बाराबंकी में मस्जिद का तोड़ा जाना योगी सरकार की तानाशाही - मुस्लिम मजलिस


 ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस के राष्ट्रीय महासचिव मुस्तकीम मंसूरी व प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद नदीम सिद्दीकी ने एक संयुक्त बयान में कहां की बाराबंकी जिले की राम सनेही घाट तहसील स्थित 100 वर्ष पुरानी मस्जिद गरीब नवाज मस्जिद जो तहसील मस्जिद के नाम से भी जानी जाती थी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और अयोध्या के बीच बाराबंकी जिला के रामसनेही घाट स्थित मस्जिद को शहीद करने का मकसद क्या हो सकता है? इसका जवाब बाराबंकी के जिला प्रशासन के पास नहीं है, क्योंकि मस्जिद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर शहीद की गई है। इसके लिए मुस्लिम मजलिस लॉकडाउन के बाद कोर्ट जाएगी। क्योंकि बाराबंकी के जिलाधिकारी, एसएसपी, व उप जिलाधिकारी के साथ-साथ जो भी प्रशासनिक अमला मस्जिद शहीद करने में शामिल था। उन सभी ने माननीय उच्च न्यायालय के 24 अप्रैल को कोविड-19 महामारी को देखते हुए सभी तरह के निष्कासन, बेदखली, तोड़ तोड़, आदि की प्रक्रियाओं पर 31 मई 2021 तक रोक लगा दी थी। परंतु उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दबाव में जिला प्रशासन यह भी भूल गया कि वह माननीय उच्च न्यायालय की अवमानना कर रहा है।

मुस्तकीम मंसूरी व नदीम सिद्दीकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में एक आदेश पारित किया था। जिसमें कहा था 1947 से पहले के जो भी धार्मिक स्थल है। वह वैसे ही रहेंगे। सत्ता के दबाव में प्रशासन ने जहां माननीय उच्च न्यायालय की अवमानना की है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन किया है। यहां यह बताना जरूरी है। मस्जिद शहीद करना कानून के खिलाफ है। बल्कि सत्ता की ताकत का दुरुपयोग भी है।

मुस्तकीम मंसूरी व नदीम सिद्दीकी ने कहा शहीद की गई मस्जिद में बिजली का कनेक्शन 1962 में किया गया था। और मस्जिद का रजिस्ट्रेशन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ में वक्फ नंबर 4810 के रूप में पेज नंबर 198 वक्फ बोर्ड रजिस्टर मैं धारा 37 के तहत वक्फ कदीमी में दर्ज है। अब सरकार और जिला प्रशासन यह बताएं कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन आता है। और सरकार वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा हेतु उनको खुर्द, बुद् होने से बचाने के उद्देश्य से सरकार में वक्फ मंत्री भी बनाती है। और वह बोर्ड का चेयरमैन बनाकर सभी वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा का दायित्व चेयरमैन और बोर्ड के मेंबरों के सुपुर्द करती है। तो अब मस्जिद गरीब नवाज अवैध कैसे हो गई।

मुस्तकीम मंसूरी व नदीम सिद्दीकी ने कहा जिस तरह भारतीय जनता पार्टी बाबरी मस्जिद की शहादत के नाम पर सत्ता में आई थी। और राम मंदिर के निर्माण के नाम पर इस वक्त देश व प्रदेश की सत्ता में क़ाबिज है। परंतु भाजपा का हिंदू मुस्लिम, मंदिर मस्जिद, सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास, सारे जुमले करोना महामारी के के सामने फेल हो गए। भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने वाले समाज के सामने भाजपा, आर एस एस, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, के लोग बेनकाब हो गए और भाजपा का जनाधार खिसकने लगा। ऐसी सूरत में गरीब नवाज मस्जिद को मुख्यमंत्री द्वारा शहीद करवा कर 2022 में पुनः सत्ता प्राप्ति के प्रयास शुरू किए जा चुके हैं।

मुस्तकीम मंसूरी व नदीम सिद्दीकी ने कहा देश व प्रदेश की जनता इनके जुमलो को समझ चुकी है। कोरोना महामारी, कमरतोड़ महंगाई, चरम पर पहुंच चुके भ्रष्टाचार, सरकारी संपत्तियों का निजी करण, लाखों मौतों का तांडव, यह सब देश व प्रदेश की जनता ने खुली आंखों से देखा है। भाजपा जितने चाहे प्रयास कर ले देश व प्रदेश की जनता किसी धार्मिक उन्माद में बहने वाली नहीं है। रही बात जो मस्जिद सत्ता के बल पर शहीद करवाई गई है। कानून के बल पर मस्जिद की तामीर भी इसी सरकार को कराना होगी।



 

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