रूस-यूक्रेन जंग के बीच लौटे मेडिकल स्टूडेंट्स यानि एमबीबीएस छात्रों की अधूरी पढ़ाई को पूरा कराया जाय

नई दिल्ली (अनवार अहमद नूर) रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच लौटे मेडिकल स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में लटक गया है। उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई है। छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने कराने की मांग को लेकर पिछले काफ़ी दिनों से सड़क पर उतर कर भी अपनी बात कह रहे हैं। लेकिन अभी तक उनकी कोई मदद सरकार ने नहीं की है। यूक्रेन से लौटे मेडिकल स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्हें अब अपने देश के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन देकर उनकी पढ़ाई पूरी कराई जाए। अपनी इसी मांग को लेकर पिछले दिनों दर्जनों छात्र दिल्ली के जन्तर मन्तर पर धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल भी कर चुके हैं। जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के एमबीबीएस के स्टूडेंट्स थे।




परेंट्स एसोसिएशन आफ यूक्रेन एमबीबीएस स्टूडेंट्स इंडिया के तत्वाधान में इन छात्रों की मांगों को लगातार उठाया जाता रहा है। अध्यक्ष आर बी गुप्ता द्वारा दी गयी प्रेस विज्ञप्ति में उन प्रोटेस्ट करने वालों की संख्या लगभग 350 बताई गयी थी। अब छत्तीसगढ़ के यूक्रेन से लौटे स्टूडेंट्स को को लेकर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख एल. मांडविया को पत्र लिखकर मेडिकल स्टूडेंट्स की पढ़ाई पूरी कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन से लौटे स्टूडेंट्स को देश के मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटें आवंटित कर शामिल किया जाना चाहिए।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कम खर्च में पढ़ाई व आसान एडमिशन के कारण हर साल देश के हजारों स्टूडेंट्स मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन जाते हैं। फरवरी-2022 में रूस-यूक्रेन में युद्ध शुरू हो गया। युद्ध के बाद भारतीय स्टूडेंट्स को वहां से लाया गया। इसमें छत्तीसगढ़ के 207 स्टूडेंट्स भी शामिल हैं। वापस आने के बाद स्टूडेंट्स पढ़ाई से वंचित हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री टीएस सिंहदेव ने यूक्रेन से लौटे स्टूडेंट्स के भविष्य को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख एल. मांडविया को पत्र लिखकर इनकी पढ़ाई पूरी कराने का आग्रह किया है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से विशेष पॉलिसी बनाने की मांग की है। ऐसा करने से छात्र-छात्राओं का भविष्य सुरक्षित रहेगा और इससे देश में डॉक्टरों की कमी भी दूर होगी।

मंत्री टीएस सिंहदेव ने पत्र में कहा है कि देश के मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटें बढ़ाई जाए और यूक्रेन से लौटे स्टूडेंट्स को दाखिला दिया जाए।

भारत की सरकार ने युद्ध के दौरान सभी स्टूडेंट्स को सुरक्षित वहां से निकाला। लेकिन इन की मेडिकल की पढ़ाई बीच में छूट गयी इस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया है। अब इनस्टूडेंट्स की पढ़ाई पूरी कराने की जिम्मेदारी भी केंद्र सरकार की है।

देश के विभिन्न राज्यों में लौटे स्टूडेंट्स के भविष्य को देखते हुए केंद्र सरकार जल्द निर्णय लें और कोई पॉलिसी बनाएं। यूक्रेन मेडिकल पैरेन्ट्स एंड स्टूडेंट एसोसिएशन का मांग पत्र भी केंद्रीय मंत्री को भेजा गया है। बता दें कि युद्ध के दौरान सीएम भूपेश बघेल ने छात्रों के दिल्ली व मुंबई लौटने पर ठहरने और वहां से घर तक पहुंचाने की नि:शुल्क व्यवस्था की थी। लेकिन देश लौट आने के बाद ऐसे सभी विधार्थियों को नज़रंदाज़ कर दिया गया। देश की राजधानी दिल्ली में 26-6-2022 को जन्तर मन्तर पर भी इन विद्यार्थियों ने धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल की थी।

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