*वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर डॉक्टर अमिताभ अग्निहोत्री वरिष्ठ पत्रकार ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र*


बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए पीलीभीत से शाहिद खान की रिपोर्ट*

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न्यजीव प्रेमी ने वन्यजीवों की सुरक्षा वन एवं वन्यजीव प्रभाग से हटाने का आग्रह

*प्रभाग की कार्यप्रणाली पर उठाये सवाल*


पीलीभीत में जंगल से बाहर आये वन्यजीवो की सुरक्षा को लेकर स्थानीय वन्यजीव प्रेमी तथा वाइल्ड लाइफ वायोडार्यवसिटी कंजरवेशन सोसायटी के उपाध्यक्ष  तथा राज्य वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार विजेता 2004 डॉ.अमिताभ अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर वन्यजीवों की सुरक्षा व संरक्षण वन एवं वन्यजीव प्रभाग से तत्काल हटाने का आग्रह किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र की प्रति प्रमुख सचिव वन तथा सदस्य सचिव राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अधिकरण को भी भेजी है।  

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में डॉ.अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा है कि पीलीभीत प्रदेश में वन्यजीवों की दृष्टि से सबसे अधिक समृद्धशाली जिला है। आपके प्रयासों से वन्यजीव संरक्षण और वनों की दशा सुधारने की दिशा में सार्थक प्रयास भी हुए है। लेकिन पीलीभीत जिले का वन एवं वन्यजीव प्रभाग की कार्यप्रणाली ने इन प्रयासों पर पानी फेरने का कार्य किया है। 

पत्र में उन्होंने कहा है कि पीलीभीत टाईगर रिजर्व का जंगल 72 हजार हैक्टयर में स्थित है। बाघ सरंक्षण के प्रयासों तथा यहां की जैव विविधता से यहां बाघों की संख्या में आशा से कई गुना अधिक वृद्धि हुई है। इसका परिणाम का यह हुआ कि पीलीभीत टाईगर रिजर्व के जंगलों में सत्तर से अधिक बाघ मौजूद है। वास्तविकता तो यह है कि पीलीभीत टाईगर रिजर्व के जंगल में क्षमता से अधिक बाघ हो गए है। वर्तमान में चालीस प्रतिशत तक बाघ जंगल से बाहर है। जंगल से बाहर बाघों की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी वन एवं वन्यजीव प्रभाग पर है। दुर्भाग्य से इनके पास न वन्यजीवों के संबंध में कोई अध्ययन है, न कोई वन्यजीव प्रशिक्षण है। न वन्यजीवांे के प्रबंधन तथा भीड को नियंत्रित करने की भी कोई योजना इनके पास नहीं है। हर संभव संसाधानों की कमी के बहाने से यह लोग वन्यजीवांे की सुरक्षा से खिलबाड कर रहे है।

पत्र मे ंकहा गया है कि पीलीभीत टाईगर रिजर्व से वर्ष 2014 में निकले एक मादा बाघ तथा उनके शावकों ने अमरिया क्षेत्र में शरण लेकर वहां अपने कुनबे का विस्तार कर लिया था। एक समय यहां भी एक दर्जन बाघों की मौजूदगी रही है। चूंकि यह क्षेत्र वन एवं वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी ही थी। पर्यवेक्षण के अभाव में वर्तमान में अमरिया में बाघों की संख्या नगण्य हो गयी। वैसे भी जिस क्षेत्र में बाघ होता है, वहां तेंदुआ नहीं होता है। लेकिन अब अमरिया क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक तेंदुए सक्रिय है। आदरणीय आपका इस ओर भी आकृष्ट कराना चाहता हूं कि अक्तूबर में जंगल से बाहर निकलकर एक मादा बाघ कलीनगर तहसील क्षेत्र मंे विचरण करती रही। 26 दिसंबर को अटकोना गांव से इस मादा बाघ को पीलीभीत टाईगर रिजर्व  की टीम ने रेस्क्यू कर लिया। यदि यह मादा बाघ को पकडा नहीं जाता तो यह निस्संदेह किसी दुर्घटना का शिकार हो जाती। इसके पर्यवेक्षण में वन एवं वन्यजीव प्रभाग की लापरवाही उजागर हुई। हालांकि अभी भी कई बाघ जंगल से बाहर है। जिनका क्या भविष्य होगा, यह अलग बात है, लेकिन वे वन एवं वन्यजीव प्रभाग के संरक्षण में बच पायेंगे इसमें संदेह प्रतीत होता है। क्योंकि मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने की भी इनके पास कोर्इ्र योजना नहीं है।  नये साल के पहले दिन ही वन एवं वन्यजीव प्रभाग के क्षेत्रांर्तगत एक आठ माह का मादा तेंदुए की सडक दुर्घटना में मौत हो गयी। जब प्रभागीय निदेशक का कार्यभार देख रहे है आरके सिंह उपप्रभागीय वनाधिकारी से जानकारी ली गयी तो वे उसकी आयु, घटना स्थल और उसके नर अथवा  मादा होने की जानकारी भी नहीं बता सके। इतने उदाहरण से ही उनकी कार्यकुशलता का अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। वास्तविकता तोे यह है उनको वन्यजीव प्रबंधन की कोई जानकारी ही नहीं है। जिसके चलते वन्यजीवों के बाहर निकलने पर मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनायें हो सकती है, जो कदापि उचित नहीं होगी। 

डॉ.अमिताभ अग्निहोत्री ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि आप पीलीभीत में वन्यजीवों की सरुक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी फिर से पीलीभीत टाईगर रिजर्व प्रशासन को सौंप दे ंतो यह जनहित और वन्यजीवों दोनों के हित में होगा। आशा है कि आप इस पर तत्काल निर्णय लेकर वन्यजीवों तथा मानवों को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान करेंगे।

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