सब्र की तलकीन करें बेपर्दा ना  घुमाएं  और विधवाओं, यतीमों,मिस्कीनो, गरीबों का सहारा बने सत्य के मार्ग पर रहे हैं और दूसरों को प्रेरित करें यही हुसैनी मिशन है यही उनकी असल तालीम है किरदार है हमें ईमाम की तालीम पर अमल करना चाहिए ना कि मातम क्योकि मेरे इमाम ने शहादत नोस फरमाई है नाकी मौत कुरान साफ साफ़ कह रहा है जो अल्लाह की राह में शहीद हुए उनको मुर्दा न कहो बल्कि वह जिंदा है तुम्हें उनकी जिंदगी का सऊर नहीं इसलिए मातम केसा ईमाम ने इस्लाम की फलाहो  बह बुद के लिए काम किया है जो इस्लाम के लिए गर्व की बात है हुसैन कल भी जिंदा थे और आज भी जिंदा है

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