बहनों-बेटियों की हिफ़ाज़त पर ध्यान दें मुसलमान – मौलाना अदनान रज़ा

रिपोर्ट-नाजिश अली

कुल शरीफ में आरएसी मुख्यालय  पर उमड़ी भीड़

 नबीरा-ए-आला हज़रत का ख़ास पैग़ाम

आला हज़रत के कुल शरीफ़ से पहले तक़रीर में दी हिदायत लड़कियों को तालीम ज़रूरदिलाएं मगर शरीअत के दायरे में*सोची-समझी साज़िश को नाकाम करने पर ध्यान देना ज़रूरी

बरेली, उर्स-ए-रज़वी के तीसरे और आख़िरी दिन क़ुल शरीफ़ की फ़ातिहा से ठीक पहले नबीरा-ए-आला हज़रत व ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी (आरएसी) के नायब सदर मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने अपनी तक़रीर में क़ौम को ख़ास पैग़ाम दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि बहनों-बेटियों की इज्ज़त की हिफ़ाज़त पर ख़ास ध्यान दें। इस दौर में एक सोची-समझी साज़िश के तहत मुस्लिम लड़कियों को बहका कर उनका ईमान छीना जा रहा है। इस साज़िश को नाकाम करने का रास्ता शरीअत की पाबंदी ही है। लड़कियों को पढ़ाना-लिखाना ज़रूरी है मगर इसका मतलब यह नहीं कि उनको दीन की अहमियत न बताई जाए। स्कूल-कॉलेज, कोचिंग या फिर ज़रूरत पड़ने पर कामकाज के लिए बाहर आने-जाने के दौरान उनकी हिफ़ाज़त बेहद ज़रूरी है।



आला हज़रत के 105वें उर्स के तीसरे और आख़िरी दिन ख्वाजा कुतुब स्थित आरएसी मुख्यालय “बैतुर्रज़ा” पर सुबह 10 बजे से  क़ुल शरीफ़ का जलसा शुरू हुआ तो देशभर से आए उलमा व अक़ीदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी मुख्यालय के आसपास का पूरा इलाका जायरीन से भर गया जिसमे उत्तर प्रदेश के आलावा देहली पंजाब उत्तराखंड छत्तीसगढ़ बिहार बंगाल उड़ीसा हैदराबाद महाराष्ट्र मध्यप्रदेश से आरएसी कि टीमें शामिल रही।

आरएसी के कुल हिंद सदर हज़रत अफ़रोज़ रज़ा क़ादरी की सरपरस्ती में सजी इस नूरानी महफ़िल की सदारत नबीरा-ए-आला हज़रत मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने की। हजरत अदनान मियां के साहबज़ादे अली रज़ा मियां ने कलम पढ़ा हाफिज इमरान रज़ा ने कलाम-ए-पाक की तिलावत से आग़ाज़ किया। इस मौक़े पर नबीरा-ए-आला हज़रत मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने कहा कि यह बात साफ़ ज़ाहिर हो चुकी है कि एक सोची-समझी साज़िश के तहत मुसलमान लड़कियों को बरग़ला कर उनका ईमान छीना जा रहा है। धोखे में आकर अपना दीन-ईमान गंवाने वाली लड़कियों का हश्र क्या होता है यह भी आए दिन सबके सामने आता रहता है। या तो उनकी इज्ज़त से ख़िलवाड़ करके दर-दर की ठोकरें खाने को छोड़ दिया जाता है या फिर उनकी लाश बहुत बुरी हालत में बरामद होती है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को समझना होगा कि हर साज़िश को नाकाम करने का सबसे सीधा रास्ता शरीअत पर अमल करना है। लड़कियों के ईमान, इज्ज़त और जान की हिफ़ाज़त भी शरीअत पर अमल करके ही मुमकिन है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि पर्दे का एहतमाम किया जाए। लड़कियां अगर पढ़ाई-लिखाई के लिए बाहर जाएं तो उनके आने-जाने के दौरान उनकी हिफ़ाज़त का ज़रूरी इंतज़ाम किया जाए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम घरानों की बुज़ुर्ग और सीनियर औरतों को चाहिए कि वो लड़कियों को दीन की अहमियत समझाएं, पर्दे करने की हिदायत दें और उनके ख़िलाफ़ चलाई जा रही खुसी साज़िश से आगाह करें। आला हज़रत की शान बयान करते हुए नबीरा-ए-आला हज़रत ने कहा कि उनको सबसे बड़ा ख़िराज-ए-अक़ीदत यही है कि शरीअत की पाबंदी की जाए। इश्क़-ए-नबी की शमा सीने में रोशन की जाए और अपनी आने वाली नस्लों को मसलक-ए-आला हज़रत का पाबंद बनाया जाए। इस मौके पर हज़रत मुफ्ती उमर रज़ा मुरादाबादी ने अपनी तक़रीर में कहा कि मुसमलानों को चाहिए कि अगर उनके बीच कोई झगड़ा या नाइत्तेफ़ाक़ी हो जाए तो वो अपने इलाक़े के बड़े सुन्नी उलमा के पास जाकर उसको हल कराएं। इस नूरानी जलसे मे मौलाना सय्यद दिलशाद नूरी मौलाना नईम उल कादरी मौलाना सलीम रज़ा मौलाना शाहिद रज़ा मौलाना कमरुज्जमा मौलाना अबरार रज़ा ने भी ख़िताब फ़रमाया। इसके अलावा सद्दाम रज़ा हमदम फैजी रिज़वान रज़ा मोहम्मद अली फैजी शोएब रज़ा अफजल मेहकश कलकत्तवी आलम बरकाती उस्मान रज़ा इस्लाम बरकाती ने नातें व मनक़बत पेश कीं। आख़िर में आला हज़रत का क़ुल शरीफ़ हुआ। हज़रत अदनान रज़ा क़ादरी ने ख़ुसूसी दुआ फ़रमाई। महफ़िल का संचालन हाफिज इमरान रज़ा बरकाती ने किया। 

उर्स-ए-रज़वी के तीनों दिन आरएसी मुख्यालय, क़रौलान और कोहाड़ापीर सहित कई जगहों पर लंगर का एहतमाम किया गया। रेलवे जंक्शन के पास माल गोदाम रोड पर लगे रज़ा हेल्पलाइन कैंप से अक़ीदतमंदों के लिए मुफ्त टेंपो सेवा चलाई गई। कोहाड़ापीर पर लगे हेल्पलाइन कैंप में तीसरे और आख़िरी दिन मेडिकल कैंप भी लगा। तीनों दिन ज़िले के कोने-कोने से आरएसी की टीमें चादरों के जुलूस लेकर दरगाह आला हज़रत पहुंचीं। लंगर, ज़ायरीन की ख़िदमत, उनके रहने-ठहरने और आने-जाने के इंतज़ाम तीनों दिन-रात लगातार चलता रहा। क़ुल शरीफ़ की रस्म के बाद तमाम उलमा व अक़ीदतमंद हज़रत अदनान मियां से इजाज़त लेकर अपने-अपने घरों की जानिब रवाना हुए।

इस मौके पर मौलाना हम्माद रज़ा मौलाना अब्दुल्लाह रज़ा उस्मान रज़ा खान अब्दुल हन्नान मुशाहिद रफत हाफीज़ इमरान रज़ा अब्दुल हलीम खान अब्दुल लतीफ कुरैशी ताज खान रजब अली साजू हनीफ रज़ा अजहरी सईद सिब्तैनी रेहान यार खान अमिक रज़ा मुजफ्फर अली सय्यद रिज़वान मोहम्मद चांद मोहम्मद यूसुफ जाहिद अली गद्दी राशिद अली आफताब हुसैन बाबुउद्दीन ब महबूब खान हाफिज आरिफ साहिल रज़ा अनवर हुसैन फुरकान रज़ा शोएब रज़ा मोईद रज़ा शारिक रज़ा रिज़वान रज़ा इशाकत अल्वी। दानिश रज़ा सलीम मिर्जा उज़ैफ रज़ा उस्मान रज़ा मौलाना सय्यद तौकीर रज़ा मौलाना सफदर अली दिलशाद रज़ा सय्यद मुज्जफर अली शाहबाज रज़ा फैजान रज़ा तौहीद रज़ा शारीक रज़ा उवैस रज़ा मोहम्मद सरताज शहरोज रज़ा सुहैल शेख मजहर खान सलमान खान जाहिद रज़ा आरिफ खान नज़म बरकाती आमिर रज़ा साजिद रज़ा सहित बड़ी तादाद में  बरेली सहित आरएसी कार्यकर्ता वा पदाधिकारी जायरीन कि खिदमत लगे रहे

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