किन्नर वर्ग की पीड़ा उजागर , इस दुनिया में तीसरी दुनिया, नामक पुस्तक चर्चित कवि सोशल एक्टिविस्ट रमाकांत चौधरी कि पाठकों के सामने है|

 रिपोर्ट- वीरेंद्र बिष्ट

गोला गोकर्णनाथ के चर्चित कवि सोशल एक्टिविस्ट श्री रमाकांत चौधरी ने इस दुनिया में तीसरी दुनिया की पाठकीय प्रतिक्रिया लिखकर भेजी है आप का हार्दिक आभार।

लखीमपुर,साहित्यकार के मन में सदैव वह ख्याल ही आते हैं जिस तरफ  दुनिया के तमाम अन्य लोग ध्यान नहीं दे पाते हैं। देश के सुविख्यात साहित्यकार सुरेश सौरभ एवं डॉ शैलेष गुप्त 'वीर' के संपादन में ऐसी ही एक पुस्तक है 'इस दुनिया में तीसरी दुनिया' । यह अनूठा लघुकथा संग्रह जो किन्नर विमर्श पर आधारित है। जैसे ही आप पुस्तक का नाम पढ़ेंगे तो आपकी आँखों के सामने वह तमाम दृश्य घूम जाएंगे जो पूर्व में कहीं बस स्टॉप, ट्रेन   तथा दुकानों सहित शादी विवाह, मुंडन, आदि शुभ अवसरों पर किन्नरों को नाचते गाते देखा गया  तथा बधाई व नेग पाने के लिए लड़ते झगड़ते भी देखा गया है। किंतु वास्तव में जब आप पुस्तक पढ़ेंगे तब पता चलेगा कि किन्नरों के नाचने गाने की दुनिया से हटकर एक उनकी दर्द व पीड़ा भरी दुनिया भी है । जिसे  इस लघुकथा संग्रह में बखूबी  प्रस्तुत किया गया है। किन्नर वर्ग समाज का वह वर्ग है जिसे  अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना गया है, 


कहीं किन्नर, कहीं शिखंडी तो कहीं-कहीं हिजड़ा नाम से पुकारा गया है।  इस पुस्तक में 78  साहित्यकारों ने अपनी लघुकथाओं के माध्यम से इनके दुख दर्द को, इनकी संवेदना को, इनकी पीड़ा को उजागर करने का अप्रतिम कार्य किया है। अनीता रश्मि की "दिल की बात', अभय कुमार भारती की 'फरिश्ते', कल्पना भट्ट की 'अविभाज्य', डॉ. कुसुम जोशी की 'मैं भी

हिस्सा हूं', गोविंद शर्मा की 'इंसान', डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी की 'भय किससे' ज्योति जैन की 'नामर्द' , ज्योति शंकर पंडा 'हयात' की 'किन्नरों की मौत' , भगवती प्रसाद द्विवेदी की 'सिक्के का दूसरा पहलू' यशोधरा भटनागर की 'छक्का', रेखा शाह आरबी की 'त्याग' , डॉ. शैलेश गुप्त 'वीर' की 'राजकुमार मिल गया', सुधा दुबे की 'इज्जत के रहबर' और सुरेश सौरभ की 'एक राखी का इंतजार' आदि सभी ऐसी  लघुकथाएँ हैं जिनमें यहां दर्शाया गया है कि किन्नरों का समाज में एक स्थान है, एक उनका जीवन है, और उस जीवन में जो पीड़ा है  सभी साहित्यकारों ने लघुकथा के माध्यम से  उजागर किया गया है । कुल मिलाकर यह मार्मिक प्रासंगिक साझा लघुकथा संग्रह , समाज में एक ऐसे वर्ग का दुख दर्द उजागर करता है जो सदियों से उपेक्षित रहा है । हालांकि वर्तमान समय में संवैधानिक रूप से इस वर्ग को अधिकार मिल चुके हैं जो इन्हे सम्मान पूर्वक जीवन व्यतीत करने का अवसर प्रदान करते हैं। किंतु सामाजिक रूप से इन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए वह अभी तक नहीं प्राप्त हो सका है, जिसके लिए यह  संग्रह विमर्श करता दीख पड़ता है।  किन्नर वर्ग के दुख, पीड़ा  को लघुकथाओं  के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के लिए 'इस दुनिया में तीसरी दुनिया' नामक लघुकथा संग्रह प्रकाशित करने के लिए इसके संपादक सुरेश सौरभ व डॉ.शैलेश गुप्त 'वीर' तथा पुस्तक प्रकाशित करने वाली संस्था श्वेत वर्णा प्रकाशन (नई दिल्ली) को बहुत-बहुत  हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सपा समर्थित उम्मीदवार श्रीमती उज़मा रशीद को अपना बेशकीमती वोट देकर भारी बहुमत से विजई बनाएं

सपा समर्थित उम्मीदवार श्रीमती उजमा आदिल की हार की समीक्षा

सरधना के मोहल्ला कुम्हारान में खंभे में उतरे करंट से एक 11 वर्षीय बच्चे की मौत,नगर वासियों में आक्रोश