प्रजापति शोषित समाज संघर्ष समिति (PS4) के आह्वान पर कुम्हारों ने घेरा विधानसभा

                                                    पीएस4 प्रमुख छेदीलाल प्रजापति 'निराला' ने भाजपा की योगी सरकार पर जाति आधार कुम्हारों की हत्या कराने का लगाया आरोप।

कहा- योगी सरकार में 60 से ज्यादा कुम्हारों की हो चुकी है हत्या। पिछले दो सालों के दौरान ही 15 वारदातों में हुई है 19 कुम्हारों की हत्या। जाति देखकर योगी सरकार देती है हत्या पीड़ितों को मुआवजा और नौकरी

राज्यपाल को संबोधित पांच सूत्री मांगों का दिया ज्ञापन।

कुम्हारों के हत्यारों और उत्पीड़न के आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने की उठाई मांग। 

लखनऊ जिला कारागार में रुपेश कुमार प्रजापति और गोरखपुर में विजय प्रजापति के फर्जी पुलिस एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग की।

लखनऊ, 26 नवम्बर 2021 । उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही कुम्हारों की हत्या और उत्पीड़न को लेकर प्रजापति शोषित समाज संघर्ष समिति (पीएस4) के आह्वान पर कुम्हारों ने आज उत्तर प्रदेश विधानसभा का घेराव किया।



विधानसभा के ठीक सामने सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शन कर रहे कुम्हारों और पीएस4 प्रमुख छेदीलाल प्रजापति 'निराला' को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और तीन बसों में बैठाकर विधानसभा से दूर ले गई। इस दौरान पुलिस ने कुम्हारों के बैनर को भी फाड़ दिया।  राज्यपाल को संबोधित पांच सूत्री मांगों का ज्ञापन भी पुलिस से छीन लिया। ज्ञापन में उन्होंने उत्तर प्रदेश में कुम्हारों की हत्या और उत्पीड़न के सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने, कुम्हारों की हत्या, उत्पीड़न और बलात्कार की सभी घटनाओं की जांच न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में कराने, लखनऊ जिला कारागार में रुपेश कुमार प्रजापति की हत्या और गोरखपुर में फर्जी पुलिस मुठभेड़ में विजय प्रजापति की हत्या की जांच सीबीआई से कराने, हत्या के शिकार कुम्हारों के परिजनों को 50 लाख रुपए का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, कुम्हारों की पट्टे वाली जमीन पर अवैध अतिक्रमण तत्काल हटाने की मांग की।

विधानसभा घेराव के दौरान पीएस4 प्रमुख छेदीलाल प्रजापति 'निराला' ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार के दौरान कुम्हार समुदाय के लोगों पर लगातार हमले हो रहे हैं। पिछले साढ़े चार सालों के दौरान उत्तर प्रदेश में कुम्हार समुदाय के करीब 60 लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं। पिछले दो सालों के दौरान कुम्हार समुदाय के लोगों के साथ हुई 15 घटनाओं में ही 19 लोगों को मौत के घाट उतारा जा चुका है। ये घटनाएं यह बताती हैं की भाजपा की योगी सरकार जाति आधार पर कुम्हारों की हत्या और उत्पीड़न करा रही है। पीड़ित परिवारों की बार-बार लिखित शिकायतों के बाद भी ना ही संगत धाराओं में एफआईआर दर्ज किया जा रहा है और ना ही आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। अब तो पुलिस संरक्षण में ही कुम्हारों की हत्या कर दी जा रही है। लखनऊ जिला जेल में रुपेश कुमार प्रजापति की हत्या और गोरखपुर में फर्जी पुलिस मुठभेड़ में विजय प्रजापति की हत्या ऐसे ही उदाहरण हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश में कुम्हार समुदाय के लोगों की हुई हत्याओं और उत्पीड़न की सभी घटनाओं की जांच न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में कराने की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा कि एक साल पहले मैनपुरी में कुम्हार समुदाय के एक ही परिवार के पांच लोगों को जिंदा फूंक दिया गया लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत सत्ताधारी और विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के मुखियाओं के मुख से संवेदना के एक शब्द नहीं निकले। कुम्हार समुदाय के लोगों द्वारा डेढ़ महीने तक आंदोलन चलाने के बाद सत्ताधारी भाजपा की सरकार ने पीड़ित परिवार को महज पांच लाख रुपये दिए। जबकि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने ब्राह्मण और बनिया समुदाय के एक व्यक्ति की हत्या होने पर उनके परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा और समूह 'क' की नौकरी दी। हत्या जैसे संगीन मामले में भी भाजपा सरकार जाति आधार पर पीड़ितों की सहायता और न्याय में भेदभाव कर रही है। मैनपुरी मामले ही में आज तक ठाकुर समुदाय के आरोपी के खिलाफ ना ही कोई मुकदमा लिखा गया और ना ही उसकी गिरफ्तारी की गई जबकि पीड़िता ने मरने से पहले कैमरे के सामने खुद उसका नाम लिया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के केराकतपुर गांव में प्लंबर कन्हैयालाल प्रजापति की दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या में शामिल ठाकुर(भूमिहार) जाति का एक आरोपी आज तक गांव में खुला घूम रहा है। जिला प्रशासन ने बंदूक की नोंक पर कन्हैयालाल प्रजापति के शव का अंतिम संस्कार करा दिया। उस समय प्रशासन ने पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये और मृतक की पत्नी को आंगनबाड़ी की नौकरी देने का वादा किया था जिसे उसने आज तक पूरा नहीं किया। गोरखपुर में पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में विजय प्रजापति की हत्या कर दी लेकिन ठाकुर और ब्राह्मण समुदाय के आरोपियों को कुछ नहीं किया। 

इस दौरान पीएस4 महासचिव राजेश प्रजापति ने कहा कि लखनऊ जिला कारागार में बंद विचाराधीन कैदी रुपेश कुमार प्रजापति की हत्या न्यायिक अभिरक्षा में कर दी गई लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई दंडनात्मक कार्रवाई नहीं की। पीड़ित परिवार की तहरीर पर एफआईआर तक नहीं लिखी गई। जेल प्रशासन कह रहा है कि रुपेश ने आत्महत्या की है जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर आठ से ज्यादा चोटों के निशान हैं। आत्महत्या करने वाले व्यक्ति पर चोटों के निशान कहाँ से आए? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि उसके गले की नसें सामान्य थीं जबकि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति के गले की नसें टूटी मिलती हैं। इसलिए रुपेश की हत्या की जांच सीबीआई से कराने की जरूरत है। ऐसे ही कुम्हार समुदाय के लोगों की हत्या, उत्पीड़न और बलात्कार के हजारों मामले हैं जिसमें उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जाति देखकर कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की। कुम्हारों की हत्या और उत्पीड़न के मामले में विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने भी न्याय के लिए कोई आवाज़ नहीं उठाई और ना ही आंदोलन किया। ऐसे में सत्ता और ऊंची जातियों से कुम्हार समुदाय के लोगों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। इसे हम सभी को मिलकर हर हाल में रोकना होगा और कुम्हार समुदाय के पीड़ितों को न्याय दिलाना होगा। कुम्हार समुदाय के लोगों की हत्या, उत्पीड़न और बलात्कार के आरोपियों को जेल भेजना होगा।

घेराव के दौरान कुम्हारों का पुलिस प्रशासन से झड़प भी हुई। बाद में प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को संबोधित पांच सूत्री एक ज्ञापन शासन के प्रतिनिधि को सौंपा जिसमें उत्तर प्रदेश में कुम्हारों की हत्या और उत्पीड़न के सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने, कुम्हारों की हत्या, उत्पीड़न और बलात्कार की सभी घटनाओं की जांच न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में कराने, लखनऊ जिला कारागार में रुपेश कुमार प्रजापति की हत्या और गोरखपुर में फर्जी पुलिस मुठभेड़ में विजय प्रजापति की हत्या की जांच सीबीआई से कराने, हत्या के शिकार कुम्हारों के परिजनों को 50 लाख रुपए का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, कुम्हारों की पट्टे वाली जमीन पर अवैध अतिक्रमण तत्काल हटाने की मांग की गई है।

विधानसभा घेराव में हत्या और उत्पीड़न के शिकार लोगों के परिजन भी भारी संख्या में शामिल रहे जिनमें सीतापुर से रुपेश कुमार प्रजापति की पत्नी लाली देवी, वाराणसी से कन्हैयालाल प्रजापति की पत्नी माया प्रजापति, गोरखपुर से विजय प्रजापति की पत्नी प्रमिला प्रजापति, मैनपुरी के खरपरी से मोहित प्रजापति प्रमुख हैं। प्रजापति शोषित समाज संघर्ष समिति (पीएस4) के प्रमुख छेदीलाल प्रजापति 'निराला' की ओर से घोषित विधानसभा घेराव को प्रजापति अंतरविश्वविद्यालयी विद्यार्थी (PIUS) समू, कुम्हार (प्रजापति) अधिकार शौर्य संगठन मिर्जापुर, कुम्हार महासभा राजस्थान और रिहाई मंच ने भी समर्थन दिया था।   

विधानसभा घेराव में पीएस4 के संरक्षक चेखुर प्रसाद प्रजापति, मिर्जापुर जिला संयोजक सोहन लाल प्रजापति उर्फ रिंकू, वाराणसी जिला संयोजक उमाशंकर प्रजापति, उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. वरदानी प्रजापति, कुम्हार (प्रजापति) अधिकार शौर्य संगठन मिर्जापुर के रमेशचंद्र प्रजापति उर्फ पप्पू, मंसाराम राजभर, श्यामलाल प्रजापति, राकेश प्रजापति, सत्यवीर सिंह प्रजापति, रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव  समेत हजारों लोग शामिल रहे।

द्वारा जारी

राजेश प्रजापति

महासचिव, पीएस4

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