उत्तर प्रदेश हज कमेटी के चेयरमैन मोहसिन रजा से एआईएमआईएम की प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट नजमा फातिमा ने मुलाकात कर हज को जाने वाले हाजियों को पेश आने वाली समस्याओं से अवगत कराते हुए एक ज्ञापन दिया,

 बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए मुस्तकीम मंसूरी की रिपोर्ट, 

हाजियों का जहाज जब उड़ जाता है, और हाजी सऊदी पहुंच जाते हैं, हज भी कर लेते हैं, लेकिन हज कमेटी के लोग उनकी खैरियत तक नहीं पूछते, नजमा फातिमा

लखनऊ, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट नजमा फातिमा ने आज उत्तर प्रदेश हज कमिटी के चेयरमैन मोहसिन रजा से मुलाकात कर हाजियों को होने वाली दिक्कतों से अवगत कराते हुए एक ज्ञापन हज कमेटी के चेयरमैन मोहसिन रजा को दिया|


मजलिस की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष नजमा फातिमा ने मजलिस की ओर से हज कमेटी के अंदर सुधार की जरूरतों से अवगत कराते हुए कहा की सबसे पहले देखा जाए तो हज कमेटी  सिर्फ नाम के लिए है, और जो भी हाजी हैं, उनसे वह मोटी रकम वसूलते हैं, लेकिन बदले में जो उनको सुविधाएं दी जानी चाहिए उनमें वह रत्ती भर भी हाजियों की कोई मदद नहीं करते हैं| प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट नजमा फातिमा ने कहा जब हाजी दिल्ली तक पहुंचते हैं| तो उनको एक कप चाय पिला दी जाती है| और जब जहाज उड़ जाता है, और हाजी सऊदी पहुंच जाते हैं, हज भी कर लेते हैं, लेकिन हज कमेटी के लोग उनकी खैरियत तक नहीं पूछते और ना ही उनसे कोई राफ्ता कायम करते और ना ही उन्हें यह फ़िक्र रहती है, की हाजी सही सलामत पहुंच गए या नहीं हज पर जाने वाले हाजियों को कोई परेशानी तो रास्ते में नहीं हुई , उन्होंने कहा बात यह है कि जो भी हाजी यहां से जाते हैं, तो हज कमेटी हाजियों को दवाई तक नहीं देती है| नजमा फातिमा ने कहा हाजियों के साथ में मोअल्लिम अप्वॉइंट किए जाते हैं, जो उनको रहने में, खाने में, दवाइयों में, मेडिकल के मामलों में, घूमने चलने में, और आने जाने में, पासपोर्ट फैसिलिटी में, हाजीयों के साथ होते हैं, नगमा फातिमा ने कहा क्योंकि हाजियों को अरबी नहीं आती क्योंकि ज्यादातर हाजी देहात क्षेत्रों से जाते हैं, तो उनको इतनी मालूमात भी नहीं होती है, तो यह लोग अपना आदमी साथ छोड़ देते हैं| जो एक दिन या 2 दिन के बाद  जाकर पूछ लेता है| लेकिन उनकी जो मदद होनी चाहिए वह नहीं हो पाती है| नजमा फातिमा ने कहा जब हाजी मदीने जाते हैं| तो वहां पर कोई भी बताने वाला यह नहीं होता है कि क्या अरकान जरूरी है, इसलिए अनजाने में उन पर जुर्माना भी पड़ जाता है| मदीने में जो हज के अरकान है उसके अंदर यह मुस्तनद सुन्नत है| और वाजिब है कि आप कम से कम वहां पर 40 नमाजे अदा करें, मस्जिद-ए-नबवी मे बजमात हज कमेटी हाजियों को 7 दिन में ही लेकर वापस आते हैं| क्योंकि यह लोग होटल में ठहरते हैं, उससे इनके किराए के ऊपर फर्क पड़ता है| तो यह उनको वापस लेकर आ जाते हैं| ताकि इनका जो है खर्चा उनका कम से कम हो यह हमसे तो पहले ले लिया जाता है| बल्कि होना यह चाहिए कि मदीने में मस्जिद-ए-नबवी जाकर 40 नमाजे बा जमात पढ़ें तो उसके लिए कम से कम 10 दिन हो वह लोग अपनी नमाज आराम से पूरी पढ़ सकें, सऊदी अरब का यह कानून है कि जो भी वहां पर मकान किराए पर लेगा वह उसका एग्रीमेंट साल भर के लिए करेंगे| अब उसका सबसे बड़ा नुकसान हाजियों को होता है| क्योंकि जब वह जाते हैं तो उसका किराया पहले ही ले लिया जाता है| हाजी मुश्किल से 40 दिन उस होटल में ठहरते हैं| लेकिन किराया उनसे साल भर का लिया जाता है| तो आप 40 दिन की जगह आप 7 दिन का ले लो 2 महीने का किराया ले लो क्यों आप पूरे साल भर का किराया ले रहे हैं| और मुसलमानों को परेशान कर रहे हैं| मजलिस की प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट नजमा फातिमा ने कहा सबसे अहम बात इंडियन एंबेसी हाजियों की कोई मदद करने के लिए तैयार नहीं होती हाजियों को तो छोड़िए जो लोग इंडिया के वहां रह रहे हैं, उनकी कोई मदद एंबेसी नहीं करती, हाजियों को जो बसे दी जाती है यात्रा के लिए मक्का मदीना में वह अच्छी कंडीशन में नहीं होती हैं| पुरानी खराब बसों से यात्रा कराई जाती है| जिनमें सुधार की जरूरत है| वही हाजियों से कहा जाता है उनको ख़ेमे दिए जाएंगे वह तो दिए नहीं जाते हैं, या बहुत ऊंची पहाड़ियों पर दिए जाते हैं, ऐसे मैं उम्र दराज हाजियों को आने जाने में बहुत दिक्कत होती है| एडवोकेट नजमा फातिमा ने हज कमेटी के चेयरमैन मोहसिन रजा से हज के दौरान पेश आने वाली हाजियों की दिक्कतों को जल्द दूर करने की मांग की है|

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