मोदी सरकार की विफलता का प्रमाण है ₹2000 के नोट को प्रचलन से बाहर करने का फैसला| मुस्तकीम मंसूरी

 बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए लखनऊ से वीरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट, 

लखनऊ, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा ₹2000 के नोट को चलन से बाहर किए जाने की घोषणा पर ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस के राष्ट्रीय महासचिव मुस्तकीम मंसूरी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री द्वारा अचानक नोटबंदी की घोषणा के बाद ₹1000 और ₹500 के नोटों को बंद करके ₹2000 के नोट और ₹500 के नए नोट को चलन में लाया गया था| जिसमें आरबीआई द्वारा आज ₹2000 के नोट को चलन से बाहर किया गया जिससे देशवासियों में हड़कंप मच गया| परंतु आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार 30 सितंबर 2023 तक ₹2000 के नोटों को बैंकों में एक बार में 10 नोट ही बदले जा सकेंगे| अब सवाल यहा यह उठता है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों को नोटबंदी के बाद दोबारा नोट बदलने के लिए बैंकों की लाइनों में खड़ा होने पर मजबूर कर दिया है| मुस्तकीम मंसूरी ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल करते हुए कहा कि उन्हें देशवासियों को बताना चाहिए कि ₹2000 का नोट क्यों लाए थे| और 6 साल 6 महीने के बाद ₹2000 का नोट क्यों बंद करना पड़ा| मुस्तकीम मंसूरी ने कहा 2016 से अब तक 500 और 2000 के 6849 करोड़ नोट छापे गए वर्ष 2016-17 में 350 करोड वर्ष 2017-18 में 1510 करोड़ वर्ष 2018-19 में 470 करोड़ इस तरह 2000 के नोट 370 करोड़ छापे गए, और वर्ष 2016 से 2023 तक 6579 करोड़ ₹500 के नोट छापे गए, रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से ₹2000 के नोटों की छपाई बंद कर दी गई थी| से स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री जानते थे कि उनके द्वारा नोटबंदी के बाद ₹2000 के नोट प्रचलन में लाने की नीति पूरी तरह फेल होने के साथ ही काले धन पर अंकुश लगने के बजाय ₹2000 के नोट के चलन से पूजी पतियों को काला धन सफेद करने का पूरा अफसर सरकार द्वारा प्रदान किया गया यही कारण है कि ₹2000 का नोट आज मार्केट से गायब हो गया है| मुस्तकीम मंसूरी ने कहा मोदी सरकार से पहले की सरकारों में चलाई गई करंसी 70 साल तक प्रचलन में रही परंतु मोदी सरकार का नोट बंदी के लिए लिया गया निर्णय गलत साबित हुआ और मोदी सरकार द्वारा प्रचलन में लाया गया 2000 का नोट 6 साल 6 महीने में चलन से बाहर हो गया| इसका मतलब मोदी सरकार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसे अच्छे अर्थशास्त्र की जानकारी हो और वह देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सके आज ₹2000 के नोट के प्रचलन से बाहर होना इस बात का संकेत है कि मोदी सरकार कि अनुभव हीनता के कारण ही देश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है जिसे पटरी पर लाना मोदी सरकार के सामने बड़ी चुनौती के रूप में खड़ी है| मुस्तकीम मंसूरी ने सवाल किया की 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा और आज ₹2000 के नोट को प्रचलन से बाहर करने की घोषणा भी शाम को ही की गई सुबह 10:00 बजे क्यों नहीं| अचानक में लिए गए फैसले से देश के करोड़ों लोग आश्चर्यचकित है|

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