विश्व के 100 उभरते हुए नेताओं की टाइम पत्रिका की सूची में शामिल पांच भारतवंशियों में से एक 34 वर्षीय नौजवान चंद्रशेखर आजाद



सहारनपुर।दलित समाज में कांशीराम के बाद सुश्री मायावती  चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी। दलित समुदाय का चमकता सितारा के रूप में चंद्रशेखर रावण  अपनी पहचान बना रहे हैं। 
विश्व के 100 उभरते हुए नेताओं की टाइम पत्रिका की सूची में शामिल पांच भारतवंशियों में से एक 34 वर्षीय नौजवान चंद्रशेखर आजाद ने अपनी विचारधारा, व्यक्तित्व और कार्यप्रणाली को विश्व की सर्वश्रेष्ठ पत्रिका टाइम द्वारा मान्यता दिए जाने पर गौरवान्वित होते हुए कहा कि वह भारत और यहां के समाज की अपनी पूरी सामर्थय के साथ सेवा करेंगे और अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे। सहारनपुर के छोटे से कस्बे छुटमलपुर निवासी स्कूल अध्यापक गोरधन दास के सुपुत्र चंद्रशेखर ने देहरादून से वकालत की शिक्षा प्राप्त की थी और 21 जुलाई-2014 को उन्होंने एक सामाजिक संगठन भीम आर्मी मिशन की स्थापना की थी। गागलहेड़ी थाने के गांव घड़कोली में अप्रैल-2016 में एक जाति सूचक बोर्ड को लेकर हुए छोटे से विवाद में पहली बार भीम आर्मी और उसके नेता चंद्रशेखर मीडिया की सुर्खियों में आए थे। उस वक्त सहारनपुर के डीआईजी पद पर कार्यरत डा. अशोक कुमार राघव ने इस आशय के साथ स्थानीय सूचना इकाई (एलआईयू) की फाइल बनवाई थी। अशोक राघव को लगता था कि भविष्य में इस संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। 5 मई-2017 को चंद्रशेखर और उनकी भीम आर्मी फिर चर्चाओं में आ गई। जब देवबंद तहसील के थाना बड़गांव के शब्बीरपुर गांव में महाराणा प्रताप की जयंती को लेकर अनुसूचित जाति और राजपूत जाति के बीच हुआ विवाद हिंसक हो गया था। जिसमें देवबंद थाने के गांव रसूलपुर टाक निवासी एक राजपूत युवक की मौत हो गई थी और गांव के अनुसूचित जाति के कई घरों में जमकर आगजनी हुई थी। उस घटना से क्षुब्ध होकर चंद्रशेखर और उनके संगठन ने 9 मई को सहारनपुर के गांधी पार्क में पंचायत करने का प्रयास किया था। जिसे पुलिस ने तितर-बितर कर दिया था। उस दौरान भी सहारनपुर में चंद्रशेखर और उनके साथियों के खिलाफ पुलिस ने संगीन धाराओं में मुकदमें दर्ज किए थे। चंद्रशेखर को सहारनपुर पुलिस ने 8 जुलाई-2017 को पहली बार गिरफ्तार कर जेल भेजा था और तत्कालीन जिलाधिकारी प्रमोद कुमार पांडे ने उन्हें रासुका में निरूद्ध कर दिया था। योगी सरकार ने 14 सितंबर-2018 की आधी रात को सहारनपुर जेल से रिहाई कराई। चंद्रशेखर आजाद ने देशभर में जहां कहीं भी जुल्म, ज्यादती और अन्याय की घटनाएं हुई वहां अपनी सक्रिय भागीदारी की। दिल्ली पुलिस समेत कई राज्यों और जनपदों में चंद्रशेखर को बार-बार गिरफ्तार कर जेलों में बंद किया गया। चंद्रशेखर अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं। उनका कहना है कि उनका पहला धर्म इंसानियत है। जाति-बिरादरी, ऊंच-नीच और तरह-तरह के भेदभाव, ईश्वर द्वारा नहीं बल्कि समाज द्वारा निर्मित है। जातीय घेराबंदी के बजाए हमारा मुख्य धर्म और लक्ष्य इंसानियत और इंसानियत की सेवा करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह भीमराव डा. बाबा साहब अंबेडकर की शिक्षाओं से प्रेरित हैं। भारतीय संविधान में गहरी आस्था रखते हैं। वह महात्मा गांधी को भी संत से कम नहीं मानते हैं। चंद्रशेखर आजाद ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के देश में आज गांधी की पूजा नहीं हो रही है। एक तबका ऐसा है जो बापू के हत्यारे नाथूराम गौड़से को महिमा मंडित करने में बेशर्मी के साथ लगा हुआ है। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि सबसे बड़ी पत्रिका टाइम ने उन्हें मान्यता देकर जो सुनहरा अवसर प्रदान किया है वह उसे व्यर्थ नहीं जाने देंगे और राष्ट्र, समाज की मुख्यधारा में रहकर दलितों, वंचितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों को उनका अधिकार दिलाने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा सात वर्ष पूर्व शुरू की गई मुहिम अब रूकने वाली नहीं है। यह निरंतर अग्रसर रहेगी। उन्होंने अपनी उपलब्धि पर टाइम पत्रिका और अपने समर्थकों एवं प्रशंसकों का आभार व्यक्त किया।


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