जिनका मरीज मरा, जिन्हें डॉक्टर के भाई ने पिस्तौल दिखाई, जिनकी पिटाई करके उन पर गोली चलाई, बाद में उन्हीं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज करा दिया


 मुजफ्फरनगर - कोरोना का कहर  मौत का तांडव  बरपा कर रहा है। जहां मानवता  और इंसानियत  को मानने वाले लोग  पीड़ित लोगों की सहायता कर रहे हैं ,वहीं कुछ लोग  आपदा को अवसर मान कर फायदा उठा रहे हैं।डॉक्टर को भगवान का रूप माना जाता है  और डॉक्टर के सामने  कोई भी मरीज का तीमारदार हाथ बांधकर बाहर खड़ा होता है उसके मरीज के साथ क्या हो रहा है वह सब भगवान भरोसे छोड़ देता है,  कि डॉक्टर  उनके मरीज को ठीक करने का काम कर रहे होंगे  लेकिन जब यह डॉक्टर ही  लोगों की जान बचाने के बजाय लापरवाही और अपने निजी फायदे के लिए  लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने लगे  तो ऐसे  डॉक्टरों को कभी भी भगवान का दर्जा नहीं दिया जा सकता  बल्कि इन्हें तो शैतान कहा जाएगा। और ऐसी हरकत करने वाला एक मामला मुजफ्फरनगर में आया है   इस मामले में हैरत की बात यह है कि जिनका मरीज मरा, जिन्हें डॉक्टर के भाई ने पिस्तौल दिखाई, जिनकी पिटाई करके उन पर गोली चलाई, बाद में उन्हीं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया । इस मामले में आज बीजेपी के पुरकाजी विधायक प्रमोद ऊंटवाल ने पीड़ित परिवार को पूरी तरह न्याय का भरोसा दिलाया है। किसी शादी ब्याह में हथियार लहराने के पुराने वीडियो वायरल होने पर आनन फानन में उन्हें जेल भेजने वाले ज़िले के पुलिस अफसर भी एक डॉक्टर के भाई द्वारा सरेआम हथियार लहराने और मरीज के परिजनों पर फायर करने के बाद भी कोई कार्यवाही न करके मौन साधे हुए है।  इस घटनाक्रम के बाद शहर में इस डॉक्टर के खिलाफ आक्रोश बना हुआ है। शहर में बालाजी चौक के पास डॉक्टर देवेंद्र कुमार सैनी का हार्ट केयर सेंटर बना हुआ है, कोरोनावायरस संक्रमण बढ़ने पर  मुजफ्फरनगर मैडिकल में जब जगह ना रही, तो जिला प्रशासन ने इस हार्ट सेंटर को भी कोविड-19 अस्पताल के रूप में परिवर्तित कर दिया।  आईएमए के अध्यक्ष डॉ एम एल गर्ग ने डॉक्टर देवेंद्र सैनी और डॉ अनुज माहेश्वरी के साथ मिलकर इस कोविड सेंटर को शुरू किया, खुद डॉक्टर गर्ग और जिला प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि इस कोविड सेंटर में केवल ₹11000 प्रतिदिन लेकर मरीजों का उपचार किया जाएगा।सिविल लाइन क्षेत्र के प्रकाश चौक निवासी नरेंद्र कुमार गुप्ता, डॉक्टर एमसी गर्ग के उपचार में थे, कल उनकी तबीयत खराब होने पर डॉक्टर गर्ग ने उनकी कोरोना रिपोर्ट कराई, जिसमें वह कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए, जिसके बाद डॉक्टर गर्ग ने उन्हें डॉक्टर देवेंद्र सैनी के हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया, आज गुरुवार को शाम 4:00 बजे के लगभग नरेंद्र गुप्ता का कोरोना से निधन हो गया, जिसके बाद मरीज के परिजनों का डॉक्टरों से विवाद हो गया।  मरीज के परिजनों का कहना है कि उनसे ₹200000 एडवांस जमा कराए गए थे और उनके मरीज की मौत डॉक्टरों की लापरवाही से हुई है, जिसके बाद उन्हें न तो क्या ईलाज किया गया, इसकी जानकारी दी गई और दो लाख रुपये पूरे खर्च बता दिए गए। इस मामले को लेकर हंगामा इतना बढ़ा कि डॉक्टर देवेंद्र सैनी के भाई मनीष सैनी ने मरीज के परिजनों पर हवाई फायर भी कर दिए और डॉक्टर सैनी के स्टाफ ने उनके साथ हाथापाई भी कर दी, बाद में एसपी सिटी अर्पित विजयवर्गीय, सिटी मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार सिंह, सीओ सिटी कुलदीप सिंह, शहर कोतवाल योगेश शर्मा, सिविल लाइन कोतवाल उम्मेद यादव समेत भारी पुलिस फोर्स ने मौके पर जाकर मामले को संभालाइस प्रकरण में अस्पताल के पार्टनर व आईएमए के अध्यक्ष डॉक्टर गर्ग ने स्वीकार किया  कि मरीज से ₹2 लाख अग्रिम जमा कराए गए थे, पत्रकारों ने उनसे पूछा कि जिला प्रशासन ने ₹11000 प्रतिदिन जमा कराने की बात कही थी तो दो लाख एडवांस क्यों जमा कराये गए थे, जिस पर डॉक्टर गर्ग ने जवाब दिया कि उनके स्टाफ का खर्चा बढ़ गया है इसलिए उन्होंने यह रकम बढ़ा दी है। 

इस मामले में देर रात उस समय एक नया मोड़ आ गया, जब डॉक्टर देवेंद्र सैनी ने मृतक नरेंद्र कुमार गुप्ता के पोते अर्चित गुप्ता समेत परिवार के चार पांच अन्य व्यक्तियों के विरूद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया है।  शहर कोतवाली में मुकदमा अपराध संख्या 272/ 2021 पर दर्ज कराए गए इस मुकदमे में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51, महामारी अधिनियम की धारा 3, उत्तर प्रदेश चिकित्सा परिचर्या सेवा कर्मी और चिकित्सा परिचर्या सेवा संस्था [हिंसा और संपत्ति की क्षति का निवारण] अधिनियम की धारा 3 ए और 3 बी जैसी गंभीर धाराएं भी लगाई गई हैं।  डॉक्टर सैनी द्वारा लिखे गए इस मुकदमे के मुताबिक नरेंद्र गुप्ता के परिजनों ने डॉक्टर देवेंद्र सैनी और उनके स्टाफ के ऊपर जानलेवा हमला किया है।इस मामले में धारा 147,188,323,352,269,270  भी लगाई गयी है। 

आपको बता दें कि जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने जब इस अस्पताल को कोरोना अस्पताल के रूप में मान्यता दी थी तो ₹11000 प्रतिदिन की दरें निर्धारित की थी, लेकिन अब इस अस्पताल में कम से कम ₹40000 प्रतिदिन से ज्यादा वसूली की जा रही है। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने भी 14 अप्रैल 2021 को एक आदेश जारी किया था जिसके बाद  निजी अस्पताल मनमाने शुल्क वसूल नहीं कर सकते हैं, उस आदेश में लखनऊ, मेरठ, वाराणसी, कानपुर ,मेरठ ,गाज़ियाबाद, नॉएडा जैसे ज़िलों को ए श्रेणी, मुजफ्फरनगर समेत मुरादाबाद, अलीगढ़, झांसी, सहारनपुर, मथुरा, रामपुर, मिर्जापुर, शाहजहांपुर, अयोध्या, फिरोजाबाद और फर्रुखाबाद को बी श्रेणी का जिला सूचीबद्ध किया गया था।  उसमें साफ़ साफ़ निर्देश है कि ए श्रेणी के शहरों में आईसीयू में वेंटिलेटर के साथ बेड पर भर्ती मरीज से 1 दिन का अधिकतम ₹18000 लिया जा सकता है लेकिन बी श्रेणी के शहर में इसका अधिकतम 80% यानी ₹14400 प्रतिदिन से ज्यादा नहीं वसूला जा सकता है,इसमें पीपीई  किट का रेट भी शामिल है , मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निजी अस्पतालों को चेतावनी दी थी कि अगर इस आदेश का उल्लंघन किया गया तो उनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जाएगी और लखनऊ में कुछ अस्पतालों को नोटिस भी जारी कर दिए गए है। 

 बेताब समाचार एक्सप्रेस जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे से जनहित में मांग करता है कि वह इस प्रकरण की गंभीरता से जांच कराएं कि आखिर डॉक्टर एम.एल. गर्ग, डॉक्टर देवेंद्र सैनी ने किसके आदेश से अस्पताल की निर्धारित राशि इतनी बढ़ाई है ? किसकी शह पर वे मुख्यमंत्री और केंद्र व प्रदेश सरकार के निर्देशों का खुला उल्लंघन कर रहे है। ये भी जांच होनी चाहिए कि आखिर किस हिसाब से ​​​इस मामले में भी बुधवार को भर्ती कराए गए मरीज की गुरुवार को मृत्यु हो जाने के उपरांत भी 30 घंटे के लिए लगभग ₹75000 से ज़्यादा का भुगतान लिया गया और बाकी भुगतान भी अफसरों के दबाव में पीड़ितों को वापस दिया गया।

मुजफ्फरनगर में कोविड-19 अस्पताल के नाम पर इस तरह की लूट की घटना और पीड़ित के परिजनों को रिवाल्वर दिखाना, उन पर फायर करना गंभीर मामला है, सोशल मीडिया पर इसके बारे में फोटो वायरल होने के बाद इन डॉक्टरों के खिलाफ मुजफ्फरनगर की जनता में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। 

बताया जाता है कि इस अस्पताल में डॉक्टर गर्ग, डॉक्टर सैनी के अलावा डॉ अनुज माहेश्वरी भी तीसरे साझीदार हैं,एक पीड़ित ने बताया कि उसके परिजन इस अस्पताल में भर्ती थे, पहले उन्हें ₹18000 रोज खर्च बताया गया, लेकिन बाद में उनसे ₹200000 की मांग की गई।  उन्होंने बताया कि डॉ माहेश्वरी द्वारा जो जांच की जा रही है वह भी फर्जी जांच की जा रही है।  उन्होंने बताया कि उनके मरीज की डी डाइमर की जांच की गई तो वह 4000 से ज्यादा बता दी गई, जबकि उन्होंने उसकी जांच किसी अन्य स्थान से कराई तो जांच रिपोर्ट में केवल 250 आई।  उनका आरोप है कि अस्पताल में फर्जी जांच रिपोर्ट बनाकर, परिजनों को आतंकित कर, डॉक्टरों का यह गैंग, इस कोरोना के भय के माहौल में वसूली का अभियान चलाए हुए हैं और मुजफ्फरनगर में कहीं अन्य समुचित व्यवस्था ना होने के कारण लोग इनके यहाँ लुटने के लिए मजबूर हैं जिला प्रशासन को तत्काल इस पर हस्तक्षेप करना चाहिए। 

इस मामले में आज पुरकाजी के भाजपा विधायक प्रमोद ऊंटवाल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उनकी पीड़ा सुनी, विधायक ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया है कि उनकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जायेगी और उनके साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। 

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