कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अजय टम्टा द्वारा खाली हो रही तीसरी सीट के लिए, राज्यसभा का रण जीतने को जुलाई वाली जंग अभी से भाजपा के भीतर अंदर ही अंदर छिड़ी हुई है|

 बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए उत्तराखंड से मुस्तकीम मंसूरी की रिपोर्ट, 

देहरादून, कांग्रेस के राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा का चार जुलाई को संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा का कार्यकाल पूरा हो रहा है| उत्तराखंड राज्य के कोटे की तीन में से दो राज्यसभा सीटों पर अनिल बलूनी और नरेश बंसल के रूप में भाजपा के सांसद हैं| और 47 सीटों के साथ सत्ता में लौटी भाजपा को कांग्रेस सांसद प्रदीप टम्टा द्वारा खाली की जा रही राज्यसभा की तीसरी सीट भी मिलेगी|

लिहाजा राज्यसभा का रण जीतने को जुलाई वाली जंग अभी से भाजपा के भीतर अंदर ही अंदर छिड़ी हुई है| गौरतलब है भाजपा में तीन- चार स्वाभाविक दावेदार दिख रहे हैं| परंतु सबसे बड़े दावेदार तो पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ही है| जब से सरकार से मुख्यमंत्री पद से विदा हुए हैं| तब से ना संगठन में कोई रोल मिला है, और ना ही कोई उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है| गौरतलब है एक दौर में यूपी के सह प्रभारी रहते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत आज दिल्ली दरबार में भले ही कमजोर मान लिए गए हो, लेकिन लखनऊ के पावर सेंटर में उनके कांटे का किरदार और कोई नहीं है| आपको बताते चलें खाली वक्त में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ तीन दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर आए तो प्रदेश भाजपाईयों को दिखा दिया, कि भाजपाई भविष्य के सबसे जोरदार चमकते सितारे के सबसे करीबी वही है| कम से कम प्रदेश से तो कोई वाकई दिख भी नहीं रहा है| सूत्रों की माने तो पार्टी के बैक रूम बॉय के तौर पर सांगठनिक दाॅव पेंच और व्यूहरचना के  विशेषज्ञ ज्योति प्रसाद गैरोला का नाम भी राज्यसभा के रण में उभर कर सामने आ रहा है| वरिष्ठ भाजपा नेता गौरेला पर्दे के पीछे रहकर पार्टी के रणनीतिकार की अहम भूमिका में रहते हैं| त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के आखिरी दौर में कैबिनेट मंत्री के रूप में दायित्व भी मिला था| परंतु बड़े नेताओं की गणेश परिक्रमा में अधिक विश्वास नहीं करते हैं| अब इसके उनके अपने फायदे हैं, तो कई बार सियासी घाटे का रिस्क भी रहता है|

तीसरे स्वभाविक चेहरे के तौर पर चंपावत से निवर्तमान विधायक कैलाश  गहतोड़ी हैं| गहतोड़ी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए सबसे पहले ना केवल सीट छोड़ने का ऐलान किया बल्कि सीएम को सीट ऑफर करने वाले 22 विधायकों में जीत के लिहाज से सबसे विश्वसनीय भी बनकर उभरे हैं| अकेले सीएम ने ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर संगठन ने भी पाया कि चंपावत सीट पुष्कर सिंह धामी के लिए सबसे मुफीद साबित होगी| इस तरह स्वभाविक है कि अगर मुख्यमंत्री और पार्टी संगठन के पास कुछ आफर करने को होगा, तो सबसे पहले कैलाश गहतोड़ी को ही मौका दिया जाएगा|

आपको बताते चलें जैसे कांग्रेस ने निर्मला गहतोड़ी को टिकट देकर राजनीति में महिला सशक्तिकरण को लेकर अपना धर्म निभा दिया, अब उसी तर्ज पर भाजपा की ओर से भी राज्यसभा सीट के लिए पैनल में कुछ महिलाओं के नाम दिल्ली भेजेगी| जिसमें भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव दीप्ति रावत भारद्वाज और अनुसूचित जाति आयोग की पूर्व सदस्य स्वराज विद्वान के साथ एकाध नाम और जोड़ कर भेजा जाएगा| आपको बताते चलें यह बात अलग है, की किसी बड़े चेहरे का नाम काटने की रणनीति के तहत किसी महिला की लॉटरी लग जाए| अन्यथा किसी  कद्दावर पुरुष नेता को ही मौका मिलने की संभावना अधिक है| अब देखना दिलचस्प यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को संसद के ऊपरी सदन भेजने में मददगार साबित होंगे| याद रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री रहते अनिल बलूनी को राज्यसभा भेजने में अहम मददगार वाली भूमिका निभाई थी| आज भले ही दोनों नेताओं के रिश्ते सौहार्दपूर्ण ना हो|

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