आंगनबाड़ी कर्मियों ने अपनी मांगों के लिए किया प्रदर्शन और दिया ज्ञापन

नई दिल्ली (अनवार अहमद नूर)
दिल्ली और मोदी सरकार पर विभिन्न आरोप लगाते हुए दिल्ली आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हैल्पर यूनियन के तत्वावधान में अनेक आंगनबाड़ी कर्मियों और हैल्पर तथा उनके सहयोगियों ने शहीदी पार्क (आईटीओ) पर प्रदर्शन किया और  दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को अपनी मांगों से भरा ज्ञापन सौंपा।
प्राप्त समाचार के अनुसार प्रदर्शन करते हुए आंगनबाड़ी कर्मियों ने अपनी मांगों के प्ले कार्ड्स हाथों में ले रखे थे जिन पर लिखा था कि - आंगनबाड़ी कर्मियों को स्थाई करके उन्हें मानदेय की जगह वेतन दिया जाए। शोषण बंद किया जाए। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति को लागू न किया जाए


आंगनबाड़ी कर्मचारियों के लिए घोषित सुविधाएं जैसे अवकाश, बीमा, प्रीस्कूल किट, मेडिकल किट, आदि नियमित रूप से व पारदर्शिता से दी जाए। श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन को सुनिश्चित किया जाए। आंगनबाड़ी कर्मियों की यूनियन को मान्यता दी जाए और उनसे लगातार वार्ता की जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों में एनजीओ व निजी संस्थाओं के हस्तक्षेप को खत्म किया जाए तथा महंगाई के अनुसार ₹32000 वर्कर्स के लिए और ₹26000 हेल्पर्स के लिए फिलहाल मासिक वेतन की घोषणा की जाए और आंगनबाड़ी केंद्रों का किसी प्रकार से निजीकरण न किया जाए। 
यूनियन की महासचिव कमला ने बताया कि दिल्ली सरकार से जो पिछले दिनों सचिवालय में वार्ता हुई थी उसके दौरान जिन मांगों पर सहमति बनी थी उन मांगों को भी अभी तक लागू नहीं किया गया है। न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग को भी अभी तक नहीं माना गया है और हमारे काम करने के घंटों में भी जो बातें निर्धारित हुई थीं उस को लागू नहीं किया गया है। दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को दिए ज्ञापन में उन्होंने मांग की कि वह तुरंत इन मांगों पर ध्यान देते हुए उनको लागू कराएं और लिखित में उसका नोटिफिकेशन जारी करें। 
कामरेड अनुराग ने संबोधित करते हुए कहा कि सरकार असंवेदनशील हो गई हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का लगातार शोषण किया जा रहा है। महंगाई बढ़ गई है लेकिन वेतन बढ़ाने का नाम नहीं ले रहे और आंगनबाड़ी के सेंटरों पर लगातार हड़ताल की जा रही है और उनको बंद रखकर  विरोध जताया जा रहा है कि सरकार उनका निजीकरण न करे लेकिन अभी अधिकारियों की कानों पर जूं नहीं रेंगी है। इसलिए अगर सरकारी कर्मचारी मानते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्थाई वेतन और भत्ते नहीं दिए जाते तो हड़ताल जारी रहेगी और 28- 29 को पूरे देशभर में हड़ताल होगी। कामरेड बीना जो यूपी से आई थीं उन्होंने नई शिक्षा नीति को तुरंत समाप्त करने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का आव्हान करते हुए एक नारा लगाया कि, "दस हज़ार में दम नहीं छब्बीस हज़ार से कम नहीं।" 
एनडीएमसी से आई पूजा ने 4500 कर्मियों को स्थाई करने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विभिन्न पार्टियों के नेता आकर सिर्फ आश्वासन देते हैं और कुछ नहीं करते। 
भलस्वा से आई राधा ने भी अपने अधिकारों के लिए लड़ने और लगातार संघर्ष करने की बात कही।

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