सपा विधायक शहजिल को झटका: अग्रिम जमानत अर्जी खारिज, 'विधानसभा में चलेंगी गोलियां' बयान देने का है आरोप

 बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए बरेली से मुस्तकीम मंसूरी की रिपोर्ट

अभियोजन की ओर से यह भी कहा गया है की शहजिल इस्लाम का अपराध भी गंभीर प्रकृति का है, लिहाजा उसे  किसी भी हालत में अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए, 

 बरेली,हिंदू युवा वाहिनी के अनुज वर्मा ने एफआईआर में कहा था कि सपा विधायक शहजिल इस्लाम ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं हिंदू युवा वाहिनी के संरक्षक योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपशब्द कहे। विधायक के इस बयान से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। कहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दिए शहजिल इस्लाम के बयान से हिंदू समाज में आक्रोश पैदा हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ विधानसभा में गोलियां चलने का विवादित बयान देने के मामले में सपा विधायक शहजिल इस्लाम की अग्रिम जमानत की अर्जी अदालत ने शुक्रवार को खारिज कर दी।


जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अभियोजन ने दावा किया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से शहजिल इस्लाम छिपे हुए हैं और विवेचना में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनसे पूछताछ के लिए उन्हें हिरासत में लिए जाने की जरूरत है।भोजीपुरा के सपा विधायक शहजिल इस्लाम के खिलाफ हिंदू युवा वाहिनी के जिला प्रभारी अनुज वर्मा ने तीन अप्रैल को एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें एक वायरल वीडियो के आधार पर शहजिल पर आरोप लगाया गया था कि आकाशपुरम कॉलोनी में सपा के जिला उपाध्यक्ष संजीव सक्सेना के निवास पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पहले कार्यकाल में विपक्ष को दबाए रखने का आरोप लगाया। यह भी कहा कि इस बार ऐसा हुआ तो  विधानसभा में गोलियां चलेंगी। शहजिल की अग्रिम जमानत अर्जी पर अदालत में बहस के दौरान उनके वकील घनश्याम शर्मा ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता क्योंकि पुलिस ने जिस बयान का जिक्र किया है, वह किसी लोकस्थान पर नहीं दिया गया है। इसके अलावा एफआईआर में भी उन शब्दों का उल्लेख नहीं है जिनसे सौहार्द बिगड़ने की आशंका है। अभियुक्त की ओर से यह भी कहा गया कि राजनीतिक विद्वेष की वजह से उनका जायज पेट्रोल पंप भी बेवजह ध्वस्त कर दिया गया। अब उन्हें पूरी आशंका है कि द्वेष भावना की वजह से थाना बारादरी, सीबीगंज, प्रेमनगर और कोतवाली की पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है।अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुनिति कुमार पाठक, एडीजीसी सचिन जायसवाल और विशेष लोक अभियोजक अचिंत  द्विवेदी ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया गया कि थाने की रिपोर्ट में कहा गया है कि अभियुक्त प्रभावशाली व्यक्ति हैं और अग्रिम जमानत पाकर विवेचना में सहयोग नहीं करेगा। वह मुकदमा कायम होने के बाद से खुद को लगातार छिपाए हुए है। उसे हिरासत में  लेकर पूछताछ किए जाने की आवश्यकता है लेकिन उसकी ओर से विवेचना में सहयोग नहीं किया जा रहा है।अभियोजन की ओर से यह भी कहा गया है कि शहजिल इस्लाम का अपराध भी गंभीर प्रकृति का है, लिहाजा उसे किसी भी हालत में अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए। अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार वर्मा ने इस टिप्पणी के साथ जमानत अर्जी खारिज कर दी कि अर्जी मे दिए गए तथ्य जमानत दिए जाने के लिए पर्याप्त और संतुष्टिकारक नहीं हैं।

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