ऑल इंडिया तंज़ीम-ए-इंसाफ का तीन दिवसीय तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन राँची में शुरू हुआ।

 राँची : ऑल इंडिया तंज़ीम-ए-इंसाफ का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 26 मार्च को फादर कामिल बुल्के मार्ग स्थित लॉयला ट्रेनिंग सेंटर में आरंभ हुआ। सम्मेलन में अलग - अलग राज्यों से 155 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन की अध्यक्षता पुर्व सांसद एवं तंज़ीम-ए-इंसाफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अज़ीज़ पाशा ने की। सम्मेलन के आरंभ में संगठन के ध्वज का झंडारोहण किया गया और संकल्प के रूप में तंज़ीम के उद्देश्यों जैसे घर्मनिर्पेक्षता, प्रगति और समाजवाद से जुड़े नारे लगाए गए। 


सम्मेलन के आरंभ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य और सम्मेलन स्वागत समिति के अध्यक्ष के.डी. सिंह ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड बिरसा मुंडा और शहीद मंजरुल हसन खाँ जैसे क्रांतिकारियों की धरती है और यहां के लोगों की मूल धारणा धर्मनिरपेक्षता और समभाव की है।

सम्मेलन को संसद सदस्य एवं केरल सरकार के पूर्व मंत्री कॉमरेड विनोय विश्वम, पूर्व सांसद एवं भाकपा झारखंड राज्य सचिव भुवनेश्वर मेहता, झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ..........., अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ......., उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एवं प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विभूति नारायण राय ने संबोधित किया। सम्मेलन के शुभारंभ समारोह के अंत में अध्यक्षीय भाषण अज़ीज पाशा ने दिया। सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों का धन्यवाद ज्ञापन तंज़ीम के राष्ट्रीय सचिव इफ़्तेख़ार महमूद ने किया और पहले दिन के कार्यक्रम का मंच संचालन तंज़ीम के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. ए. ए. खान ने किया। 

सम्मेलन के आरंभ में इप्टा से जुड़े साथियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। 

सम्मेलन को संबोधित करते हुए सांसद बिनॉय विश्वम ने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती साम्प्रदायिक फासीवाद है। सरकार में काबिज दक्षिणपंथी  ताकतें देश के संविधान को नकार कर मनुस्मृति को अपना आईन मानती है। मोदी सरकार भारत के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कुचलकर इसे हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहती है। इसलिए तंज़ीम-ए-इंसाफ का काम सिर्फ अकलियतों का कल्याण करना न होकर देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा करना  भी होना चाहिए।

विभूति नारायण राय ने कहा कि दुनिया में जहाँ कहीं भी धर्मनिरपेक्ष और जम्हूरियत की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है, हमसबको उसका समर्थन करना चाहिए। देश आज बहुत विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है। देश को बाँटने वाली ताकतें मजबूत हो रहीं है लेकिन लड़ाई को मजबूती से लड़ना होगा। 

पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता ने कहा कि जिन लोगों ने आज़ादी की लड़ाई में शिरकत तक नहीं किया बल्कि तिरंगे और संविधान को जो लोग नकारते रहे, वे आज राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट बाँटते फिर रहे हैं। सेकुलर ताकतों को एकजुट होकर इनसे मुकाबला करना होगा। 


कार्यक्रम में .... मौजूद रहे।

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