झारखंड गठन के 23 साल बाद भी बोकारो जिला के किसी भी गांव का सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित होना दुर्भाग्य की बात है- झारखंड आंदोलनकारी इफ्तिखार महमूद

 सड़क, बिजली पेजल जैसी आधारभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित और लूग्गु और जिंगा पहाड़ के बीच जंगलों से गिरा असनापानी, बिरहोरडेरा और काशीटांड के आदिवासी ग्रामीणों की  बुधन मांझी की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में ग्रामीणों की पिंड़ा दायक समस्याओं को सूनने के बाद भाकपा राजद जन अभियान के संयोजक एवं झारखंड आंदोलनकारी इफ्तिखार महमूद ने कहा कि झारखंड गठन के 23 साल बाद भी बोकारो जिला के किसी भी गांव का सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित होना दुर्भाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि असनापानी हो या बिरहोर डेरा या काशीटांड -इन सब गांव में हाथियों का झुंड का आना लगा रहता है। ऐसी हालत में लोगों के जीवन रक्षा के लिए बिजली का होना आवश्यक है, किंतु  कारवाईयां सिर्फ फाइलों में ही सिमटा हुआ है। उन्होंने कहा कि दो माह पूर्व सितंबर माह में "सड़क" का न होने के कारण संजय किस्कू की गर्भवती पत्नी का इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने में अत्यंत विलंब हुआ, परिणामस्वरूप बच्चा जन्म से पहले ही मर गया।


              श्री महमूद ने कहा कि बिरहोरडेरा के बगल से बरकाकाना -गोमो रेल लाइन गुजरता है। पैसेंजर ट्रेनों का  हॉल्ट भी कर देने से उपर्युक्त तीनों गांव के ग्रामीणों को बहुत राहत मिल सकती है, किंतु इस ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। कहा कि उत्तराखंड में एक भी घर किसी पहाड़ पर होता है तो वहां बिजली और पानी की सुविधा दी गई है। लेकिन झारखंड में विकास की गतिविधियां सिर्फ शहरों तक ही सीमित दिखलाई पड़ती है। श्री महमूद ने सड़क और बिजली के लिए तुरंत कार्रवाई करने पर बोल दिया।

बैठक में दसई रविदास, सुभाष मांझी, रमेश मांझी, बिरालाल किस्कू,रॉबिन टुडू, तालो देवी, तालो मरांडी,लालजी मांझी, राम जी मांझी इत्यादि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

फोटो:- ग्रामीणों को संबोधित करते हुए इफ्तेखार महमूद।

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