यूपी चुनाव से पहले जनता और सत्ता और विपक्षी दलों को लेकर विश्लेषण*

महिपाल यादव 
वरिष्ठ पत्रकार
 *बीजेपी के चक्रव्यू से बचने के लिए बिहार चुनाव से सीख लेनी होगी और कलकत्ता की शेरनी ममता दीदी से विजय की रणनीति आगामी विधानसभा चुनाव के आने से पहले विपक्षी दलों को यूपी , उत्तराखंड, गुजरात चुनाव में तैयारी करनी होगी पदाधिकारियों   प्रभारीयो की नीति का फार्मूला मोदी और शाह ने फ़ैल कर दिया है इस बात को समझने की जरूरत है जिस भी पार्टी ने कार्यकर्ताओं को अनदेखा किया चाटुकार पदाधिकारियों को तवज्जो दी वे सत्ता से बाहर हुये जमीनी स्तर पर सही हकीकत कार्यकर्ता ही दे सकता है लहरों से सरकारें नहीं बनती बिहार उदाहरण है मीडिया ने लहर चला कर पदाधिकारियों ने और पूर्व विधायकों ने तेजस्वी की रफ्तार को बढ़ा दिखा कर बीजेपी की नितीश कुमार के माध्यम से वापसी करा दी और सच मानिए उनकी ये वापसी दो हजार चौबीस में बीजेपी के लिए संजीवनी बूटी का काम करेगा जो बिहार का विपक्ष रफ्तार और लहरों के चक्कर में ओवरकॉन्फिडेंस होकर चुनावी समर में कूद पड़े और नीतीश कुमार को इतिहास लिखवा दिये मुस्लिम समुदाय की जातियों का सही समीकरण ना बैठा पाना और यादवों का बंट जाना पप्पू यादव की ओर इन सबको यूपी में ना धौरा ले बीजेपी ये समझने का विषय है मंसूरी समाज और अंसारी समाज का विखराव और यादवों की आस्था दो जगह ना बंट जाये मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश यादव इस समिकरण को चुनाव से पहले समझाना होगा, सत्ता में हवा में उड़ कर वापसी नहीं हो सकती यह पश्चिम बंगाल के चुनाव ने दिखाया पूरी बीजेपी की सरकार हराने के लिए सत्ता की पावर से लगी रही पर जीत कर वापसी की ममता दीदी ने तो उसके पीछे उनकी पार्टी के वो कार्यकरता  है जो पदाधिकारियों और पूर्व विधायकों और सांसदों से ज्यादा पार्टी के लिए निष्ठावान है और उनका सीधे आलाकमान से संवाद है और उसकी बातों का पार्टी को लेकर चिन्तन करके उनपर अम्ल करना जीत के पथ पर विजायी कराया पश्चिम बंगाल में*

*आगे आने वाले चुनाव में विपक्षी दलों को दोनों पिछले चुनाव से सीख लेनी होगी दिल्ली चुनाव का जिक्र इस लिए जरूरी नहीं कि केन्द्र शासित राज्य है वहां पर किसी भी पार्टी ने इतना जोर नहीं लगाया आप और बीजेपी की ही सीधे लडाई थी यूपी में दूसरे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी है विपक्षी दल के रूप में जो बीजेपी की वापसी रोकने में सक्षम तो है पर इन ऊपर की बातों पर तवज्जो दिए बिना सत्ता में वापसी संभव नहीं है पदाधिकारी और प्रभारी भीड़ इकट्ठा करवा सकते हैं भीड़ को वोट में कैसे बदला जाए इस पर काम की जरूरत है जो गलती बिहार में विपक्षी दल जो सबसे मजबूत दावेदार के रूप में थी उसको हरा कर सत्ता पर काबिज हो गई नीतिश कुमार की रणनीति*

*सबको जानने की जरूरत है बीजेपी इतनी आसानी से सत्ता से बाहर यूपी से होने वाली नहीं उसका राज्यसभा कमजोर पड़ जायेगा और मिशन दो हजार चौबीस फंस जायेगा, रणनीति बनाकर वोट बैंक को जिसमें सेंध ना लगा सकें सत्ता पक्ष की पार्टी उस नीति पर पश्चिम बंगाल वाली पद्धति अपनानी होगी यूपी में पार्टी का कार्यकर्ता खास है पदाधिकारियों और प्रभारियों को ज्यादा विश्वास में लेकर चुनावी प्रत्याशी उतारना हार का कारण बनेगा जो 2017 में हुआ था कार्यकर्ताओं को अनदेखी कर विपक्षी दल सत्ता से बाहर गई थी समय पर्याप्त है बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों से सीख लेकर विजयी रथ पर सवार हो विपक्षी दूसरे नंबर की पार्टी यूपी में*

*बस ये ख्याल रहें जनता विकास कार्यों को ज्यादा दिनों तक याद नहीं रखती वो जिस तकलीफ में है उससे कैसे बाहर करेगी विपक्षी पार्टी यूपी की उसपर काम किया जाये* 

 *जनता का खेल है निराला हम हैं मझधार में हमें चाहिए है सहारा उस सहारे के दम पर कांग्रेस को देश की राजनीति से बाहर किया था बीजेपी ने बस वादा खिलाफी इनको बाहर करने के लिए विपक्षियों के पास ब्रह्मास्त्र है*

 

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